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    सावधान! गुलगुलिया गिरोह आपके बच्चों की रेकी तो नहीं कर रहा, पेरेंट्स की बढ़ी चिंता

    Updated: Sun, 02 Aug 2026 07:05 AM (IST)

    रांची में गुलगुलिया गिरोह एक बार फिर सक्रिय हो गया है, जिससे स्थानीय निवासियों और अभिभावकों में भारी चिंता है। ...और पढ़ें

    रांची रेलवे स्टेशन के पीछे ठिकाना बनाकर रह रहे गुलगुलिया परिवार के सदस्य। (जागरण)

    रांची रेलवे स्टेशन के पीछे ठिकाना बनाकर रह रहे गुलगुलिया परिवार के सदस्य। (जागरण)

    HighLights

    1. रांची में कुख्यात गुलगुलिया गिरोह फिर से सक्रिय हो गया।

    2. पुलिस की निगरानी ढीली पड़ने से गिरोह के सदस्य सक्रिय हुए।

    3. बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में भारी चिंता बढ़ गई।

    जागरण संवाददाता, रांची। रांची में गुलगुलिया गिरोह एक बार फिर सक्रिय हो गया है, जिससे स्थानीय निवासियों और अभिभावकों में भारी चिंता है।

    कुछ महीने पहले मासूम भाई-बहन अंश और अंशिका के लापता होने के मामले के बाद पुलिस की भारी सख्ती के कारण यह गिरोह शहर से लगभग गायब हो गया था, लेकिन पुलिस की निगरानी ढीली पड़ते ही इनकी गतिविधियां दोबारा तेज हो गई हैं।

    शहर के कई प्रमुख और संवेदनशील इलाकों में इस गिरोह के सदस्यों का जमावड़ा फिर से लगने लगा है, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

    चोरी की घटनाएं बढ़ गई है। शहर के विभिन्न हिस्सों में पड़ताल करने पर यह बात सामने आई है कि गुलगुलिया गिरोह के सदस्यों ने फिर से अपने पुराने ठिकानों को आबाद कर लिया है।

    इन इलाकों में देखी जा रही सबसे ज्यादा इनकी सक्रियता

    चुटिया और बरियातू: इन रिहायशी और व्यापारिक क्षेत्रों में गिरोह के सदस्य अक्सर भीख मांगने या कबाड़ चुनने के बहाने रेकी करते देखे जा रहे हैं। सड़क पर सामान बेचने भी देखे जा रहे हैं विशेष रूप से करमटोली चौक पर।

    जगन्नाथपुर और धुर्वा: यह वही इलाका है जो पूर्व में बाल तस्करी के मामलों से बुरी तरह प्रभावित रहा है। यहां के खाली मैदानों और सुनसान जगहों पर इनकी हलचल फिर बढ़ी है।इसी इलाके से अंश और अंशिका का अपहरण किया गया था।

    रांची रेलवे स्टेशन और हटिया रेलवे स्टेशन: इन दोनों प्रमुख स्टेशनों के आसपास और रेल पटरियों के किनारे इस गिरोह ने दोबारा अस्थाई ठिकाने बना ली हैं, जहां से बच्चों की आवाजाही पर नजर रखना इनके लिए आसान होता है।

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    नामकुम: इस इलाके में भी गिरोह के सदस्यों की टोली को संदिग्ध रूप से घूमते देखा जा रहा है। सुबह से लेकर शाम तक सक्रिय रहते हैं।

    छह महीने के बाद धीरे-धीरे शहर में बना रहे हैं ठिकाना

    गुलगुलिया गिरोह का खौफनाक चेहरा इस साल की शुरुआत में तब सामने आया था, जब धुर्वा (मौसीबाड़ी) इलाके से 2 जनवरी को दो मासूम भाई-बहन, अंश और अंशिका अचानक लापता हो गए थे।

