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झारखंड सरकार को मिला कुलपति नियुक्ति का अधिकार, निजी संस्थानों पर लगाम; सुदिव्य ने उच्च शिक्षा में किए कई सुधार

Published: Sun, 06 Sep 2026 11:10 PM (IST)

मंत्री सुदिव्य कुमार की पहल पर झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 लागू हुआ, जिससे कुलपतियों की नियुक्ति का अधिकार सरकार ...और पढ़ें

राज्यपाल को विश्वास में लेकर विधानसभा से पारित कराया था झारखंड विश्वविद्यालय विधेयक।

राज्यपाल को विश्वास में लेकर विधानसभा से पारित कराया था झारखंड विश्वविद्यालय विधेयक।

HighLights

  1. झारखंड विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 से सरकार को मिला कुलपति नियुक्ति अधिकार।

  2. निजी शिक्षण संस्थानों व कोचिंग की मनमानी फीस पर लगा अंकुश।

  3. झारखंड में मंत्री सुदिव्य कुमार ने उच्च शिक्षा में लाए महत्वपूर्ण बदलाव।

नीरज अम्बष्ठ, रांची। मंत्री सुदिव्य कुमार का उच्च एवं तकनीकी विकास मंत्री के रूप में सबसे बड़ी उपलब्धि झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 लागू कराना रहा। इस अधिनियम के लागू होने से जहां राजकीय विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति का अधिकार सरकार के पास रखा गया, वहीं विश्वविद्यालयाें पर सरकार का नियंत्रण भी बढ़ा।

अधिनियम लागू होने से पूर्व कुलपतियों की नियुक्ति राज्यपाल से कुलाधिपति द्वारा की जाती थी। इससे कई बार लोक भवन और सरकार के बीच टकराव भी होता था। सुदिव्य कुमार ने झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026 लाने से पहले राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को विश्वास में लिया था।

बताया जाता है कि झारखंड विधानसभा में इस विधेयक को लाने से पहले उन्होंने लोक भवन जाकर राज्यपाल से मुलाकात की थी और विधेयक के प्रविधानों से उन्हें अवगत कराया था। संभवत: इसी कारण कुछ स्पष्टीकरण मांगे जाने के बाद राज्यपाल ने विधानसभा से पारित होने के बाद विधेयक पर इस वर्ष 17 अप्रैल को अपनी स्वीकृति भी प्रदान कर दी।

इसके बाद 21 अप्रैल को अधिनियम लागू कर दिया गया। इस अधिनियम में विश्वविद्यालयों की कार्य संस्कृति, शैक्षणिक सुधार, वित्तीय प्रबंधन को लेकर कई नए प्रविधान भी किए गए हैं। कालेजों एवं विश्वविद्यालयों में शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों की नियुक्ति के लिए विश्वविद्यालय सेवा आयोग के गठन का भी प्रविधान किया गया है। हालांकि अभी तक इस आयोग का गठन नहीं हो सका है।

निजी शैक्षणिक व कोचिंग संस्थानों पर अंकुश के लिए लागू किया कानून

सुदिव्य कुमार ने राज्य में पहली बार निजी शिक्षण शिक्षण संस्थानों एवं कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए कानून लागू कराया। इसके लिए झारखंड झारखंड व्यावसायिक शिक्षण संस्थान (नियंत्रण एवं नियमन) अधिनियम, 2025 तथा झारखंड कोचिंग संस्थान (रेगुलेशन आफ फीस) अधिनियम, 2025 अधिनियम लागू कराया।

कोचिंग संस्थानों ने झारखंड कोचिंग संस्थान (रेगुलेशन आफ फीस) विधेयक का व्यापक विरोध भी किया था। राज्यपाल से विधेयक पर स्वीकृति नहीं देने की गुहार भी लगाई थी। हालांकि राज्यपाल ने छात्रहित में इसपर अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी।

इस कानून का उद्देश्य निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों (इंजीनियरिंग, मेडिकल, प्रबंधन आदि) द्वारा मनमाने ढंग से वसूले जाने वाले शुल्क पर लगाम लगाना है। झारखंड व्यावसायिक शिक्षण संस्थान (नियंत्रण एवं नियमन) अधिनियम में संस्थानों में शुल्क के निर्धारण और पारदर्शिता के लिए उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित किए जाने का प्रावधान है।

वहीं,संस्थानों द्वारा ली जाने वाली अतिरिक्त और अवैध कैपिटेशन फीस पर भी रोक लगाई गई है। झारखंड कोचिंग संस्थान (रेगुलेशन आफ फीस) अधिनियम में 50 से अधिक छात्रों वाले कोचिंग संस्थानों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। साथ ही कोचिंग संस्थानों के नियमन के लिए जिला व राज्य स्तर पर रेगुलेटरी कमेटी बनाने का भी प्रविधान है।

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