पलामू में 10 वर्षों में 9051 फर्जी व डुप्लीकेट जॉब कार्ड रद, रिकॉर्ड में बड़ा खुलासा
सतबरवा प्रखंड में पिछले 10 वर्षों में 9051 फर्जी और डुप्लीकेट मनरेगा जॉब कार्ड रद किए गए हैं, जिससे लगभग 15 लाख रुपये के भुगतान पर सवाल उठ रहे हैं। ...और पढ़ें

सतबरवा प्रखंड में 10 साल में 9051 फर्जी मनरेगा जॉब कार्ड रद। एआई जेनरेटेड इमेज
HighLights
सतबरवा में 10 साल में 9051 फर्जी मनरेगा जॉब कार्ड रद।
रद कार्डों पर लगभग 15 लाख रुपये का भुगतान हुआ।
संवाद सूत्र, सतबरवा (पलामू)। प्रखंड में पिछले लगभग 10 वर्षों के दौरान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बड़ी संख्या में फर्जी, डुप्लीकेट व त्रुटिपूर्ण जाब कार्डों को विभागीय जांच के बाद निरस्त किया गया है।
विभागीय अभिलेखों के अनुसार, समय-समय पर चलाए गए सत्यापन अभियान में ऐसे जाब कार्डों की पहचान कर उन्हें रद किया गया।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2016-17 में 165, 2017-18 में 1,143, 2018-19 में 19, 2019-20 में 100, 2020-21 में 447, 2021-22 में 1,048, 2022-23 में सर्वाधिक 4,798, 2023-24 में 1,012, 2024-25 में 257, 2025-26 में 59 और 2026-27 में अब तक केवल 3 फर्जी अथवा डुप्लीकेट जॉब कार्ड निरस्त किए गए हैं।
इनआंकड़ों से स्पष्ट है कि वर्ष 2022-23 में सबसे अधिक कार्रवाई की गई। इसके बाद के वर्षों में फर्जी व डुप्लीकेट जॉब कार्डों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। विभागीय स्तर पर इसे सत्यापन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने और निगरानी बढ़ाए जाने का परिणाम माना जा रहा है।
हालांकि यह मामला कई सवाल भी खड़े करता हैं। वर्षों तक बड़ी संख्या में फर्जी या डुप्लीकेट जॉब कार्ड कैसे बने रहे और इनके माध्यम से कहीं सरकारी राशि का दुरुपयोग तो नहीं हुआ?
विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, जिन जॉब कार्डों को विभिन्न त्रुटियों के आधार पर रद किया गया, उन पर बीते करीब 10 वर्षों में मनरेगा की विभिन्न योजनाओं में कार्य के एवज में लगभग 15 लाख रुपये की मजदूरी का भुगतान किया गया है।
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जांच के दौरान ऐसे कई जॉब कार्ड भी सामने आए, जिनके संबंध में अभिलेखों में उल्लेख है कि संबंधित व्यक्ति पंचायत का निवासी ही नहीं था। ऐसे मामलों ने सत्यापन प्रक्रिया और पूर्व की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस संबंध में प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी (बीपीओ) आरजू तमन्ना से मोबाइल फोन एवं संदेश के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी और न ही मैसेज का जवाब दिया।
इधर बीडीओ विजय कुमार ने बताया कि बीपीओ के साथ जब बैठक होने पर ही विस्तार से बता सकता हूं, हालांकि वर्तमान में एसआईआर पर ज्यादा फोकस हैं।