    Gulgulia Gang

    बिस्किट खरीदने निकले इन बच्चों का रहस्यमयी ढंग से गायब होना पुलिसके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था। इस मामले को लेकर पूरे शहर में मशाल जुलूस निकाले गए थे और व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे।

    बच्चों को बरामद करने के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। करीब 12 दिनों की कड़ी मशक्कत, पांच राज्यों में छापेमारी और भारी जन दबाव के बाद, 13 जनवरी को पुलिस ने दोनों बच्चों को रामगढ़ जिले के चितरपुर से सुरक्षित बरामद किया था।

    पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि कुख्यात गुलगुलिया गिरोह ने इन मासूमों को अगवा किया था और उन्हें पश्चिम बंगाल व बिहार में 5 लाख रुपये में बेचने की पूरी तैयारी कर ली थी।

    इस रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने गिरोह के 30 से अधिक सदस्यों को हिरासत में लिया था और कई को गिरफ्तार किया था। इस सख्त कार्रवाई के बाद गिरोह के बाकी सदस्य डरकर भूमिगत हो गए थे या शहर छोड़कर भाग गए थे।

    लापता अदिति का मामला: अब तक खाली हैं पुलिस के हाथ

    अंश और अंशिका को तो सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन रांची के सदर थाना क्षेत्र से लापता हुई 18 महीने की मासूम बच्ची अदिति पांडे का मामला आज भी पुलिस के लिए एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है। अदिति मई में अपने घर के पास से रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गई थी।

    अदिति के लापता होने के बाद रांची पुलिस, एनडीआरएफ और फारेंसिक टीमों ने ड्रोन और स्नीफर डाग्स की मदद से नाले से लेकर नदियों तक व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया था।

    जांच के दौरान घर के पास के एक नाले से संदिग्ध जैविक अवशेष (मांस का टुकड़ा) भी मिला था, जिसके बाद डीएनए टेस्ट की प्रक्रिया शुरू की गई।

    हालांकि, अदिति के पिता और परिजनों का स्पष्ट आरोप है कि बच्ची नाले में नहीं गिरी, बल्कि उसका सुनियोजित तरीके से अपहरण किया गया है।

    पुलिस ने अदिति का सुराग देने वाले के लिए इनाम राशि बढ़ाकर 1 लाख रुपये भी कर दी है, लेकिन घटना के महीनों बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ अब तक कोई ठोस सुराग नहीं लगा है।

    पुलिस की सुस्ती और स्थानीय लोगों की चिंता

    अंश-अंशिका केस के समय पुलिस ने जिस तरह की कड़ाई दिखाई थी, वह समय बीतने के साथ ठंडी पड़ गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुलिस की इसी कमजोर पड़ती निगरानी और सुस्ती का फायदा उठाकर गिरोह के सदस्य फिर से शहर में पैर पसार रहे हैं।

    रेलवे स्टेशनों और बस्तियों के पास इनके अस्थायी डेरों की न तो कोई कड़ाई से जांच हो रही है और न ही इनका सत्यापन किया जा रहा है।

    ऐसे रहे सावधान

    • बच्चों पर लगातार नजर रखें: छोटे बच्चों को कभी भी घर के बाहर, गलियों में या दुकानों पर अकेले न भेजें।
    • अजनबी से दूरी: बच्चों को सिखाएं कि वे किसी भी अजनबी व्यक्ति से खाने की चीजें, खिलौने या बिस्किट जैसी वस्तुएं न लें।
    • संदिग्धों की सूचना तुरंत दें: यदि आपके इलाके, रेलवे स्टेशन या कालोनियों के आसपास गुलगुलिया गिरोह या किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधियां दिखती हैं, तो बिना देर किए तुरंत नजदीकी थाना या डायल 112/100 पर पुलिस को सूचित करें।
    • सामुदायिक सतर्कता: मोहल्ला समितियों और सोसायटियों को अपने स्तर पर सुरक्षा गार्डों को सचेत करना चाहिए और सीसीटीवी कैमरों को चालू हालत में रखना चाहिए।

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