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    खलारी में मौत की खदान: झारखंड के बंद माइंस में धड़ल्ले से चल रहा अवैध कोयले का खेल, हादसे में एक मजदूर की मौत; दो गंभीर

    Updated: Fri, 22 May 2026 01:37 PM (IST)

    रांची के खलारी में एक बंद कोयला खदान में अवैध खनन के दौरान छत धंसने से एक मजदूर की मौत हो गई और दो गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना गरीबी और संगठित को ...और पढ़ें

    खलारी में अवैध खनन का कहर, बंद कोयला खदान में मजदूर की मौत।

    खलारी में अवैध खनन का कहर, बंद कोयला खदान में मजदूर की मौत।

    HighLights

    1. खलारी में बंद कोयला खदान में अवैध खनन के दौरान हादसा।

    2. छत धंसने से एक मजदूर रोहित तूरी की मौके पर मौत।

    3. कोयला सिंडिकेट द्वारा गरीब मजदूरों का शोषण उजागर हुआ।

    संवाद सूत्र, खलारी (रांची)। राजधानी रांची के कोयलांचल क्षेत्र खलारी से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। करकट्टा स्थित सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) की एक बंद पड़ी भूमिगत खदान में अवैध खनन के दौरान बड़ा हादसा हो गया है।

    गुरुवार दोपहर कोयला निकालने के दौरान खदान का एक हिस्सा अचानक धंस गया, जिसकी चपेट में आने से एक मजदूर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

    मौके पर ही तोड़ा दम, घायलों का रिम्स में इलाज जारी

    मृतक की पहचान खलारी के करकट्टा निवासी करीब 42 वर्षीय रोहित तूरी के रूप में की गई है। जानकारी के अनुसार, आर्थिक तंगी और रोजगार के अभाव में कुछ स्थानीय ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर बंद पड़ी भूमिगत खदान की सुरंग के भीतर से कोयला काट रहे थे।

    इसी दौरान चाल (खदान की छत) भरभरा कर गिर पड़ी। मलबे में दबने से रोहित तूरी की सांसें मौके पर ही थम गईं। घटना में घायल हुए दो अन्य मजदूरों को आनन-फानन में स्थानीय स्तर पर प्राथमिक उपचार के बाद रांची के रिम्स (RIMS) रेफर किया गया है, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

    कोयला तस्करी का कॉरपोरेट मॉडल: 'सिंडिकेट' के आगे प्रशासन बेबस

    स्थानीय सूत्रों और खोजी कड़ियों की मानें तो यह सिर्फ एक सामान्य दुर्घटना नहीं, बल्कि इलाके में पैर पसार चुके एक संगठित 'कोयला सिंडिकेट' की लापरवाही का नतीजा है। खलारी और आस-पास के क्षेत्रों में बंद पड़ी खदानों से अवैध रूप से कोयला निकालने का यह काला कारोबार धड़ल्ले से जारी है।

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    कैसे काम करता है यह सिंडिकेट?

    सिंडिकेट के सफेदपोश माफिया चंद पैसों का लालच देकर गरीब ग्रामीणों को इन खतरनाक और बंद हो चुकी डेथ-ट्रैप (मौत के कुएं) जैसी खदानों के भीतर भेजते हैं।

    मजदूरों से कौड़ियों के भाव कोयला खरीदा जाता है और फिर उसे ट्रकों और विभिन्न माध्यमों से ऊंचे दामों पर मंडियों और ईंट-भट्टों में खपाया जाता है। इस पूरे खेल में सिंडिकेट करोड़ों की कमाई कर रहा है, जबकि गरीब मजदूरों के हिस्से सिर्फ जान का जोखिम आता है।

    आखिर क्यों दबा दी जाती हैं ऐसी खौफनाक घटनाएं?

