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    सुजीत सिन्हा एनकाउंटर: पलामू में खौफ के दो दशकों का अंत, खत्म हुआ जपला का 'डार्क एरा'

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 03:56 PM (IST)

    पलामू के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने से क्षेत्र में दो दशक के अपराध और रंगदारी के दौर का अंत हो गया है। उनकी मौत के ब ...और पढ़ें

    सुजीत सिन्हा का फाइल फोटो

    सुजीत सिन्हा का फाइल फोटो

    HighLights

    1. सुजीत सिन्हा का पुलिस मुठभेड़ में मारा जाना

    2. पलामू में दो दशक के अपराध युग का अंत

    3. जपला अब विकास और नई पहचान की ओर

    जफर हुसैन, जपला (पलामू)। कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के साथ ही पलामू के अपराध जगत के उस दौर का अंत माना जा रहा है, जिसने करीब दो दशकों तक दहशत, रंगदारी और गैंगवार की कहानी लिखी।

    हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के मरहा-पथरा गांव से निकलकर अपराध की दुनिया में कदम रखने वाला सुजीत सिन्हा कभी पलामू के सबसे खौफनाक अपराधियों में गिना जाता था।

    उसकी मौत ने एक बार फिर उस समय की यादें ताजा कर दी हैं, जब जपला (हुसैनाबाद) का नाम पूरे जिले में दबंगई और अपराध की पहचान बन चुका था।

    जब जपला की पहचान अपराध से जुड़ गई थी

    एक समय ऐसा भी था जब जपला का नाम सुनते ही लोग सतर्क हो जाते थे। जिला मुख्यालय मेदिनीनगर में भी जपला के दबंगों का प्रभाव चर्चा का विषय रहता था। हालात इतने बदनाम थे कि जपला के छात्रों को किराये का मकान लेने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था।

    कई छात्र अपना स्थायी पता छिपाकर दूसरे इलाके का पता बताते थे, ताकि उन्हें मकान मिल सके। यह उस दौर की सामाजिक छवि थी, जिसकी चर्चा आज भी होती है।

    रिक्शा चालक की हत्या से शुरू हुआ अपराध का सफर

    सुजीत सिन्हा पहली बार वर्ष 2005 में उस समय सुर्खियों में आया, जब मेदिनीनगर शहर के सेवासदन इलाके में मामूली विवाद के बाद रिक्शा चालक कृष्णा साव की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई।

    इसी घटना के बाद उसने अपराध की दुनिया में तेजी से अपना नेटवर्क खड़ा किया। रंगदारी, बमबाजी, टेंडर विवाद और हत्या जैसे मामलों में उसका नाम लगातार सामने आने लगा।

    दोहरे हत्याकांड से बना राज्यभर में कुख्यात

    वर्ष 2007 में कांदू मोहल्ले के चर्चित दोहरे हत्याकांड ने सुजीत सिन्हा को राज्यभर में कुख्यात बना दिया। इस मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा भी हुई। इसके बावजूद उसका आपराधिक नेटवर्क लंबे समय तक सक्रिय रहा।

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    अकेले पलामू जिले में उसके खिलाफ 40 से अधिक मामले दर्ज थे, जबकि कुल मुकदमों की संख्या उसकी उम्र से भी अधिक बताई जाती है।

    अपराध की कीमत परिवार ने भी चुकाई

    लगातार पुलिस कार्रवाई और छापेमारी का असर उसके परिवार पर भी पड़ा। उसकी मां, भाई और बहन मेदिनीनगर छोड़कर रायपुर चले गए। पत्नी रिया सिन्हा भी विभिन्न आपराधिक मामलों में जेल में बंद है।

    अपराध की दुनिया में बनाया गया साम्राज्य अंततः उसके परिवार और निजी जीवन को भी पूरी तरह बिखेर गया।

    एक दौर का अंत, नई पहचान की ओर बढ़ता जपला

    सुजीत सिन्हा का एनकाउंटर केवल एक कुख्यात अपराधी का अंत नहीं, बल्कि पलामू के उस दौर का प्रतीकात्मक समापन भी है, जब जपला का नाम अपराध और रंगदारी के लिए जाना जाता था।

    समय के साथ हुसैनाबाद-जपला की तस्वीर बदली है और आज यह क्षेत्र शिक्षा, व्यापार तथा विकास की नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में सुजीत सिन्हा का अंत पुराने भय और अपराध के दौर पर एक महत्वपूर्ण विराम के रूप में देखा जा रहा है।

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