हेमंत के साथी, कल्पना के सारथी: जब जेल में थे सोरेन, तब सुदिव्य ने गांडेय से कराई थी कल्पना की धमाकेदार एंट्री
दिवंगत सुदिव्य कुमार सोनू ने हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद झामुमो को संकट से उबारा और कल्पना सोरेन की राजनीतिक एंट्री में अहम भूमिका निभाई।

सुदिव्य कुमार सोनू का असामयिक निधन झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
HighLights
हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी पर सुदिव्य सोनू ने संभाला झामुमो का मोर्चा।
कल्पना सोरेन की गांडेय उपचुनाव में जीत की कुशल रणनीति बनाई।
विधानसभा में सरकार के मजबूत और तार्किक प्रवक्ता के रूप में उभरे।
प्रदीप सिंह, जमशेदपुर। राजनीति में रिश्ते अक्सर सत्ता और सहूलियत के साथ बदल जाते हैं, लेकिन कुछ संबंध ऐसे होते हैं जिनकी पहचान पदों और कुर्सियों से नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में निभाई गई वफादारी से होती है।
दिवंगत सुदिव्य कुमार सोनू और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के रिश्ते को इसी नजरिये से देखा जाता है।
सुदिव्य कुमार सोनू का असामयिक निधन न केवल झामुमो (झारखंड मुक्ति मोर्चा) के लिए एक अपूरणीय क्षति है, बल्कि हेमंत सोरेन के लिए एक गहरा व्यक्तिगत और राजनीतिक झटका भी है।
संकट के दौर में संगठन का मोर्चा संभाला
31 जनवरी 2024 का दिन झारखंड की राजनीति के लिए एक बड़ा मोड़ था, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया।
झामुमो उस समय बेहद संवेदनशील राजनीतिक संकट से गुजर रहा था। एक तरफ सरकार को सुचारु रूप से चलाने की चुनौती थी, तो दूसरी तरफ संगठन को बिखराव से बचाना था।
सामने लोकसभा और विधानसभा चुनाव थे और शीर्ष नेता जेल में थे। ऐसे में चम्पाई सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की कमान जरूर संभाली।
लेकिन संगठन को एकजुट रखने और विपक्ष के तीखे हमलों का जवाब देने की जिम्मेदारी सुदिव्य कुमार सोनू ने निभाई।
उन्होंने पार्टी के भीतर निरंतर संवाद और समन्वय स्थापित किया और नेतृत्व के संदेश को जमीनी स्तर तक पहुंचाया।
गांडेय उपचुनाव और कल्पना सोरेन की राजनीतिक एंट्री

हेमंत सोरेन की गैरमौजूदगी में सबसे बड़ा सवाल था कि कल्पना सोरेन को सक्रिय राजनीति में कैसे स्थापित किया जाए। कल्पना सोरेन के लिए यह एक बिल्कुल नई और चुनौतीपूर्ण शुरुआत थी।
उन्हें कार्यकर्ताओं से जुड़ना था और हेमंत सोरेन की अनुपस्थिति में झामुमो के संघर्ष का मुख्य चेहरा बनना था। यहां सुदिव्य कुमार सोनू ने कुशल रणनीतिकार की भूमिका निभाई।
उन्होंने गिरिडीह की गांडेय विधानसभा सीट को खाली कराने से लेकर अप्रैल 2024 के उपचुनाव की पूरी रणनीति तैयार की।
उनकी कुशल सांगठनिक योजना के बल पर कल्पना सोरेन ने गांडेय से धमाकेदार जीत दर्ज की और देखते ही देखते वह एक मजबूत राजनीतिक चेहरे के रूप में उभरीं।
विधानसभा से सड़क तक आक्रामक और तार्किक नेतृत्व
सुदिव्य कुमार सोनू केवल संगठन के रणनीतिकार नहीं थे, बल्कि झारखंड विधानसभा के भीतर भी वे सरकार के सबसे मजबूत और तार्किक प्रवक्ताओं में से एक थे।
विपक्ष के हर वार का वे आक्रामकता और तथ्यों के साथ जवाब देते थे। सत्तापक्ष के विधायकों के बीच उनका गहरा विश्वास था। यही कारण था कि पार्टी के भीतर उन्हें कभी 'बड़ा भाई' तो कभी हेमंत सोरेन का 'राजनीतिक हनुमान' कहा जाता था।
अंतिम विदाई में नम हुईं आंखें
रविवार को जब गिरिडीह में सुदिव्य कुमार सोनू का अंतिम संस्कार किया जा रहा था, तब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए।
अपने सबसे भरोसेमंद साथी की अंतिम यात्रा में हेमंत सोरेन का भावुक होना इस बात का प्रमाण था कि उन्होंने केवल एक विधायक या पार्टी नेता नहीं, बल्कि संकट के दिनों का एक ऐसा साथी खो दिया है, जो हमेशा ढाल बनकर उनके साथ खड़ा रहा।
