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    रांची के हटिया स्टेशन पर अब चेहरे से होगी पहचान, गुमशुदा बच्चों की तलाश और अपराधियों की निगरानी में मदद करेगा FRS

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 06:29 PM (IST)

    हटिया स्टेशन पर छह फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी ट्रेनिंग चल रही है और जल्द ही सेवा शुरू होगी। यह प्रणाली संदिग्धों की पहचान और ...और पढ़ें

    हटिया स्टेशन पर छह FRS कैमरे स्थापित।

    हटिया स्टेशन पर छह FRS कैमरे स्थापित।

    HighLights

    1. हटिया स्टेशन पर छह FRS कैमरे स्थापित।

    2. प्रशिक्षण के बाद जल्द शुरू होगी FRS सेवा।

    जागरण संवाददाता, रांची। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सुरक्षा और आपराधिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अब तकनीक का इस्तेमाल और बढ़ाया जा रहा है। सामान्य सीसीटीवी कैमरों के साथ फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद करेगा।

    रांची रेल मंडल में हटिया स्टेशन पहला स्टेशन है, जहां एफआरएस की सुविधा स्थापित की गई है। यहां छह एफआरएस कैमरे लगाए गए हैं। फिलहाल इन कैमरों से संबंधित तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद कुछ दिनों में इसकी सेवा शुरू होने की उम्मीद है।

    एफआरएस शुरू होने के बाद सुरक्षा कर्मियों को स्टेशन परिसर से गुजरने वाले संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करने में अतिरिक्त तकनीकी सहायता मिलेगी। इसके लिए सुरक्षा एजेंसियों के पास उपलब्ध संदिग्ध या आपराधिक तत्वों की तस्वीरों को सिस्टम में अपलोड किया जा सकता है।

    कैमरे के सामने आने वाले चेहरे का उपलब्ध तस्वीरों से संभावित मिलान होने पर सुरक्षा कर्मियों को इसकी जानकारी मिल सकेगी। इसके बाद आरपीएफ आवश्यक जांच और सत्यापन के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

    गुमशुदा बच्चों की तलाश में भी उपयोगी

    रेलवे स्टेशनों पर गुमशुदा और भटके हुए बच्चों की तलाश में सीसीटीवी पहले से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई मामलों में स्टेशन के कैमरों की रिकार्डिंग से बच्चों के आने-जाने की दिशा और उनके साथ मौजूद लोगों की पहचान में मदद मिलती है।

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    एफआरएस जैसी तकनीक इस निगरानी को और तकनीकी आधार दे सकती है। रांची रेल मंडल के स्टेशनों पर लगे सामान्य सीसीटीवी कैमरों की मदद से गुमशुदा बच्चों की तलाश, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और प्रतिबंधित या अवैध सामान की बरामदगी से जुड़े मामलों में आरपीएफ को सहायता मिलती रही है।

    शराब और अन्य प्रतिबंधित सामान की तस्करी के मामलों में भी स्टेशन परिसर की निगरानी और सीसीटीवी फुटेज जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।

    हटिया में छह कैमरे, ट्रेनिंग के बाद शुरू होगी सेवा

    रांची रेल मंडल में हटिया स्टेशन पर छह एफआरएस कैमरे लगाए जा चुके हैं। फिलहाल इन कैमरों और उससे जुड़ी प्रणाली के संचालन को लेकर संबंधित कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूरा होने और तकनीकी प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुछ दिनों में एफआरएस सेवा शुरू किए जाने की तैयारी है।

    एफआरएस के संचालन के बाद आरपीएफ को स्टेशन परिसर में संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान और निगरानी में अतिरिक्त मदद मिलेगी।

    खासकर पहले से उपलब्ध तस्वीरों वाले संदिग्ध या आपराधिक तत्व यदि कैमरे की निगरानी में आते हैं तो संभावित चेहरे के मिलान से सुरक्षा कर्मियों को आगे की जांच के लिए सुराग मिल सकता है।

    रांची स्टेशन पर अभी नहीं, भविष्य में अन्य स्टेशनों पर भी विस्तार

    फिलहाल रांची रेलवे स्टेशन पर एफआरएस की सुविधा नहीं लगाई जा रही है। रांची रेल मंडल में इसकी शुरुआत हटिया स्टेशन से हुई है। भविष्य में जरूरत और योजना के अनुसार मंडल के अन्य महत्वपूर्ण स्टेशनों पर भी इस तकनीक का विस्तार किया जा सकता है।

    रांची स्टेशन पर सामान्य सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था पहले से मौजूद है। इसके माध्यम से स्टेशन परिसर की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ किसी घटना के बाद फुटेज की जांच की जाती है। एफआरएस के विस्तार के बाद इस व्यवस्था में चेहरे की पहचान से जुड़ी अतिरिक्त तकनीकी क्षमता जुड़ सकती है।

    क्या है एफआरएस?

    एफआरएस यानी फेस रिकग्निशन सिस्टम चेहरे की पहचान से जुड़ी तकनीक है। इसमें कैमरे से प्राप्त चेहरे की तस्वीर का डिजिटल विश्लेषण कर उपलब्ध डाटाबेस में मौजूद तस्वीरों से उसका मिलान करने का प्रयास किया जाता है।

    रेलवे की वीडियो निगरानी व्यवस्था में फेस रिकग्निशन और वीडियो एनालिटिक्स जैसी तकनीकों का इस्तेमाल सुरक्षा निगरानी को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि सिस्टम किसी व्यक्ति को अपने आप अपराधी घोषित कर देता है।

    यदि किसी चेहरे का उपलब्ध डाटाबेस से संभावित मिलान मिलता है तो यह सुरक्षा कर्मियों के लिए एक संकेत होता है। इसके बाद संबंधित व्यक्ति की पहचान और उसके संबंध में उपलब्ध अन्य सूचनाओं का सत्यापन किया जाता है।

    सामान्य सीसीटीवी से अलग क्या?

    स्टेशन पर लगे सामान्य सीसीटीवी कैमरे लगातार निगरानी और घटनाओं की रिकार्डिंग के लिए उपयोगी होते हैं। किसी घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां फुटेज खंगालकर संदिग्ध व्यक्ति के आने-जाने का रास्ता, समय और गतिविधियों का पता लगा सकती हैं।

    एफआरएस इस व्यवस्था में एक अतिरिक्त तकनीकी सुविधा जोड़ता है। इसमें किसी व्यक्ति के चेहरे को उपलब्ध तस्वीरों से मिलाने की क्षमता होती है। ऐसे में यदि सुरक्षा एजेंसियों के डाटाबेस में किसी वांछित या संदिग्ध व्यक्ति की तस्वीर उपलब्ध है और वह स्टेशन परिसर में कैमरे के सामने आता है तो संभावित मिलान सुरक्षा कर्मियों के लिए उपयोगी सूचना बन सकता है।

    हटिया स्टेशन पर एफआरएस कैमरा लगाया गया है। आरपीएफ कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों की पहचान हो सकेगी।

    -एके पांडेय डीएससी, रांची रेल मंडल