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    राष्ट्रपति पदक से नवाजे गए रांची जोन के CBI ज्वाइंट डायरेक्टर राजीव रंजन, CJI ने दिया सम्मान

    Updated: Tue, 21 Apr 2026 10:06 PM (IST)

    भारत मंडपम में 22वें डीपी कोहली मेमोरियल लेक्चर के दौरान, सीबीआई रांची जोन के संयुक्त निदेशक राजीव रंजन को राष्ट्रपति सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित किय ...और पढ़ें

    आईपीएस राजीव रंजन का फाइल फोटो।

    आईपीएस राजीव रंजन का फाइल फोटो।

    HighLights

    1. सीबीआई रांची के राजीव रंजन को राष्ट्रपति पदक मिला।

    2. CJI ने साइबर अपराधों से निपटने पर जोर दिया।

    3. फर्जी नोटिस रोकने 'अभय' AI चैटबॉट लॉन्च हुआ।

    राज्‍य ब्‍यूरो, रांची। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित 22वें डीपी कोहली मेमोरियल लेक्चर के दौरान देश के 24 सीबीआई अधिकारियों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रपति सराहनीय सेवा पदक प्रदान किया। सम्मानित होने वाले अधिकारियों में CBI रांची जोन के संयुक्त निदेशक राजीव रंजन भी शामिल हैं, जिन्हें उनकी सराहनीय सेवाओं के लिए यह प्रतिष्ठित पदक मिला। 

    साइबर अपराध: न्यायपालिका और पुलिस की भूमिका 

    इस वर्ष के व्याख्यान का मुख्य विषय 'साइबर अपराध की चुनौतियां, पुलिस व न्यायपालिका की भूमिका' था। इस अवसर पर CJI सूर्यकांत ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान में साइबर अपराध संगठित और जटिल तरीके से हो रहे हैं। 
     
    उन्होंने अपराधियों से निपटने के लिए बैंक, वित्तीय संस्थानों, दूरसंचार कंपनियों और CBI जैसी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बैंक वित्तीय लेनदेन के संरक्षक हैं और इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म संवाद को सुगम बनाते हैं, इसलिए इन सभी की जवाबदेही साइबर सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। 
     

    फर्जी नोटिस और डिजिटल अरेस्ट पर लगाम 

    समारोह के दौरान एक क्रांतिकारी पहल करते हुए 'अभय'(Abhay) नामक एआई संचालित (AI) नोटिस सत्यापन चैटबॉट का शुभारंभ किया गया। 

    •     उद्देश्य: यह चैटबॉट आम नागरिकों को CBI के नाम पर जारी होने वाले फर्जी नोटिसों की सत्यता जांचने में मदद करेगा।
    •     डिजिटल अरेस्ट का खतरा: हाल के दिनों में 'डिजिटल अरेस्ट' और केंद्रीय जांच एजेंसियों के नाम पर ब्लैकमेलिंग के मामले बढ़े हैं। यह टूल ऐसे खतरों को रोकने और नागरिकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए डिजाइन किया गया है।


    कौन थे डीपी कोहली?

    CBI अपने संस्थापक निदेशक धर्मनाथ प्रसाद कोहली (डीपी कोहली) की स्मृति में हर साल इस व्याख्यान का आयोजन करती है। डीपी कोहली का जन्म 1907 में उत्तर प्रदेश में हुआ था। 
     
    वे 1955 में दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान (DSPE) के प्रमुख बने और 1 अप्रैल 1963 को CBI की स्थापना के बाद इसके पहले निदेशक नियुक्त किए गए। वे 1968 तक इस पद पर रहे और संगठन की मजबूत नींव रखी। 
     
    इस गरिमामयी समारोह में पुलिस प्रशासन और न्यायपालिका के कई दिग्गज शामिल हुए, जिन्होंने तकनीकी युग में अपराध की बदलती प्रकृति और सुरक्षा चुनौतियों पर विचार साझा किए।