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    असम के बाद हेमंत बंगाल में भाजपा के खिलाफ करेंगे चुनाव प्रचार, ममता के बुलावे पर आदिवासी क्षेत्रों पर फोकस

    Updated: Mon, 13 Apr 2026 11:17 AM (IST)

    असम में प्रचार के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अब पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के लिए सघन चुनाव अभियान चलाएंगे। वे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में रैलिय ...और पढ़ें

    आदिवासी बहुल क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

    आदिवासी बहुल क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

    HighLights

    1. हेमंत सोरेन बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के लिए प्रचार करेंगे।

    2. ममता बनर्जी को आदिवासी वोट बैंक में मजबूती मिलेगी।

    राज्य ब्यूरो, रांची। असम में अपने दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवारों के पक्ष में धुआंधार चुनाव प्रचार करने के बाद अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जल्द ही बंगाल का रुख करने जा रहे हैं। वहां वे सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के समर्थन में चुनावी अभियान को धार देंगे।

    उनके कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जबकि झामुमो के वरिष्ठ नेता पहले ही बंगाल पहुंचकर समन्वय की रूपरेखा तैयार करेंगे। ममता बनर्जी के समर्थन में झामुमो पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है।

    2021 के विधानसभा चुनाव में भी हेमंत सोरेन ने तृणमूल के पक्ष में प्रचार किया था, जिसका असर खासकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में देखने को मिला था। इस बार भी हेमंत सोरेन का मुख्य फोकस बंगाल के आदिवासी बहुल इलाके होंगे। झारखंड से सटे जंगलमहल क्षेत्र के अलावा उत्तर बंगाल के जिलों में भी उनकी सभाएं प्रस्तावित हैं।

    इन इलाकों में झामुमो की विचारधारा और सामाजिक आधार को विस्तार देने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। गांडेय विधायक कल्पना सोरेन का भी कार्यक्रम बन सकता है, जिससे प्रचार अभियान को और धार मिलेगी।

    राजनीतिक रिश्तों की मजबूती

    झामुमो के सांसद विजय हांसदा ने कहा है कि तृणमूल कांग्रेस के साथ पार्टी का पुराना और गहरा संबंध रहा है। उन्होंने इसे राजनीतिक सहयोग का स्वाभाविक विस्तार बताया।

    वहीं मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने भी कहा कि विभिन्न दलों के बीच सहयोग लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है और इस पर अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व लेगा। उल्लेखनीय है कि झारखंड और बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक समानताएं हैं, जिनका राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश चुनाव में होगी।

    आदिवासी वोट बैंक को साधने में हेमंत सोरेन की लोकप्रिय छवि प्रभावी हो सकती है। इससे ममता बनर्जी को उन क्षेत्रों में मजबूती मिल सकती है, जहां भाजपा लगातार अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

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