LPG के बाद अब अमोनिया का झटका: ₹84 से सीधे ₹126 पहुंची कीमत, कोल्ड स्टोरेज का खर्च बढ़ा
पलामू में Ammonia gas refill cost 2026 में 42 रुपये प्रति किलो की वृद्धि हुई है, जिससे कोल्ड स्टोर संचालकों की चिंता बढ़ गई है। ईरान-इजरायल युद्ध के क ...और पढ़ें

अमोनिया गैस महंगी होने से कोल्ड स्टोर संचालकों की बढ़ी लागत, किसानों पर भी असर संभव। (फोटो: जागरण)
HighLights
अमोनिया गैस 42 रुपये प्रति किलो महंगी हुई।
ईरान-इजरायल युद्ध से आपूर्ति प्रभावित हुई।
कोल्ड स्टोर संचालकों की लागत में वृद्धि हुई।
जागरण संवाददाता, मेदिनीनगर (पलामू)। एलपीजी की किल्लत के बीच अब कोल्ड स्टोरेज में इस्तेमाल होने वाली अमोनिया गैस की कीमत में अचानक भारी बढ़ोतरी हो गई है। इससे कोल्ड स्टोर संचालकों की चिंता बढ़ गई है।
आपूर्तिकर्ताओं के अनुसार ईरान-इजरायल युद्ध के कारण अमोनिया गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका असर स्थानीय बाजार पर भी पड़ा है। कोल्ड स्टोर संचालकों ने बताया कि पहले अमोनिया गैस 84 रुपये किलो मिल रही थी, जो अब बढ़कर 126 रुपये प्रति किलो हो गई है।
यानी एक महीने में इसकी कीमत में 42 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। इससे कोल्ड स्टोर के संचालन खर्च में सीधा इजाफा हुआ है। दरअसल, कोल्ड स्टोरेज में तापमान नियंत्रित रखने के लिए अमोनिया गैस का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने से लागत पर असर पड़ना स्वाभाविक है।
हालांकि, मेदिनीनगर स्थित पलामू कोल्ड स्टोरेज प्राइवेट लिमिटेड के संचालक अजीत मेहता ने फिलहाल किसानों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालने की बात कही है। उनका कहना है कि अभी आलू भंडारण के किराये में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की गई है। किसानों से पहले की तरह ही शुल्क लिया जा रहा है।
हर साल फरवरी माह में तय होती है भंडारण दर
कोल्ड स्टोर संचालकों ने बताया कि हर साल फरवरी में भंडारण दर तय की जाती है और इस वर्ष का रेट पहले ही निर्धारित हो चुका है। ऐसे में तत्काल किराया बढ़ाना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि मार्च से अक्टूबर तक आलू भंडारण का पीक सीजन रहता है।
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इसी दौरान बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज कोल्ड स्टोर में रखते हैं। एक संचालक ने बताया कि फिलहाल किसानों से आधा किराया आलू रखने के समय लिया जा रहा है, जबकि शेष राशि निकासी के समय ली जाएगी।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि अमोनिया गैस समेत अन्य संचालन लागत में लगातार बढ़ोतरी होती रही, तो निकासी के समय किराये में संशोधन की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। किसानों को इस संबंध में पहले से आगाह भी किया जा रहा है।
संचालकों का कहना है कि बढ़ती लागत के बावजूद किसानों को राहत देने की कोशिश की जा रही है, लेकिन यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो आगे इसका असर भंडारण शुल्क पर पड़ सकता है। इससे किसानों की चिंता भी बढ़ गई है, क्योंकि बढ़ती लागत का सीधा असर उनकी आमदनी पर पड़ेगा।
हर साल फरवरी में तय होती है भंडारण दर
कोल्ड स्टोर संचालकों के अनुसार, हर साल फरवरी में भंडारण शुल्क तय कर दिया जाता है। इस कारण बीच सीजन में किराये में बदलाव करना आसान नहीं होता। मार्च से अक्टूबर तक भंडारण का मुख्य सीजन रहता है।
साल में एक बार होती है गैस की रिफिलिंग
कोल्ड स्टोर संचालकों ने बताया कि अमोनिया गैस की रिफिलिंग आमतौर पर साल में एक बार कराई जाती है। जरूरत पड़ने पर बीच में दोबारा भी गैस भरानी पड़ सकती है।
पलामू कोल्ड स्टोरेज प्राइवेट लिमिटेड के संचालक अजीत मेहता ने बताया कि उनके यहां अप्रैल में अमोनिया गैस की रिफिलिंग होती है। यदि रिफिलिंग की लागत बढ़ती है तो उसके अनुसार आगे जरूरी निर्णय लिया जाएगा।
पहले और अब
- पहले कीमत : 84 रुपये प्रति किलो
- वर्तमान कीमत : 126 रुपये प्रति किलो
- बढ़ोतरी : 42 रुपये प्रति किलो
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