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'कानून से लागू हो भर्ती कैलेंडर, डिजिटल ट्रैकिंग से रुके धांधली'; आजसू प्रमुख सुदेश महतो की सरकार से मांग

By Kumar GauravEdited By: Nishant Bharti
Published: Wed, 05 Aug 2026 02:09 PM (IST)

आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो ने झारखंड सरकार से समयबद्ध भर्ती कैलेंडर कानून द्वारा लागू करने की मांग की है। उन्होंने ...और पढ़ें

आजसू प्रमुख सुदेश महतो की सरकार से मांग

आजसू प्रमुख सुदेश महतो की सरकार से मांग

HighLights

  1. भर्ती कैलेंडर कानून द्वारा लागू हो, परीक्षा समय-सीमा निर्धारित हो।

  2. परीक्षाओं में डिजिटल ट्रैकिंग, सीसीटीवी निगरानी, बायोमेट्रिक सत्यापन लागू हो।

  3. घोटालेबाजों के विरुद्ध कठोर दंड का कानून बने, जवाबदेही तय हो।

जागरण संवाददाता, रांची। समयबद्ध भर्ती कैलेंडर कानून द्वारा लागू किया जाए। प्रत्येक वर्ष भर्ती कैलेंडर जारी हो तथा परीक्षा, परिणाम एवं नियुक्ति की अधिकतम समय-सीमा निर्धारित की जाए। अनावश्यक विलंब के लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय हो। उक्त मांग आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने की है। 

उन्होंने कहा कि नियुक्ति परीक्षाओं में जिम्मेदारी तय करने के लिए घोटालेबाजों के विरुद्ध कठोर दंडों के प्रविधानों के साथ राज्य में एक कानून बनाया जाए। परीक्षा प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक एवं पारदर्शिता लागू की जाए। 

सभी परीक्षाओं की हो डिजिटल ट्रैकिंग

सभी परीक्षाओं की डिजिटल ट्रैकिंग, प्रश्नपत्र सुरक्षा के लिए अंतराष्ट्रीय मानकों का पालन, सीसीटीवी निगरानी, बायोमैट्रिक सत्यापन, एआइ आधारित नकल एवं असामान्य पैटर्न विश्लेषण, उत्तर पुस्तिकाओं का सुरक्षित डिजिटल रिकार्ड रखा जाए। उत्तर पुस्तिका एवं मूल्यांकन में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। 

अभ्यर्थियों को ओएमआर शीट, उत्तर पुस्तिका, माडल उत्तर एवं अंकन प्रक्रिया देखने का अधिकार मिले तथा त्रुटि सुधार की स्पष्ट व्यवस्था हो।भर्ती घोटालों से प्रभावित अभ्यर्थियों को आयु सीमा में समुचित राहत प्रदान की जाए। बार-बार परीक्षा रद होने एवं वर्षों तक भर्ती लंबित रहने से जिन अभ्यर्थियों की आयु सीमा प्रभावित हुई है, उन्हे न्यायसंगत आयु-छूट दी जाए। 

स्थानीय शिकायत निवारण तंत्र बनाया बनाने की मांग

उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों के लिए स्थानीय शिकायत निवारण तंत्र बनाया जाए। एक स्वतंत्र ग्रीवांस रिड्रेसल अथारिटी गठित हो, जहां निर्धारित समय-सीमा में शिकायतों का समाधान अनिवार्य हो। इन घोटालों से प्रभावित परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों की आर्थिक सहायता के लिए सरकार एक विशेष छात्रवृत्ति योजना शुरू करे। 

एक राज्य के रूप में झारखंड की साख, भर्ती संस्थानों की विश्वसनीयता, युवाओं का हौसला और भविष्य, मजबूती कर अपने बच्चों को पढ़ाने वाले पिता का सपना तथा रात भर जागने वाली मां की उम्मीद सब कुछ दांव पर लगा है। 

कहा कि सरकार न सिर्फ दिशाहीन है, बल्कि स्वयं भी संदिग्धता के घेरे में है। लगभग 38 प्रतिशत गरीब आबादी वाले इस राज्य को बचाने के लिए आजसू छात्र संघ ने सरकार से अनुरोध किया है कि आजसू की मांगों पर न सिर्फ विचार किया जाए बल्कि आवश्यक कदम भी उठाए जाएं।

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