झारखंड-बिहार की सड़कों का सीन बदल देंगे ये 5 नए प्रोजेक्ट, गाड़ियां फर्राटा दौड़ेंगी; उद्योग-पर्यटन के लिए वरदान
केंद्र सरकार और राज्य मिलकर झारखंड-बिहार में 5 बड़े हाई-स्पीड हाईवे व एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। ये परियोजनाएं यात्रा का समय आधा कर दें ...और पढ़ें

झारखंड बिहार में 5 नए हाईवे प्रोजेक्ट बदलेंगे तस्वीर, उद्योग और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा।
HighLights
झारखंड-बिहार की आर्थिक कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
खनिज उद्योग, कृषि-व्यापार और पर्यटन को नई उड़ान।
डिजिटल डेस्क, रांची। झारखंड और बिहार की सड़क व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आने वाला है। केंद्र सरकार, NHAI और दोनों राज्य सरकारें मिलकर 5 बड़े हाई-स्पीड हाईवे व एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रही हैं।
ये प्रोजेक्ट न सिर्फ यात्रा का समय आधा कर देंगे बल्कि झारखंड के खनिज उद्योग, बिहार के कृषि-व्यापार और धार्मिक पर्यटन को नई उड़ान देंगे। कुल मिलाकर इनसे दोनों राज्यों के बीच आर्थिक कनेक्टिविटी मजबूत होगी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
1. पशुपतिनाथ-बैद्यनाथ धाम हाई-स्पीड कॉरिडोर (250 किमी एक्सप्रेस-वे)
बिहार सरकार ने फरवरी 2026 में 250 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर का प्रस्ताव केंद्र को भेज दिया है। नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर से शुरू होकर सुपौल, सहरसा, खगड़िया, मुंगेर और बांका जिले होते हुए झारखंड के देवघर (बैद्यनाथ धाम) तक जाएगा।
प्रभाव: वर्तमान 13-14 घंटे की यात्रा घटकर सिर्फ 2-3 घंटे रह जाएगी। नेपाल-भारत व्यापार, धार्मिक पर्यटन और झारखंड के खनिज उद्योग को सीधा फायदा। बिहार रोड कंस्ट्रक्शन मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने 2026-27 बजट में इसकी घोषणा की।

2. अमास-दरभंगा एक्सप्रेसवे
यह बिहार का पहला एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे होगा। 189 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट गया, औरंगाबाद, जहानाबाद, पटना, वैशाली, समस्तीपुर और दरभंगा के 7 जिलों से गुजरेगा। 25% काम पूरा हो चुका है और दिसंबर 2026 तक ट्रैफिक के लिए खुलने की उम्मीद है।
प्रभाव: उत्तर और दक्षिण बिहार को सीधा जोड़ेगा। यात्रा समय आधा हो जाएगा। झारखंड से आने वाले वाहनों के लिए भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।

3. पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे (नेशनल एक्सप्रेसवे-9)
282 किलोमीटर लंबा 6-लेन ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट। पटना से शुरू होकर पूर्णिया तक जाएगा। लैंड एक्विजिशन चल रहा है, 2026 के अंत तक बिडिंग पूरी होने की संभावना। कुल लागत करीब 18,042 करोड़ रुपये।
प्रभाव: पटना से पूर्णिया की यात्रा 3 घंटे में पूरी होगी। सीमांचल क्षेत्र के उद्योगों, एयरपोर्ट कनेक्टिविटी और व्यापार को बढ़ावा। बिहार का पहला इंट्रा-स्टेट एक्सप्रेसवे माना जा रहा है।
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4. रांची-पटना 4-लेन हाईवे
323 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट। रांची, हजारीबाग, बारही, कोडरमा होते हुए पटना तक। 88% काम पूरा, दिसंबर 2027 तक पूरा होने की उम्मीद। लागत 5,000 करोड़ रुपये।
प्रभाव: दोनों राज्यों की राजधानियों को सीधा जोड़ेगा। वर्तमान 8-10 घंटे की यात्रा काफी कम हो जाएगी। झारखंड के खनिज उद्योग और बिहार के कृषि-उद्योग क्षेत्र को फायदा।

5. औरंगाबाद-बरवाअड्डा (झारखंड बॉर्डर) 6-लेन हाईवे (NH-2 अपग्रेड)
222 किलोमीटर लंबा सिक्स-लेन अपग्रेड प्रोजेक्ट। बिहार के औरंगाबाद से शुरू होकर झारखंड-बिहार बॉर्डर होते हुए बरवाअड्डा (धनबाद के पास) तक जाएगा। NHAI ने इसे प्राथमिकता पर लिया है, काम तेजी से चल रहा है।
प्रभाव: झारखंड और बिहार को सीधा जोड़ने वाला यह प्रोजेक्ट खनिज परिवहन को सुपरफास्ट बनाएगा। दिल्ली-कोलकाता कॉरिडोर से भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और दोनों राज्यों के बीच ट्रैफिक दबाव कम होगा।

प्रोजेक्ट जमीन पर आने से उद्योगों को गति
वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ चौधरी कहते हैं कि झारखंड के कोयला-लोहा जैसे खनिजों के तेज और सुरक्षित परिवहन, बिहार के औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच आसान करने के लिए सड़कों का समृद्ध होना जरूरी है। इससे रोजगार सृजन, पर्यटन को बल मिलता है। क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति प्रदान होगी।
ये प्रोजेक्ट्स सही समय पर पूरे हों इसके लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया और राज्य सरकारें दोनों पर संयुक्त रूप से निर्भर करता है। लैंड एक्विजिशन और पर्यावरण मंजूरी जैसी बाधाओं का पार करना आसान नहीं होता है।
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