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    रामगढ़ के गोला में एक साल से बंद प्रदूषण जांच केंद्र, वाहन चालकों की बढ़ी मुश्किलें

    Updated: Sat, 04 Jul 2026 09:10 AM (IST)

    गोला प्रखंड में लगभग एक वर्ष से प्रदूषण जांच केंद्र बंद होने से हजारों वाहन चालकों को भारी परेशानी हो रही है। प्रदूषण प्रमाण पत्र बनवाने के लिए उन्हें ...और पढ़ें

    पेट्रोल पंप के समीप बंद पडा प्रदूषण जांच केन्द्र।

    पेट्रोल पंप के समीप बंद पडा प्रदूषण जांच केन्द्र।

    HighLights

    1. गोला में एक वर्ष से प्रदूषण जांच केंद्र बंद।

    2. हजारों वाहन चालकों को प्रमाण पत्र के लिए भटकना पड़ रहा।

    संवाद सूत्र, बरलंगा (रामगढ़)। गोला प्रखंड में पिछले लगभग एक वर्ष से प्रदूषण जांच केंद्र बंद होने के कारण प्रतिदिन हजारों वाहन चालको को भारी परेशानियों का सामना करना पड रहा हैं। पहले गोला के भारत पेट्रोल हेमतपुर तथा रिलायंस पेट्रोल पंप हेमतपुर गोला पर प्रदूषण जांच की सुविधा उपलब्ध थी।

    स्थानीय लोगों के अनुसार, रिलायंस का केंद्र अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया गया, जबकि जय हिंद पेट्रोल पंप का केंद्र रिचार्ज नहीं होने के कारण लंबे समय से बंद पड़ा है। स्थिति यह है कि गोला के वाहन चालकों को अब प्रदूषण प्रमाण पत्र बनवाने के लिए रामगढ़, बोकारो या रांची तक कई किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है।

    इससे समय पैसा और श्रम तीनों की बर्बादी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर जांच केंद्र चालू रहता तो वे समय पर प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवा लेते।

    लोगों का सबसे बड़ा सवाल है कि जब गोला में प्रदूषण जांच की सुविधा ही उपलब्ध नहीं है तो फिर पुलिस द्वारा जांच अभियान चलाकर प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं होने पर चालान क्यों काटा जा रहा है।

    वाहन चालकों का आरोप है कि जांच के दौरान उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि पहले सुविधा उपलब्ध कराई जाए, उसके बाद सख्ती की जाए।गोला एक बड़ा और घनी आबादी वाला प्रखंड है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन चलते हैं। इसके बावजूद प्रदूषण जांच केंद्र बंद रहना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।

    स्थानीय लोगों ने उपायुक्त तथा मुख्यमंत्री से मांग की है कि गोला में अविलंब प्रदूषण जांच केंद्र का संचालन शुरू कराया जाए, ताकि आम लोगों को राहत मिले, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ें और सरकार के राजस्व में भी वृद्धि हो। लोगों का कहना है कि सुविधा के अभाव में दंडात्मक कार्रवाई न्यायसंगत नहीं कही जा सकती।

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