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    झारखंड के सरकारी स्कूलों में 'प्रोजेक्ट रेल' की वापसी, हर महीने होगा छात्रों का मूल्यांकन

    Updated: Wed, 15 Apr 2026 03:43 PM (IST)

    झारखंड के सरकारी स्कूलों में छात्रों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाने के लिए 'प्रोजेक्ट रेल' (रेगुलर असेसमेंट फॉर इम्प्रूव्ड लर्निंग) फिर से शुरू हो रह ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक तस्वीर

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    HighLights

    1. झारखंड के सरकारी स्कूलों में 'प्रोजेक्ट रेल' फिर से शुरू।

    2. पहली से 12वीं तक के छात्रों का हर माह होगा मूल्यांकन।

    3. शिक्षण गुणवत्ता सुधारने और सतत निगरानी का है लक्ष्य।

    जागरण संवाददाता, मेदिनीनगर (पलामू)। पलामू जिला समेत झारखंड के सरकारी स्कूलों में छात्रों की पढ़ाई के स्तर को सुधारने के लिए ‘प्रोजेक्ट रेल’ (रेगुलर असेसमेंट फार इम्प्रूव्ड लर्निंग) की फिर से शुरुआत इसी महीने से होगी।

    स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग ने इसका ब्लूप्रिंट तैयार कर एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) भी जारी कर दी है। नई व्यवस्था के तहत पहली से 12वीं कक्षा तक के छात्र-छात्राओं का हर महीने नियमित मूल्यांकन किया जाएगा।

    प्रत्येक विषय में 20-20 अंकों की परीक्षा होगी। प्रश्न पत्र तैयार करने की जिम्मेदारी झारखंड शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) को सौंपी गई है। बताते चलें कि पलामू जिले में कुल 2564 सरकारी स्कूल संचालित हैं।

    इनमें 197 हाईस्कूल/प्लस टू स्कूल हैं, जबकि शेष 2367 कक्षा एक से आठ तक के विद्यालय हैं। स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह ने सभी जिलों को जारी निर्देश में कहा है कि मासिक मूल्यांकन की प्रक्रिया जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के माध्यम से संचालित होगी।

    इसकी निगरानी जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक व अतिरिक्त जिला कार्यक्रम पदाधिकारी करेंगे। परीक्षा पैटर्न भी कक्षानुसार तय किया गया है। पहली कक्षा में केवल मौखिक परीक्षा होगी, जिसमें गणित, अंग्रेजी, हिन्दी व अन्य भाषा से पांच-पांच प्रश्न पूछे जाएंगे।

    दूसरी कक्षा में तीन-तीन मौखिक और दो-दो लिखित प्रश्न होंगे। तीसरी से आठवीं तक पांच वस्तुनिष्ठ व पांच वर्णनात्मक प्रश्न रखे गए हैं, जबकि नौवीं से 12वीं तक 12-12 प्रश्न निर्धारित किए गए हैं।

    परीक्षा के बाद एक सप्ताह के भीतर उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर अंक ई-विद्या वाहिनी पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया है। विभाग का मानना है कि इस पहल से छात्रों की सतत निगरानी संभव होगी और शिक्षण गुणवत्ता में सुधार आएगा।

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