पतरातू में कल तक जो महिला खुद थी मजदूर, आज कागजों में हेरफेर कर बनी करोड़ों की सप्लायर; ₹3 करोड़ डकारे
पतरातू प्रखंड में मनरेगा योजना में एक मजदूर महिला कागजों में हेरफेर कर करोड़ों की मटेरियल सप्लायर बन गई, जिसमें करीब 3 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। ...और पढ़ें

3 करोड़ डकारे
HighLights
मजदूर महिला कागजों में बनी करोड़ों की सप्लायर।
मनरेगा योजना में करीब 3 करोड़ का भुगतान।
प्रखंड कर्मी की मिलीभगत से हुआ बड़ा घोटाला।
दीपक कुमार, भुरकुंडा(रामगढ़)। पतरातू प्रखंड में मनरेगा योजना में सेटिंग-गेटिंग से लूट का नया चेहरा सामने आया है। यहां एक मनरेगा मजदूर महिला रातों-रात प्रखंड की सबसे बड़ी मटेरियल सप्लायर बन गई। कागजों में हेरफेर कर वेंडर कोड खोला, काम लिया और फिर बिल पास करा लिया गया। जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
सवाल यह है कि दो साल पहले तक खुद मनरेगा में काम करने वाली महिला, आखिर कैसे अंश इंटरप्राइजेज के नाम पर करोड़ों का मटेरियल सप्लाई कर रही। जबकि महिला की आर्थिक स्थिति उतनी अच्छी भी नहीं है।
डमी महिला, असली खेल प्रखंड कर्मी का
बताया गया कि महिला को मोहरा बनाया गया है। पतरातू जयनगर में रहने वाली महिला को आगे कर गलत तरीके से जीएसटी व अन्य कागजात तैयार किए गए। असली खेल प्रखंड मुख्यालय में बैठे एक कर्मी का है। जिसकी वजह से मटेरियल सप्लाई का काम भी महिला को आसानी से मिल जाता है।
वहीं सप्लाई, मैनेजमेंट, पेपर वर्क सहित बिल, वाउचर बनाने से लेकर भुगतान करवाने तक का काम प्रखंड कर्मी ही करता है। यदि निष्पक्ष जांच हई तो सेटिंग गेटिंग से मनरेगा में होने वाला एक बड़ा घोटाला सामने आएगा। कई बार शिकायतें भी आलाधिकारियों तक पहुंची। मगर उसे समय के साथ दबा दिया गया।
करीब 3 करोड़ का बिल का हुआ भुगतान
वर्ष 2024-2026 के बीच उक्त महिला सप्लायर को करीब 3 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। मनरेगा की विभिन्न योजनाओं के लिए ईंट, बालू, गिट्टी और सीमेंट सहित अन्य मटेरियल की सप्लाई की गई है। कागज पर तो सब ठीक है। मगर जमीनी हकीकत कुछ और है। जिसका खुलासा मनरेगा योजनाओं की जांच से ही संभव है।
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सेटिंग-गेटिंग का खेल, मिलीभगत उजागर
स्थानीय लोगों ने बताया कि प्रखंड के कुछ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से यह पूरा फर्जीवाड़ा रचा गया। मनरेगा में मैटेरियल सप्लाई के नाम पर मास्टर रोल से लेकर बिल-वाउचर तक, सब कुछ सेटिंग से तैयार किया जाता है।
पतरातु प्रखंड में मनरेगा में ''लूट की छूट'' का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई योजनाओं में अनियमितता की शिकायतें आ चुकी हैं, पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ लीपापोती हुई। अब ताजा मामले के उजागर होने के बाद ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
यदि फर्जीवाड़े की जांच होती है तो संबंधित सप्लायर, पंचायत सचिव, जेई और बीपीओ पर गाज गिरने की संभावना है। वहीं कानूनी कार्रवाई कर रिकवरी की कार्रवाई भी की जा सकती है।
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