19 जनवरी से शुरू हो रही गुप्त नवरात्र; साधना और ध्यान का महापर्व, जानें क्या है इसकी महत्ता
पंडित कुंडल तिवारी के अनुसार, 19 जनवरी 2026 से गुप्त नवरात्र शुरू होगी, जो साधना, सिद्धि और मंत्र उपासना का विशेष पर्व है। इस दौरान व्यक्तिगत रूप से ग ...और पढ़ें

इस वर्ष गुप्त नवरात्र 19 जनवरी 2026 से प्रारंभ होगी।
HighLights
गुप्त नवरात्र साधना, सिद्धि, योग और मंत्र उपासना का पर्व है
महावीर ध्वजारोहण सामाजिक एकता और धर्म विजय का प्रतीक।
संवादसूत्र, हैदरनगर (पलामू)। सनातन धर्म में वर्ष भर में चार नवरात्र मनाए जाते हैं, जिनमें माघ मास की गुप्त नवरात्र का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। पंडित कुंडल तिवारी बताते हैं कि इस वर्ष गुप्त नवरात्र 19 जनवरी 2026 से प्रारंभ होगी।
यह वर्ष की चतुर्थ एवं अंतिम नवरात्र होगी। पंडित तिवारी के अनुसार, गुप्त नवरात्र मुख्य रूप से साधना, सिद्धि, योग, ध्यान और मंत्र उपासना का पर्व है। इस दौरान साधक शक्ति पीठों एवं मंदिरों में तांत्रिक विधि-विधान से देवी की आराधना करते हैं।
इस समय गुप्त रूप से की जाती हैं साधनाएं
इसे “गुप्त” नवरात्र इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस समय की जाने वाली साधनाएं सार्वजनिक न होकर व्यक्तिगत एवं गुप्त रूप से की जाती हैं। पंडित तिवारी ने यह भी बताया कि सनातन धर्म का नववर्ष चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होता है, जिसे वासंतिक नवरात्र कहा जाता है। यह नवरात्र विशेष रूप से गृहस्थों द्वारा श्रद्धा एवं भक्ति भाव से मनाई जाती है।
इसी नवरात्र की नवमी तिथि को भगवान विष्णु श्रीराम के रूप में अवतरित हुए थे, जिसे श्रीराम नवमी के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने आगे बताया कि दशमी तिथि को श्री महावीर जी का ध्वजारोहण किया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जहां महावीर जी की ध्वजा फहराई जाती है, वहां नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव नहीं रहता। यह ध्वजारोहण श्रीरामराज्य की स्थापना और धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है।
पं. तिवारी ने कहा कि महावीर जी की ध्वजा का नगर भ्रमण शक्ति, ऐश्वर्य और सामाजिक एकता का संदेश देता है और इससे समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव एवं भाईचारे की भावना मजबूत होती है।
अंत में पंडित तिवारी ने श्रद्धालुओं से अपील की कि इस पावन अवसर पर धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता और नैतिक मूल्यों को भी आत्मसात करें।