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    सीसीएल हजारीबाग क्षेत्र में फल-फूल रहा फर्जी सिक लीव का धंधा, मेडिकल सर्टिफिकेट के लिए रोजाना 40-100 रुपये वसूली

    Updated: Fri, 09 Jan 2026 03:32 PM (IST)

    सीसीएल हजारीबाग क्षेत्र में फर्जी सिक लीव का धंधा फल-फूल रहा है। अनुपस्थित कामगारों को ड्यूटी पर लौटने के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट की आवश्यकता होती है, ज ...और पढ़ें

    सीसीएल हजारीबाग क्षेत्र में फल-फूल रहा फर्जी सिक लीव का धंधा

    सीसीएल हजारीबाग क्षेत्र में फल-फूल रहा फर्जी सिक लीव का धंधा

    HighLights

    1. सीसीएल हजारीबाग में फर्जी सिक लीव का धंधा जारी।

    2. मेडिकल सर्टिफिकेट के लिए 40-100 रुपये प्रतिदिन वसूले जाते।

    3. चिकित्सा माफिया और फर्जी डॉक्टर इसमें शामिल हैं।

    मो. सेराज, घाटो(रामगढ़)। वर्षों से सीसीएल हजारीबाग एरिया के तमाम परियोजनाओं में फर्जी तरीके से सिक लीव बनाने का धंधा फल-फूल रहा है। डयूटी से बिना प्रबंधन के अनुमति लिये गायब होने वाले कामगारों को मजबूरी रहता है कि वह बीमार होने का प्रमाण पत्र बनाकर लाये, तभी उसका ज्वाइनिंग लेटर मिल सकता है। 

    ज्यादा दिनों तक ड्यूटी से गायब रहने वाले कामगारों को कोई बड़े चिकित्सक से सिक बनाकर लाना पड़ता है। इसी मजबूरी का फायदा चिकित्सा माफिया उठा रहे है। सीसीएल हजारीबाग कोयला क्षेत्र के तापीन उत्खनन परियोजना, परेज पूर्वी उत्खनन परियोजना, केदला वाशरी, केदला उत्खनन परियोजना, झारखंड उत्खनन परियोजना, चैनपुर साइडिंग आदि जगहों में मजदूरों को सीक बनाने के नाम पर जमकर लूटा जा रहा है। 

    चिकित्सक का लेटर पैड उपयोग कर सीक बनाते हैं

    केदला प्रोजेक्ट से लेकर तीन नंबर, प्रेमनगर व लईयो तक कई ऐसे दवाखाना है, जहां के संचालक दिल्ली के चिकित्सक का लेटर पैड उपयोग कर सीक बनाने से गुरेज नहीं करते है। कई दवाखाना एमबीबीएम(एएम) का लेटर भी उपयोग करने से गुरेज नहीं करते है।

    सूत्रों के मुताबिक एक दिन का सीक बनाने में 40 रुपये से लेकर सौ रुपये तक पैसे की उगाही किया जाता है। अगर बड़े डाक्टर का प्रमाण पत्र चाहिए, तो सौ रूपये प्रतिदिन के हिसाब से पैसा लगता है। और अगर छोटे चिकित्सक का प्रमाण पत्र चाहिए, तो कम से कम 40 रुपये लगता है। 

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    स्थानीय दवाखाना से सिक बनाकर प्रबंधन को पेश किया

    वहीं इस दौड़ में फर्जी चिकित्सक भी पीछे नहीं है। इसका खुलासा परेज पूर्वी उत्खनन परियोजना में एक सीसीएलकर्मी के द्वारा किया गया। पत्नी बीमार थी, जिसको लेकर उक्त मजदूर एक सप्ताह तक ड्यूटी नहीं आ पाया, लेकिन पैसे के सहारे एक स्थानीय दवाखाना से सिक बनाकर प्रबंधन को पेश कर दिया। 

    नाम नहीं छापने के शर्त पर कामगारों ने बताया कि केदला से लेकर लईयो में कई दवाखाना अवैध तरीके से चल रहे है। इसको बढ़ावा देने में सीसीएल के चिकित्सक भी पीछे नहीं है। 

    बिना नजराना दिया काम नहीं होता

    वहीं कई फर्जी डाक्टर कामगारों को ठगने का काम कर रहे है। जिसकी सुधी लेने वाला कोई नहीं है। इतना ही नहीं जब मजदूर सीक बनाकर सीसीएल के अधिकारी के पास जाते है, तो वहां पर बिना नजराना दिया काम नहीं होता है। 

    इस समस्या को दूर करने के लिए श्रमिक संगठन के नेतागण कभी पहल करने का काम नहीं किया। वहीं इस संबंध में सीसीएल हजारीबाग एरिया के जीएम कल्याण जी प्रसाद से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।