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    100 साल में 100 एकड़ जमीन सोन नदी में समाई, खतरे में बिहार-झारखंड सीमा के अंतिम छोर पर बसा गांव

    Updated: Tue, 19 May 2026 07:55 PM (IST)

    पलामू के हैदरनगर प्रखंड स्थित कबरा खुर्द गांव सोन नदी के कटाव और बालू भराव से गंभीर संकट में है, जिससे सैकड़ों एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि नष्ट हो चुकी है। ग ...और पढ़ें

    निरंतर कटाव और खेतों में बालू भराव के कारण गांव की करीब 100 एकड़ अत्यंत उपजाऊ कृषि भूमि सोन नदी में विलीन हो चुकी है। (AI Generated)

    निरंतर कटाव और खेतों में बालू भराव के कारण गांव की करीब 100 एकड़ अत्यंत उपजाऊ कृषि भूमि सोन नदी में विलीन हो चुकी है। (AI Generated)

    HighLights

    1. सोन नदी में 100 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि विलीन।

    2. बालू भराव से 15 एकड़ फलदार बगीचे खतरे में।

    3. ग्रामीणों ने तटबंध निर्माण की मांग की प्रशासन से।

    संवाद सूत्र, जपला (पलामू) । सोन नदी के तट पर बसा हैदरनगर प्रखंड का कबरा खुर्द गांव इन दिनों गंभीर भौगोलिक और आर्थिक संकट से जूझ रहा है। झारखंड-बिहार सीमा पर पलामू जिले के अंतिम छोर पर स्थित यह गांव धीरे-धीरे अपनी पहचान और आजीविका खो रहा है। 
     
    पिछले सौ वर्षों के इतिहास पर नजर डालें तो नदी के तेज बहाव, निरंतर कटाव और खेतों में बालू भराव के कारण गांव की करीब 100 एकड़ अत्यंत उपजाऊ कृषि भूमि सोन नदी में विलीन हो चुकी है। 
     
    ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन द्वारा कोई ठोस उपाय नहीं किए गए, तो अगले 10 से 15 वर्षों में गांव के फलदार बगीचे और बच्चों के खेल मैदान का अस्तित्व भी पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
     

    खेती पर निर्भर है 2 हजार की आबादी  

    लगभग दो हजार की आबादी वाले कबरा खुर्द गांव के ज्‍यादातर परिवारों की आजीविका पूरी तरह से पारंपरिक खेती-बारी पर टिकी हुई है। भौगोलिक रूप से इस गांव के सामने सोन नदी के उस पार बिहार के रोहतास जिले का नौहट्टा प्रखंड पड़ता है। 
     
    वर्तमान में इस गांव में लगभग 900 एकड़ कृषि योग्य भूमि बची हुई है, जिसका अधिकांश हिस्सा 20 से 25 प्रमुख किसान परिवारों के पास है। स्थानीय किसानों के अनुसार, हर वर्ष औसतन एक एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि में सोन नदी का बालू भर जाता है, जिससे उपजाऊ मिट्टी की परत पूरी तरह दब जाती है और जमीन बंजर होती जा रही है। 
     

    कटाव और बालू भराव से दर्जनों किसान तबाह  

    सोन नदी के इस रौद्र रूप से प्रभावित होने वाले किसानों की सूची लंबी है। गांव के किसान हसन इमाम, जफर इमाम, रिजवान अहमद, शेख कलीमुद्दीन, शेख कमरू, शेख बदरू, कमाल अख्तर, मोहम्मद हसन, खुर्शीद अहमद, शमीम अख्तर और शेख अजीमुद्दीन सहित दर्जनों ऐसे काश्तकार हैं जिनकी पैतृक संपत्ति और उपजाऊ खेत बेकार हो चुके हैं।
     

    ग्राउंड जीरो से क्या बोले पीड़ित किसान?

    •     चार एकड़ भूमि हो चुकी है बंजर: पीड़ित किसान हसन इमाम बताते हैं क‍ि मेरी अपनी चार एकड़ उपजाऊ भूमि में अब तक सोन नदी का बालू भर चुका है। यही दर्दनाक स्थिति गांव के अन्य किसानों की भी है। हर वर्ष गांव की करीब एक एकड़ जमीन बालू की चपेट में आ रही है, जिससे हमारी कृषि भूमि का दायरा लगातार सिकुड़ता जा रहा है।
    •     15 एकड़ के फलदार बगीचों पर संकट: किसान हसन सिद्दीकी ने चिंता जताते हुए कहा क‍ि बीते दस वर्षों के दौरान सोन नदी के बालू ने खेतों को पार कर हमारे फलदार बगीचों की ओर रुख कर लिया है। यदि समय रहते उपाय नहीं किया गया, तो कटाव से करीब 15 एकड़ में फैले आम और अमरूद के बगीचे नष्ट हो जाएंगे।
    •     खेल का मैदान बचाना बड़ी चुनौती: बुजुर्ग किसान मोफीज अहमद का कहना है क‍ि पिछले 50 वर्षों में हमने अपनी आंखों के सामने 50 एकड़ जमीन को नदी में समाते देखा है। इस निरंतर कटाव से कृषि भूमि तो जा ही रही है, साथ ही अब गांव के खेल मैदान को बचाना भी हमारे लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
    •     50 एकड़ से अधिक जमीन पूरी तरह बेकार: किसान जफर इमाम बताते हैं क‍ि सोन नदी से सटी हुई गांव की अधिकांश भूमि में बालू भर चुका है, जिससे खेती पूर्णतया प्रभावित है। खुर्शीद अहमद, रुन्नु अहमद, शमीम अहमद और हसन इमाम समेत दर्जनों किसानों की 50 एकड़ से अधिक जमीन पूरी तरह अनुपयोगी हो चुकी है।


    ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग से मांग की है कि कबरा खुर्द गांव को नदी के इस विनाशकारी प्रभाव से बचाने के लिए अविलंब बोल्डर पिचिंग या पक्के तटबंध का निर्माण कराया जाए, ताकि इस सीमावर्ती गांव के अस्तित्व को सुरक्षित रखा जा सके।