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    रांची में कर्ज, घाटा और बकाया में डूबी HEC, 2000 करोड़ से ज्यादा हुई देनदारियां; अस्तित्व पर संकट

    Updated: Fri, 17 Apr 2026 07:30 AM (IST)

    Ranchi News एचईसी गंभीर वित्तीय संकट में है, जिसकी देनदारियां 2000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई हैं। कंपनी का नेटवर्थ माइनस 1594 करोड़ तक पहुंच गया है, औ ...और पढ़ें

    एचईसी पर गहराया अस्तित्व का संकट, 2000 करोड़ से अधिक की देनदारियों में डूबी कंपनी।

    एचईसी पर गहराया अस्तित्व का संकट, 2000 करोड़ से अधिक की देनदारियों में डूबी कंपनी।

    HighLights

    1. एचईसी पर 2000 करोड़ से अधिक की देनदारियां।

    2. कर्मचारियों का 25-29 महीने का वेतन बकाया है।

    3. कंपनी का नेटवर्थ माइनस 1594 करोड़ पहुंचा।

    जागरण संवाददाता, रांची। हैवी इंजीनियरिंग कारपोरेशन (एचईसी) अब गंभीर वित्तीय संकट के दौर से गुजर रही है। ताजा वित्तीय आंकड़ों और स्वतंत्र लेखा परीक्षक की रिपोर्ट को मिलाकर देखें, तो कंपनी की हालत बेहद चिंताजनक हो चुकी है।

    कर्ज, घाटा और बकाया का बोझ इतना बढ़ गया है कि कंपनी के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में एचईसी को 350 करोड़ से अधिक के सालाना नुकसान का अनुमान है। इससे पहले मार्च 2025 तक कंपनी की नेटवर्थ माइनस 1594.32 करोड़ तक पहुंच चुकी थी।

    यानी कंपनी की कुल संपत्ति के मुकाबले देनदारियां कहीं अधिक हो चुकी हैं। वर्ष 2025-26 में कंपनी ने कुल 172 करोड़ का उत्पादन किया। इसमें तीनों प्लांट ने 39 करोड़ और प्रोजेक्ट डिविजन ने 133 करोड़ का उत्पादन किया।

    कंपनी से संबंधित आडिट रिपोर्ट ने भी इस संकट को और स्पष्ट कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी पर पीएफ और अन्य वैधानिक देनदारियों का भारी बोझ है। सीपीएफ लोन और ब्याज 10,794.62 लाख, कर्मचारी अंशदान 6,437.15 लाख और नियोक्ता अंशदान 4,838.20 लाख बकाया है।

    इसके अलावा स्वैच्छिक भविष्य निधि में 5,287.35 लाख जमा नहीं किया गया है। कुल मिलाकर, एचईसी पर विभिन्न मदों में 2000 करोड़ से अधिक की देनदारियां होने का अनुमान है, जबकि कंपनी की प्रदत्त पूंजी मात्र 606.08 करोड़ है।

    आडिट रिपोर्ट में किसी बड़े घोटाले या धोखाधड़ी की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन आंतरिक आडिट व्यवस्था कमजोर पाई गई है और पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठे हैं।

    ऐसे में एचईसी का भविष्य अब पूरी तरह सरकार के हस्तक्षेप, पुनरुद्धार योजना की मंजूरी और त्वरित वित्तीय सहायता पर निर्भर करता दिख रहा है। अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो देश की इस प्रमुख औद्योगिक इकाई के लिए हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।

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    इसी संकट से उबरने के लिए प्रबंधन ने 252 करोड़ की बैंक गारंटी के माध्यम से नया ऋण लेने का प्रस्ताव दिया है, ताकि कार्यशील पूंजी जुटाई जा सके। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम केवल अस्थायी राहत दे सकता है।

    कर्मचारियों का भविष्य असुरक्षित

    बुनियादी सेवाओं का हाल भी खराब है। एचईसी पर झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) का 280 करोड़ से अधिक का बिजली बिल बकाया है, जो बढ़कर 350 करोड़ तक पहुंच सकता है।

    जल कर बकाया 6,750.68 लाख, जीएसटी रिवर्स चार्ज 1,297.58 लाख, नगर निगम कर और प्रोफेशनल टैक्स भी लंबित हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति कर्मचारियों की है। एचईसी के कर्मियों को पिछले 25 से 29 महीनों से वेतन नहीं मिला है।

    बकाया वेतन भुगतान के लिए करीब 155 करोड़ की तत्काल आवश्यकता बताई गई है। वहीं पीएफ ट्रस्ट में कर्मचारियों का लगभग 158 करोड़ जमा नहीं किया गया है, जिससे कर्मचारियों का भविष्य भी असुरक्षित हो गया है।

    सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ा है। सीआईएसएफ की सेवाओं और अन्य शुल्कों के रूप में करीब 125 करोड़ का भुगतान लंबित है।

    कंपनी कभी भी हो सकती है डिफाॅल्ट

    कर्ज के मोर्चे पर स्थिति और गंभीर है। भारत सरकार से लिए गए ऋण और उस पर ब्याज सहित 14,984.61 लाख का भुगतान नहीं किया गया है। बैंकों के कर्ज में भी डिफाॅल्ट की स्थिति बनी हुई है। हालांकि कंपनी को अभी तक ‘विलफुल डिफाॅल्टर’ घोषित नहीं किया गया है, लेकिन रिकवरी का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

    ऑडिट रिपोर्ट में यह भी साफ कहा गया है कि मौजूदा वित्तीय स्थिति को देखते हुए एचईसी अगले एक वर्ष में अपनी देनदारियां समय पर चुकाने में सक्षम नहीं है। कंपनी लगातार दो वर्षों से कैश लास में है और वर्किंग कैपिटल की भारी कमी से जूझ रही है।

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