झारखंड सरकार की फूलो-झानो योजना से बदली सुशांति की किस्मत, हड़िया छोड़ बनी सफल उद्यमी
लोहरदगा की सुशांति उरांव ने झारखंड सरकार की फूलो-झानो आशीर्वाद योजना से जुड़कर हड़िया बिक्री का काम छोड़ दिया। ...और पढ़ें

हड़िया की बिक्री छड़ बनी उद्यमी

समय कम है?
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राजेश प्रसाद गुप्ता, भंडरा (लोहरदगा)। जिले के भंडरा प्रखंड के कोटा गांव की सुशांति उरांव की कहानी संघर्ष, आत्मबल और सरकारी सहयोग से बदलाव की मिसाल बन गई है। कभी हड़िया बिक्री कर परिवार चलाने को मजबूर सुशांति आज एक सफल उद्यमी हैं और क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।
कोटा बड़का टोली निवासी सुशांति का जीवन पहले अभावों से घिरा था। परिवार के भरण-पोषण के लिए उनके पास हड़िया बिक्री करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इस काम के कारण उन्हें समाज में ताने और अपमान सहना पड़ता था।
इससे उनके पारिवारिक जीवन पर भी गहरा असर पड़ा। उनके पति को शराब की लत लग गई, जिससे घर में अक्सर कलह और घरेलू हिंसा की स्थिति बनी रहती थी। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ रहा था।
फूलो-झानो आशीर्वाद योजना से सुशांति की बदली किस्मत की दिशा
सुशांति के जीवन में निर्णायक मोड़ मई 2024 में आया, जब उन्हें झारखंड सरकार की फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान की जानकारी मिली। इस योजना के तहत हड़िया-दारू बिक्री कर अपनी गुजार करने वाली महिलाओं को सम्मानजनक रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। सुशांति ने इस अवसर को अपनाते हुए हड़िया का धंधा छोड़ने का संकल्प लिया और योजना से जुड़ गईं।
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20 हजार के ऋण से शुरू की नई राह
योजना के तहत उन्हें 20 हजार रुपये का ऋण मिला, जिससे सुशांति ने अपने गांव में एक छोटी सी किराने की दुकान खोली। मेहनत और लगन के बल पर आज उनकी दुकान अच्छी तरह चल रही है और वे प्रतिमाह 10 से 12 हजार रुपये तक की आमदनी कर रही हैं।
सुशांति कहती हैं कि अब वह कोई ऐसा काम नहीं करेंगी, जिससे परिवार की इज्जत को ठेस पहुंचे। पहले जहां उन्हें ताने सुनने पड़ते थे, वहीं अब समाज में उन्हें सम्मान मिल रहा है।
परिवार में लौटी खुशहाली, पति ने छोड़ी शराब
सबसे बड़ा बदलाव उनके पारिवारिक जीवन में देखने को मिला। सुशांति बताती हैं कि उन्होंने जब शराब का कारोबार छोड़ा, तो उनके पति ने भी शराब पीना छोड़ दिया। अब घर में शांति का माहौल है और बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दिया जा रहा है।
सुशांति की सफलता यह संदेश देती है कि सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग से कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है। आज सुशांति अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और समाज के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।