Navratri 2026: झारखंड के प्रसिद्ध 9 देवी मंदिर, रजरप्पा से इटखोरी तक; यहां विराजती हैं साक्षात माता
Navratri 2026: आज झारखंड के 9 प्रमुख देवी मंदिरों को जानें, जो नवरात्रि उत्सव के लिए महत्वपूर्ण हैं। रजरप्पा में मां छिन्नमस्तिके, दिउड़ी और इटखोरी मा ...और पढ़ें

प्राचीन मंदिरों में भक्तों की असीम श्रद्धा और आस्था। रामगढ़ स्थित मां छिन्नमस्तिके मंदिर का चित्र।
HighLights
राज्य के 9 प्रमुख मंदिर, जहां साक्षात विराजती हैं माता रानी।
रजरप्पा छिन्नमस्तिके, दिउड़ी, इटखोरी भद्रकाली मंदिर शामिल।
जागरण संवाददाता, रांची। आज से नवरात्र प्रारंभ हो रहा है। साल में दो नवरात्र है। दोनों संधिकाल में। चैत्र से ही भारतीय नए साल की शुरुआत होती है। नौ दिनों तक मां के अलग-अलग रूपों की आराधना भक्त करते हैं। मां की आराधना से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
झारखंड में भी दर्जनों देवी मंदिर हैं। गांव-गांव देवी मंडप भी होता है। यहां प्रमुख नौ देवी मंदिरों के बारे में उल्लेख किया जा रहा है।
1-हाराडीह मंदिर
रांची जिले के तमाड़ ब्लाक में कांची नदी के तट पर स्थित है। रांची से लगभग 60 किमी दूर है। यहां 16 भुजाओं वाली मां दुर्गा (महिषासुरमर्दिनी) की काले पत्थर की प्रतिमा है। मां यहां ध्यान मुद्रा में बैठी हैं और जिस सिंह पर विराजमान हैं, वह भी ध्यानमुद्रा में है। एक हजार साल से भी पुरानी प्रतिमा है। यहां मंदिर नया बना है, लेकिन प्राचीन मंदिरों के खंडहर यहां बिखरे पड़े हैं। देउड़ी मंदिर और हाराडीह मंदिर में काफी समानता हैं।

2 दिउड़ी मंदिर
रांची-टाटा रोड पर तमाड़ से तीन किलोमीटर दूर स्थित है प्राचीन दिउड़ी मंदिर। मंदिर में सोलहभुजी मां दुर्गा विराजती हैं। नवरात्र के अवसर पर मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा है। मंदिर में सोलहभुजी मां दुर्गा के अलावा भगवान शिव की मूर्ति भी स्थापित है। इस मंदिर को आदिवासी और हिंदू संस्कृति का संगम कहा जाता है, क्योंकि इस मंदिर के पुजारी पाहन और ब्राह्मण दोनों हैं।
3 मां उग्रतारा मंदिर
लातेहार के चंदवा प्रखंड के नगर गांव स्थित मां उग्रतारा मंदिर में दुर्गा पूजा का त्योहार बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। यहां सोलह दिनों की नवरात्र साधना होती है। कैथी भाषा में लिखे पांच सौ वर्ष पुराने ग्रंथ का अनुसरण करते हुए पूजा अनुष्ठान कराया जाता है। मंदिर के मुख्य प्रकोष्ठ में उग्रतारा की छोटी-छोटी मूर्तियां हैं, जो हमेशा वस्त्राच्छादित रहती हैं।
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4 मां छिन्नमस्तिके मंदिर
रांची से करीब 80 किमी दूर रामगढ़ के रजरप्पा में स्थित मां छिन्नमस्तिके मंदिर सिद्धपीठ है। मां छिन्नमस्तिके के रूप में मां दुर्गा भक्तों की समस्त मनोकामना पूरा करती हैं। भैरवी, भेड़ा और दामोदर नदी के संगम पर स्थित यह शक्तिपीठ तंत्र साधना का भी बड़ा केंद्र है। दस महाविद्याओं की सिद्धि हासिल करने के लिए साधक यहां दूर-दूर से आते हैं। मंदिर में अब दर्शन के लिए हमेशा भीड़ रहती है।

5 महामाया मंदिर
गुमला जिला मुख्यालय से से 30 किमी और घाघरा प्रखंड से आठ किमी दूर अवस्थित है हापामुनी गांव। यहां अति प्राचीन महामाया मंदिर है, जो हापामुनी गांव के बीच में है। मंदिर की स्थापना विक्रम संवत 965 यानी 908 ई में हुई थी। मंदिर की स्थापना महाराजा मोहन राय के बेटे गजघंट द्वारा की गई थी। वे नागवंश के 22 वें राजा थे। उन्होंने मंदिर की देखभाल अपने गुरु हरिनाथ, एक मराठी ब्राह्मण को सौंप दी थी।

6 मौलिक्षा मंदिर
संताल परगना के दुमका जिले में शिकारीपाड़ा के पास बसे एक छोटे से गांव मलूटी को गुप्त काशी कहा जाता है। यहां पर मौलिक्षा माता का मंदिर है, जिसकी मान्यता जाग्रत शक्तिपीठ के रूप में है। मां मौलिक्षा के मंदिर में मां के मस्तक के ही दर्शन किये जा सकते हैं। मंदिर के भीतर गर्भगृह एवं ऊंचे चबूतरा पर मां की सौम्य भव्य प्रतिमा स्थापित है। मां मौलिक्षा, मां तारा की बड़ी बहन के रूप में जानी जाती हैं।

7 मां भद्रकाली मंदिर
चतरा के इटखोरी प्रखंड मुख्यालय से करीब डेढ़ किमी दूर स्थित भदुली गांव में मां भद्रकाली मंदिर स्थित है। मंदिर में कमल के आसन पर मां भद्रकाली की आदमकद प्रतिमा वरदायिनी मुद्रा में है। मां की चतुर्भुज प्रतिमा करीब साढ़े चार पीठ ऊंची और ढाई पीठ चौड़ी है और एक बेशकीमती काले पत्थर को तराश कर बनाई गई है। प्रतिमा के चरणों के नीचे ब्राह्मी लिपि में यह अंकित है कि प्रतिमा का निर्माण नौवीं शताब्दी में राजा महेंद्र पाल द्वितीय ने कराया था।
8 गढ़देवी का मंदिर
गढ़वा जिले में मां गढ़देवी का मंदिर है। मंदिर के कारण ही जिले का नाम गढ़वा पड़ा। गढ़वा ही नहीं आसपास के राज्यों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्र में भक्तों की काफी भीड़ होती है। मंदिर परिसर में गढ़ परिवार द्वारा सालों से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर विशेष विधि विधान से पूजा किया जाता है, जिससे मंदिर पूरे नौ दिन असीम श्रद्धा का केंद्र बना रहता है।
9 मां कौलेश्वरी मंदिर
चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड से छह किलोमीटर दूर स्थित मां कौलेश्वरी मंदिर श्रद्धा और आस्था का केंद्र है। कोल्हुआ पहाड़ की चोटी पर बने इस प्राचीन मंदिर में मां कौलेश्वरी की दिव्य प्रतिमा स्थापित है। यह मंदिर दसवीं सदी में बनाया गया था। धार्मिक कथाओं के अनुसार राजा विराट ने माता के प्रतिमा को यहां स्थापित किया था। दुर्गा सप्तशती में देवी भगवती को कौलेश्वरी कहा गया है।