म्यूटेशन घोटाला: झारखंड हाई कोर्ट के आदेश पर ACB का एक्शन, नामकुम अंचल के 2 पूर्व अधिकारी गिरफ्तार
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने नामकुम अंचल के तत्कालीन अंचल निरीक्षक मनोज कुमार दीक्षित और लिपिक दीपक कुमार को गिरफ्तार किया है।

दीपक कुमार और मनोज कुमार दीक्षित।
HighLights
एसीबी ने नामकुम के पूर्व सीआई और लिपिक को किया गिरफ्तार।
दाखिल खारिज वाद के दस्तावेज गायब करने का है मामला।
झारखंड हाई कोर्ट के आदेश पर हुई है यह कार्रवाई।
राज्य ब्यूरो, रांची। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने मंगलवार को नामकुम अंचल के तत्कालीन अंचल निरीक्षक (सीआई) मनोज कुमार दीक्षित तथा तत्कालीन कार्यालय लिपिक दीपक कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है।
दोनों ही आरोपित बुधवार को एसीबी की विशेष अदालत में पेश किए जाएंगे। इसके बाद एसीबी उन्हें रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट से आग्रह करेगी।
पूरा मामला दाखिल खारिज वाद संख्या - 365 आर-27/2013-14 से संबंधित है। इस वाद से संबंधित संपूर्ण दस्तावेज गायब करने के मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने एसीबी को प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान का आदेश दिया था।
झारखंड हाई कोर्ट के आदेश के आलोक में एसीबी ने 26 अगस्त को एसीबी थाना रांची में कांड संख्या 18/2026 में प्राथमिकी दर्ज की थी। इस प्राथमिकी में नामकुम अंचल की तत्कालीन अंचलाधिकारी डॉ. श्वेता वर्मा, तत्कालीन अंचल निरीक्षक मनोज कुमार व तत्कालीन लिपिक दीपक कुमार व अन्य को आरोपित बनाया गया था।
एसीबी ने अनुसंधान के क्रम में तत्कालीन अंचल निरीक्षक मनोज कुमार व तत्कालीन लिपिक दीपक कुमार के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य पाया। जांच में मिले साक्ष्य के आधार पर ही उनकी गिरफ्तारी की गई है।
अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए एसीबी आवश्यक कार्रवाई कर रही है। दीपक कुमार वर्तमान में एलआरडीसी, रांची कार्यालय में वरीय सहायक के पद पर कार्यरत है। वहीं, मनोज कुमार दीक्षित सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
शिकायतकर्ता थामस साइमन ने हाई कोर्ट में दाखिल की थी याचिका
शिकायतकर्ता थामस साइमन नामक व्यक्ति ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने बताया था कि नामकुम अंचल में म्यूटेशन में भारी गड़बड़ी की गई है। जांच के लिए मांगे जाने के बावजूद मूल राजस्व अभिलेख को उपलब्ध नहीं कराया जा रहा हे।
मामला नामकुम अंचल के डुंडु क्षेत्र की एक भूमि से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट में यह बात सामने आई कि अंचल कार्यालय ने दूसरे पक्षकार के पक्ष में किए गए म्यूटेशन की प्रमाणित प्रति देने में लगातार टालमटोल किया है।
हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद अंचल अधिकारियों ने अनुपालन नहीं किया। इसके बाद हाई कोर्ट में जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने प्रथम दृष्ट्या इसे सरकारी दस्तावेज गायब होने का अत्यंत गंभीर मामला माना और एसीबी को पूरे मामले की जांच का जिम्मा सौंपा था। एसीबी की जांच जारी है।
