झारखंड के मुख्यमंत्री ने खोया सबसे करीबी नेता, मंत्री सुदिव्य पर थी कई मुद्दों को सुलझाने की जिम्मेदारी
Sudivya Kumar Sonu Death से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपना सबसे विश्वस्त और करीबी नेता खो दिया है। वे सरकार ...और पढ़ें

मंत्री सुदिव्य कुमार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन। फाइल फोटो
HighLights
सुदिव्य कुमार सोनू मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सबसे करीबी थे।
उन्होंने भाषा विवाद और छात्र आंदोलन जैसे संकट सुलझाए।
कल्पना सोरेन की गांडेय से जीत में अहम भूमिका निभाई।
राज्य ब्यूरो, रांची। Sudivya Kumar Sonu के निधन के साथ ही मुख्यमंत्री ने अपना सबसे विश्वस्त और एक बहुत ही करीबी नेता को खो दिया है। जब भी सरकार अथवा संगठन पर कोई मुसीबत आती थी सुदिव्य अपने विचारों के साथ चट्टान की तरह खड़े हो जाते थे और सरकार को संकट से उबार लेते थे।
हाल में ही भाषा विवाद के कारण महागठबंधन दो फाड़ होता दिख रहा था और कांग्रेस एवं झामुमो के बीच की दूरी बढ़ती जा रही थी। ऐसे में सुदिव्य कुमार ने मोर्चा संभाला और इस मुद्दे का निदान निकाला। विवादों के बावजूद अपने तर्कों से पक्ष-विपक्ष सभी को एक ही सूत्र में बांधने में सफल हुए।
देखते ही देखते यह मामला शांत हो गया। इसके ठीक बाद छात्रों का आंदोलन शुरू हुआ। इस आंदोलन को सरकार की बातों से सहमत कराने की जिम्मेदारी भी सुदिव्य ने बखूबी निभाई। मामला शांत हुआ और जिन चंद लोगों को इसका श्रेय मिला उनमें सुदिव्य कुमार सबसे आगे रहे।
संकट मोचक के रूप में थी छवि
दरअसल, तमाम विवादित मुद्दों का हल निकालने में सुदिव्य का नाम सबसे आगे रहता था। ऐसा उनके जमीन से जुड़े होने के कारण था और अधिसंख्य नेता जानते थे कि सुदिव्य जो भी बात कहेंगे, वह तर्कों की कसौटी पर किसी से काटी नहीं जा सकती है।
सुदिव्य कुमार के चेहरे की भाव-भंगिमा भी कुछ ऐसी थी कि लोगों को उनकी बातों पर तनिक भी शक नहीं होता था। यही कारण था कि नए नेताओं में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सबसे करीबी वही बनकर उभरे थे। इसे उन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान कल्पना सोरेन की जीत सुनिश्चित करते हुए साबित भी किया था।
झामुमो के सीनियर नेता भी यह बात स्वीकार करते हैं कि मुख्यमंत्री जब अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के लिए सुरक्षित क्षेत्र की तलाश कर रहे थे तब सुदिव्य ने ही गांडेय विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की सलाह दी थी।
कल्पना चुनाव मैदान में उतरी तो पूरी जिम्मेदारी सुदिव्य ने उठाई और जीत दर्ज कराकर ही लौटे। इस तरह से सुदिव्य ना सिर्फ हेमंत सोरेन के करीबी रहे बल्कि परिवार के भी करीबी बनकर उभरे। यही कारण है कि उनके अंतिम संस्कार में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की आंखें नम रहीं।
