झारखंड में डीवीसी की नई बिजली दरें लागू, उद्योग-व्यवसाय पर बढ़ा बोझ; प्रीपेड पर प्रोत्साहन लाभ
डीवीसी ने 1 अप्रैल से झारखंड में नई बिजली दरें लागू की हैं। औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर दरों में भारी वृद्धि का बोझ पड़ा है, जबकि घरेलू उपभोक ...और पढ़ें

झारखंड में एक अप्रैल से नई बिजली दरें प्रभावी। (फोटो: सांकेतिक)
HighLights
व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर बढ़ा बिजली का बोझ।
घरेलू उपभोक्ताओं को मिली मामूली राहत, कृषि दरें यथावत।
समय पर भुगतान, प्रीपेड मीटर पर छूट का प्रावधान।
राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य में दामोदर वैली कारपोरेशन (डीवीसी) क्षेत्र के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 का नया बिजली टैरिफ आदेश लागू हो गया है। एक अप्रैल से प्रभावी इस आदेश में वित्तीय वर्ष 2024-25 का ट्रू-अप, 2025-26 का एपीआर तथा 2026-27 से 2030-31 तक की मल्टी ईयर टैरिफ अवधि शामिल की गई है।
नए टैरिफ ढांचे में अधिकांश उपभोक्ता श्रेणियों पर बिजली दरों का अतिरिक्त बोझ बढ़ा है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं को सीमित राहत दी गई है। घरेलू श्रेणी के लिए ऊर्जा शुल्क 4.30 रुपये प्रति यूनिट से घटाकर 4.25 रुपये प्रति यूनिट कर दिया गया है।
वहीं, व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए दरों में वृद्धि की गई है। इस श्रेणी में प्रति यूनिट दर 4.30 रुपये से बढ़ाकर 4.80 रुपये कर दी गई है, जिससे 0.50 रुपये प्रति यूनिट का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
कृषि एवं सिंचाई श्रेणी में कोई बदलाव नहीं
कृषि एवं सिंचाई उपभोक्ताओं को राहत देते हुए इस श्रेणी की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और शुल्क 5.30 रुपये प्रति यूनिट पर ही बरकरार रखा गया है। औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।
11 केवी श्रेणी के उद्योगों के लिए दर 4.20 रुपये से बढ़ाकर 6.00 रुपये प्रति यूनिट कर दी गई है। इसी प्रकार 33 केवी के लिए 5.90 रुपये और 132 केवी के लिए 5.85 रुपये प्रति यूनिट की दर तय की गई है।
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सरचार्ज की मंजूरी
आयोग ने कृषि श्रेणी को छोड़कर सभी उपभोक्ताओं पर 0.35 रुपये प्रति यूनिट का अतिरिक्त रेगुलेटरी एसेट एडजस्टमेंट सरचार्ज (आरएएएस) लगाने की भी मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य पूर्व वर्षों के रेगुलेटरी एसेट का समायोजन करना बताया गया है।
डीवीसी ने लगभग 45 प्रतिशत टैरिफ वृद्धि का प्रस्ताव दिया था, जिसे आयोग ने समीक्षा के बाद करीब 40 प्रतिशत तक सीमित कर दिया। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 6,822.20 करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व आवश्यकता को भी स्वीकृति दी गई है।
प्रीपेड भुगतान पर छूट का लाभ
उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए समय पर भुगतान पर प्रोत्साहन भी दिया गया है। बिल जारी होने के पांच दिनों के भीतर भुगतान करने पर दो प्रतिशत की छूट मिलेगी, जबकि प्रीपेड मीटर अपनाने वालों को ऊर्जा शुल्क पर अतिरिक्त तीन प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी।
ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के तहत 0.45 रुपये प्रति यूनिट का अतिरिक्त ग्रीन एनर्जी टैरिफ लागू किया गया है। वहीं रूफटाॅप सोलर के लिए ग्रास मीटरिंग पर 4.16 रुपये और नेट मीटरिंग पर 3.80 रुपये प्रति यूनिट का टैरिफ निर्धारित किया गया है।
नए टैरिफ के लागू होने से औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर बिजली लागत का दबाव बढ़ेगा, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं को केवल सीमित राहत मिल पाएगी।
प्रति यूनिट दर में बदलाव
घरेलू : 4.30 - 4.25 रुपये (0.05 रुपये की कमी)
व्यावसायिक : 4.30 - 4.80 रुपये (0.50 रुपये की वृद्धि)
कृषि/सिंचाई: 5.30 रुपये (कोई बदलाव नहीं)
उद्योग (11 केवी): 4.20 - 6.00 रुपये (1.80 रुपये की वृद्धि)
उद्योग (33 केवी): 4.20 - 5.90 रुपये (1.70 रुपये की वृद्धि)