    खलारी पुलिस और सीसीएल सुरक्षा तंत्र के दावों के विपरीत जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां करती है। नियमों के मुताबिक, सुरक्षा कारणों से बंद खदानों की माउथ-कैपिंग (मुहाना बंद करना) होनी चाहिए, लेकिन ऐसा सिर्फ कागजों पर या खानापूर्ति के लिए होता है।

    बंद खदानों से कोयला निकालना पूरी तरह गैरकानूनी है, इसलिए जब भी ऐसे हादसे होते हैं, सिंडिकेट के गुर्गे और कोयला माफिया पीड़ितों के परिवारों पर दबाव बनाकर या पैसे का प्रलोभन देकर शवों को आनन-फानन में गायब कर देते हैं या मामले को रफा-दफा कर देते हैं।

    यही वजह है कि खदानों के अंदर दम तोड़ने वाले कई मजदूरों की मौत कभी पुलिस के रिकॉर्ड तक पहुंच ही नहीं पाती। फिलहाल इस हादसे के बाद करकट्टा इलाके में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है, वहीं स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है।

    रोजगार के पुख्ता साधन न होने के कारण उन्हें मौत के इस काले खेल का हिस्सा बनना पड़ रहा है। पुलिस अब मामले की लीपापोती से इतर इस सिंडिकेट के मुख्य सरगनाओं की तलाश में जुटी है या नहीं, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।

    ड्रोन तकनीक से सीआईएसएफ की बड़ी कार्रवाई, 806 किलो अवैध कोयला बरामद

    डकरा। सीआईएसएफ यूनिट सीसीएल एनके एवं पिपरवार की ओर से अवैध कोयला चोरी और तस्करी के खिलाफ लगातार सघन अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में बुधवार सुबह डकरा सीएचपी क्षेत्र में विशेष कोल रेड अभियान चलाकर बड़ी कार्रवाई की गई।

    इस दौरान आधुनिक ड्रोन तकनीक की मदद से अवैध रूप से जमा किए गए कोयले का पता लगाकर उसे जब्त किया गया। बुधवार की सुबह डकरा सीएचपी के ऊपर स्थित क्षेत्र में छापेमारी अभियान चलाया गया।

    अभियान के दौरान कुल 806 किलोग्राम (0.806 मीट्रिक टन) अवैध कोयला बरामद किया गया। बरामद कोयले को डकरा वेब्रिज संख्या-01 पर तौल कराया गया, जहां उसका शुद्ध वजन 806 किलोग्राम पाया गया। इसके बाद जब्त कोयले को सुरक्षित रूप से सीसीएल प्रबंधन को सुपुर्द कर दिया गया।

    ड्रोन तकनीक से सीआईएसएफ को मिल रही कोयला चोरी रोकथाम में मदद

    खलारी। सीआईएसएफ यूनिट सीसीएल एनके एवं पिपरवार द्वारा अवैध कोयला चोरी एवं तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण हेतु लगातार सघन अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में गुरूवार को चूरी माइन्स क्षेत्र में छापेमारी अभियान चलाया गया।

    सीआईएसएफ द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि अभियान के दौरान सीआईएसएफ द्वारा आधुनिक ड्रोन का उपयोग करते हुए चूरी माइन्स के बाहरी परिधि क्षेत्र की निगरानी की गई।

    ड्रोन निगरानी के दौरान कुछ स्थानीय ग्रामीण महिलाएं अवैध रूप से कोयला ले जाते हुए दिखाई दी। सीआईएसएफ बल को देखते ही सभी महिलाएं कोयला छोड़कर मौके से फरार हो गईं। बरामद कोयले को चूरी कांटाघर में वजन कराकर आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करते हुए सीसीएल प्रबंधन को सुपुर्द कर दिया गया।

    बल के कमांडेंट अमित कुमार के कुशल मार्गदर्शन एवं निर्देशन में गठित विशेष टीम के निरीक्षक आरके सरोज, निरीक्षक/कार्यपालक एसपी तिग्गा, आरके गौतम, अतुल पंत (क्राइम) सहित सीआईएसएफ के अन्य बल सदस्य शामिल थे।

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