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    चतुर्थवर्गीय कर्मियों की नियमितीकरण मांग झारखंड हाईकोर्ट पहुंची, तीन दशक की सेवा का दिया हवाला

    By SachidanandEdited By: Mansi Kumari
    Updated: Fri, 07 Aug 2026 11:02 AM (IST)

    पलामू समाहरणालय के चतुर्थवर्गीय दैनिक मजदूरों ने 30 साल से अधिक की सेवा के बाद नियमितीकरण के लिए झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने समान प ...और पढ़ें

    एआई जेनरेटेड फोटो।

    एआई जेनरेटेड फोटो।

    HighLights

    1. पलामू के दैनिक मजदूरों ने नियमितीकरण के लिए हाईकोर्ट में अपील की।

    2. सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए न्याय की उम्मीद।

    जागरण संवाददाता, मेदिनीनगर (पलामू)। पलामू समाहरणालय एवं उससे संबद्ध कार्यालयों में वर्ष 1988-89 से दैनिक मजदूर (आदेशपाल) के रूप में कार्यरत चतुर्थवर्गीय कर्मियों ने सेवा नियमितीकरण की मांग को लेकर झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

    तीन दशक से अधिक समय से विभिन्न सरकारी कार्यालयों में कार्यरत इन कर्मियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर अपनी सेवाओं को नियमित करने की मांग की है।अपील में कहा गया है कि वर्ष 1994 एवं 1998 में चतुर्थवर्गीय पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किए गए थे, लेकिन विभिन्न कारणों से नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

    इसके बाद नियमितीकरण को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में कई रिट याचिकाएं दायर की गईं, जिनमें न्यायालय ने संबंधित पक्षों के पक्ष में आदेश भी पारित किए। न्यायालय के निर्देश के आलोक में जिला स्थापना कार्यालय ने जांच दल गठित कर पात्र कर्मियों की जांच भी कराई थी।

    कर्मियों का कहना है कि वर्ष 2018 में स्थापना समिति की बैठक के बाद विभिन्न कार्यालयों में चतुर्थवर्गीय पदों पर नियुक्तियां की गईं, लेकिन कुछ दैनिक मजदूरों को सेवा में बनाए रखते हुए शेष कर्मियों का नियमितीकरण नहीं किया गया।

    समान परिस्थितियों में कार्यरत होने के बावजूद सभी कर्मियों को समान लाभ नहीं मिलने का आरोप लगाया गया है।अपील में सुप्रीम कोर्ट के सिविल अपील संख्या 13950-13951/2024 (अमृत यादव बनाम झारखंड सरकार एवं अन्य) के फैसले का भी हवाला दिया गया है।

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    कर्मियों का कहना है कि यह निर्णय विज्ञापन संख्या 01/2010 से संबंधित नहीं, बल्कि सेवा नियमितीकरण के प्रश्न से जुड़ा हुआ है। जिस आधार पर कुछ कर्मियों को सेवा में बरकरार रखा गया है, उसी आधार पर अन्य पात्र दैनिक मजदूरों की सेवाओं को भी नियमित किया जाना चाहिए।

    मामले से जुड़े विवेका शुक्ला ने बताया कि झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी अपील स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई प्रारंभ कर दी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि लंबे समय से लंबित इस मामले में उन्हें न्याय मिलेगा और उनकी सेवाओं के नियमितीकरण का मार्ग प्रशस्त होगा। 

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