PM मोदी ने किया उद्घाटन, 104 करोड़ खर्च... लेकिन 7 साल बाद भी नहीं शुरू हुआ झारखंड का पहला महिला इंजीनियरिंग कॉलेज
गोला (रामगढ़) में 104 करोड़ की लागत से बना महिला इंजीनियरिंग कॉलेज सात साल बाद भी शुरू नहीं हो सका है, जिससे छात्राओं के तकनीकी शिक्षा के सपने अधूरे ह ...और पढ़ें

गोला का महिला इंजीनियरिंग कॉलेज: 104 करोड़ का प्रोजेक्ट, सात साल से बंद। (तस्वीर: जागरण)
HighLights
गोला में 104 करोड़ की लागत से बना महिला इंजीनियरिंग कॉलेज।
उद्घाटन के सात साल बाद भी पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी।
झारखंड विधानसभा में कॉलेज के संचालन का मुद्दा उठाया गया।
अंजनी कुमार, गोला (रामगढ़)/रांची। झारखंड की बेटियों को तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से गोला प्रखंड के हुप्पू-केनके गांव में राज्य का पहला सरकारी महिला इंजीनियरिंग कॉलेज बनाया गया है। करीब 104 करोड़ 37 लाख रुपये की लागत से 16.80 एकड़ भूमि में विकसित इस महत्वाकांक्षी परियोजना से हजारों छात्राओं के सपनों को नई उड़ान मिलने की उम्मीद थी।
लेकिन विडंबना यह है कि कॉलेज भवन बनकर तैयार है। उद्घाटन हुए सात वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यहां नियमित पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है। करोड़ों रुपये की लागत से बना यह संस्थान आज भी वीरान पड़ा हुआ है।
इस महिला इंजीनियरिंग कॉलेज का शिलान्यास 14 जून 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास एवं जल संसाधन एवं पेयजल स्वच्छता मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी ने किया था। इसके बाद निर्माण कार्य पूरा होने पर 17 फरवरी 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हजारीबाग से आयोजित कार्यक्रम के दौरान इसका ऑनलाइन उद्घाटन किया।
उस समय इसे झारखंड का पहला सरकारी महिला इंजीनियरिंग कॉलेज बताया गया था और दावा किया गया था कि यह संस्थान राज्य की बेटियों को उच्च तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने में मील का पत्थर साबित होगा।
कालेज परिसर को आधुनिक सुविधाओं से लैस बनाया गया है। यहां अत्याधुनिक शैक्षणिक भवन (एकेडमिक ब्लॉक), प्रशासनिक भवन, छात्रावास, आधुनिक प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, कंप्यूटर सेंटर, स्मार्ट क्लासरूम, सेमिनार हॉल, खेल मैदान, आंतरिक सड़कें, पेयजल, बिजली आपूर्ति तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं का निर्माण कराया गया है।
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इसे पूर्णतः आवासीय परिसर के रूप में विकसित करने की योजना थी, ताकि राज्य के विभिन्न जिलों से आने वाली छात्राओं को पढ़ाई और आवास की सुविधा एक ही परिसर में मिल सके।
इतनी बड़ी परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आज तक यहां नियमित शैक्षणिक सत्र शुरू नहीं हो पाया है। कॉलेज के विशाल भवन और छात्रावास वर्षों से बंद पड़े हैं। रखरखाव के अभाव में परिसर के कई हिस्सों में जंगली घास उग आई है और भवन भी धीरे-धीरे जर्जर होने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द कॉलेज का संचालन शुरू नहीं किया गया तो करोड़ों रुपये की यह परिसंपत्ति धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो सकती है। राज्य सरकार ने कॉलेज के संचालन के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी पीपीपी मॉडल के तहत निजी विश्वविद्यालय के साथ समझौता किया था।
विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से यह व्यवस्था सफल नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप नामांकन और पढ़ाई शुरू करने की प्रक्रिया लगातार टलती रही। इसका सबसे अधिक नुकसान राज्य की उन छात्राओं को हुआ, जिन्हें इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए रांची, धनबाद, जमशेदपुर या दूसरे राज्यों के कॉलेजों का रुख करना पड़ता है।
झारखंड विधानसभा में भी उठ चुका है मुद्दा
महिला इंजीनियरिंग काॅलेज का मुद्दा झारखंड विधानसभा में भी उठ चुका है। कॉलेज का मुद्दा अब तक दो बार प्रमुख रूप से झारखंड विधानसभा में उठाया गया है। 6 मार्च 2021 को गोमिया के तत्कालीन विधायक डा लंबोदर महतो ने तारांकित प्रश्न के माध्यम से कॉलेज में पढ़ाई शुरू नहीं होने का मामला उठाया।
इसके बाद 18 मार्च 2025 को रामगढ़ विधायक ममता देवी ने शून्यकाल में कॉलेज को जल्द चालू कराने की मांग सदन में उठाई है। उनका कहना है कि यदि पीपीपी मॉडल सफल नहीं हो रहा है तो सरकार स्वयं इस संस्थान का संचालन अपने हाथ में ले, ताकि करोड़ों रुपये की इस परियोजना का उद्देश्य पूरा हो सके।
गोला और आसपास के लोगों का मानना है कि कालेज शुरू होने से न केवल रामगढ़ बल्कि बोकारो, हजारीबाग, गिरिडीह और अन्य जिलों की हजारों छात्राओं को लाभ मिलेगा। साथ ही क्षेत्र में रोजगार, व्यवसाय और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब 16.80 एकड़ में फैला अत्याधुनिक परिसर, सभी आवश्यक भवन और बुनियादी सुविधाएं तैयार हैं, उद्घाटन हुए भी सात साल से अधिक समय बीत चुका है, तब आखिर पढ़ाई शुरू क्यों नहीं हो रही?
करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी यदि यह संस्थान बंद पड़ा रहे तो यह न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि झारखंड की बेटियों के सपनों के साथ भी अन्याय है। अब क्षेत्र की जनता सरकार से यही उम्मीद कर रही है कि वर्षों से बंद पड़े इस महत्वाकांक्षी महिला इंजीनियरिंग कॉलेज में जल्द से जल्द शैक्षणिक गतिविधियां शुरू कराई जाएं।
कहते हैं स्थानीय जनप्रतिनिधि
हुप्पू पंचायत के मुखिया प्यारेलाल महतो ने कहा कि महिला इंजीनियरिंग कॉलेज का निर्माण क्षेत्र के लिए गर्व की बात थी। लोगों को उम्मीद थी कि यहां पढ़ाई शुरू होने से बेटियों को घर के पास ही तकनीकी शिक्षा मिलेगी। लेकिन वर्षों से कॉलेज बंद रहने से ग्रामीणों में निराशा है। सरकार को अविलंब इस कॉलेज में नामांकन शुरू कराना चाहिए।
पूर्व मुखिया बजरंग कुमार महथा ने कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से बने इस संस्थान का उपयोग नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। भवन और अन्य सुविधाएं तैयार हैं, लेकिन पढ़ाई शुरू नहीं होना सरकार की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। यदि जल्द संचालन शुरू नहीं हुआ तो भवन और संसाधन धीरे-धीरे खराब होने लगेंगे, जिससे सरकारी धन की बर्बादी होगी।
समाजसेवी लालटू चंद्र पोद्दार ने कहा कि महिला इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू होने से रामगढ़ सहित आसपास के जिलों की हजारों छात्राओं को लाभ मिलता। यह क्षेत्र के विकास और रोजगार के लिए भी महत्वपूर्ण परियोजना है। सरकार को किसी भी प्रकार की प्रशासनिक बाधा को दूर कर तत्काल कॉलेज का संचालन शुरू करना चाहिए, ताकि इसका उद्देश्य पूरा हो सके।
उपमुखिया किशोर कुमार महतो ने कहा कि सरकार ने जिस उद्देश्य से इस कॉलेज का निर्माण कराया था, वह आज तक अधूरा है। क्षेत्र की जनता कई वर्षों से कॉलेज खुलने का इंतजार कर रही है। अब समय आ गया है कि सरकार केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाए और जल्द से जल्द यहां शैक्षणिक गतिविधियां शुरू कराए।