Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    पाकुड़ में 94 दिनों से जारी हड़ताल से विकास काम के ठप, गांवों में गहराया रोजगार का संकट

    Updated: Wed, 10 Jun 2026 06:19 PM (IST)

    मनरेगा कर्मियों की 94 दिनों से जारी हड़ताल के कारण पाकुड़ जिले में ग्रामीण विकास कार्य ठप हो गए हैं, जिससे गांवों में रोजगार का गंभीर संकट गहरा गया है ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    HighLights

    1. पाकुड़ में 93 दिन से मनरेगा कर्मियों की हड़ताल जारी।

    2. ग्रामीण विकास कार्य ठप, गांवों में रोजगार संकट गहराया।

    3. दीदी बाड़ी, आबुआ आवास जैसी योजनाएं बुरी तरह प्रभावित।

    संवाद सहयोगी, पाकुड़। ग्रामीण विकास की रीढ़ मानी जाने वाली मनरेगा योजना जिले में गंभीर संकट से गुजर रही है। मनरेगा कर्मियों की 93 दिनों से जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल ने विकास कार्यों की पूरी रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।

    पंचायत स्तर पर कामकाज पूरी तरह ठप है, योजनाओं की फाइलें लंबित पड़ी हैं और गांवों में रोजगार की आस लगाए बैठे मजदूर निराश होकर लौटने को मजबूर हैं। इसका सीधा असर गांवों की अर्थव्यवस्था और विकास योजनाओं की प्रगति पर साफ दिखाई दे रहा है।

    सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण और वेतन संरचना में समानता की मांग को लेकर मनरेगा कर्मचारी संघ के बैनर तले जिलेभर के कर्मी लगातार आंदोलनरत हैं। बुधवार को कलेक्ट्रेट के समीप धरना देकर कर्मियों ने अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया।

    संघ का आरोप है कि वर्षों से अल्प मानदेय और असुरक्षित सेवा शर्तों के बीच कार्य करने के बावजूद उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर सरकार स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

    हड़ताल के कारण मस्टर रोल जारी करने, मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने, तकनीकी स्वीकृति, भुगतान प्रक्रिया और योजनाओं की निगरानी जैसे सभी महत्वपूर्ण कार्य पूरी तरह बाधित हो गए हैं। इसका असर जिले की प्रमुख योजनाओं दीदी बाड़ी, आबुआ आवास, बिरसा सिंचाई कूप, बागवानी, जल संरक्षण और मिट्टीकरण पर भी पड़ा है, जहां कई कार्य ठप या अधूरे पड़े हैं।

    खबरें और भी

    आंकड़ों के अनुसार जिले में मनरेगा के तहत 99,847 सक्रिय मजदूर पंजीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में मात्र 7,845 मजदूरों को ही रोजगार मिल पा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में मई तक 5,84,973 मानव दिवस सृजन का लक्ष्य निर्धारित था, जिसके विरुद्ध अब तक केवल 1,39,663 मानव दिवस ही सृजित हो सके हैं, जो मात्र 23.88 प्रतिशत है।

    ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा केवल रोजगार योजना नहीं, बल्कि गांवों की विकास धुरी है, जो लंबे गतिरोध के कारण पूरी तरह प्रभावित है। अब सभी की निगाहें सरकार और आंदोलनरत कर्मियों के बीच समाधान की दिशा में होने वाली पहल पर टिकी हैं।

    यह भी पढ़ें- रामगढ़ DC ने की स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा, बायोमेट्रिक अटेंडेंस-रोस्टर ड्यूटी को सख्ती से लागू करने का निर्देश

    यह भी पढ़ें- झारखंड में असंगठित कर्मचारियों का हो रहा रजिस्ट्रेशन, मृत्यु-दुर्घटना और विवाह जैसी योजनाओं का मिलेगा लाभ