Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    झारखंड में 45 शोध प्रस्तावों को मंजूरी: बंद खदानों के पानी से बिजली, बांस किसानों को AI बाजार

    Updated: Thu, 26 Mar 2026 10:12 AM (IST)

    झारखंड काउंसिल ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन ने 45 शोध प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इनमें बंद खदानों के पानी पर फ्लोटिंग सोलर पैनल से बिजली उत्पादन, ...और पढ़ें

    खदानों के पानी पर सोलर पैनल सहित 45 शोध को मंजूरी।

    खदानों के पानी पर सोलर पैनल सहित 45 शोध को मंजूरी।

    HighLights

    1. बंद खदानों के पानी पर लगेंगे फ्लोटिंग सोलर पैनल।

    2. बांस किसानों को मिलेगा एआई-आधारित ऑनलाइन बाजार।

    3. अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण, शिशु रोग पहचान पर शोध।

    नीरज अम्बष्ठ, रांची। राज्य में कई ऐसे खुले खदान हैं, जहां खनन कार्य पूरा होने के बाद वह तालाब और झील का रूप ले चुका है। वहां जमा पानी का उपयोग न तो पीने के लिए होता है और न ही उससे सिंचाई ही होती है।

    उस पानी का उपयोग फ्लोटिंग सोलर पैनल बिछाने में हो सकता है, जिससे राज्य को बिजली मिल सकती है। इसपर शोध होगा। इसी तरह, राज्य में बांस का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है।

    लेकिन बाजार नहीं मिलने से किसानों को बांस औने-पौने कीमत पर बेचनी पड़ते हैं। शिल्पकारों एवं अन्य व्यवसायियों के बीच किसान एआई आधारित सिस्टम के माध्यम से आसानी से अपने उत्पाद को बेच सकें, इसपर भी शोध होगा।

    राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अधीन कार्यरत झारखंड काउंसिल आफ साइंस, टेक्नोलाजी एंड इनोवेशन ने कुल 45 शोध प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान करते हुए अनुदान देने का निर्णय किया है, जिनमें ये दोनों शोध प्रस्ताव भी सम्मिलित हैं।

    खदानों के पानी पर सोलर पैनल बिछाने बांस की बिक्री के लिए बाजार उपलब्ध कराने से संबंधित शोध बीआइटी मेसरा के फैकल्टी करेंगे।

    दो वर्ष और तीन वर्ष के प्रोजेक्ट 

    काउंसिल ने तीन तरह के शोध प्रस्तावों की मंजूरी प्रदान की है। इसमें माइनर प्रोजेक्ट एक वर्ष, मेजर प्रोजेक्ट दो वर्ष तथा लांग टर्म प्रोजेक्ट तीन वर्ष में पूरे होंगे।

    बंद खदानों में फ्लोटिंग सोलर पैनल से संबंधित शोध प्रस्ताव में प्रोजेक्ट एप्रूवल कमेटी ने माना कि यह प्रोजेक्ट बिना इस्तेमाल होने वाले पानी के स्रोतों को क्लीन-एनर्जी एसेट में बदलने में मदद कर सकता है, जिससे झारखंड की सोलर पालिसी को सहयोग मिलेगा।

    ज़मीन के इस्तेमाल का दबाव कम होगा और माइनिंग के बाद ज़मीन के रिहैबिलिटेशन को बढ़ावा मिलेगा। यह रामगढ़, चतरा, हज़ारीबाग और बोकारो जैसे ज़िलों के लिए रिन्यूएबल एनर्जी प्लानिंग को मज़बूत करेगा।

    प्रस्ताव के लिए 3.20 लाख की वित्तीय सहायता की अनुशंसा की गई। काउंसिल ने थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम के तहत हाइब्रिड बैटरी डिजाइन करने के प्रोजेक्ट को भी स्वीकृति प्रदान की है।

    इसी तरह, एनआइटी, जमशेदपुर के फैकल्टी एंटीना और मेटामैटेरियल से प्रेरित कम लागत वाला नन-इनवेसिव सेंसर तैयार करेंगे जो एनीमिया, डायबिटीज़ और एरिथमिया की पहचान करेगा।

    वहीं, अमिटी विश्वविद्यालय के शिक्षक स्किन रिपेयर और मेडिकल इस्तेमाल के लिए झारखंड के घाव भरने वाले औषधीय पौधे से बने नैनो फार्मूलेशन का इस्तेमाल करके एंटी-माइक्रोबियल काटन बैंडेज तैयार करने पर शोध करेंगे। इसके लिए 1.65 लाख की आर्थिक सहायता देने का निर्णय किया गया है।

    खबरें और भी

    अस्पतालों को संक्रमणमुक्त बनाने पर शोध

    रांची विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग की डॉ. स्मृति सिंह सुपरबग रेजिस्टेंस के लिए एंटीमाइक्रोबियल नैनोमेटेरियल के डेवलपमेंट पर शोध करेंगे।

    शोध प्रस्ताव की स्वीकृति देनेवाली प्रोजेक्ट एप्रूवल कमेटी ने माना कि यह प्रोजेक्ट झारखंड के लिए ज़रूरी है, जहां एमडीआर इंफेक्शन और हास्पिटल से होनेवाले संक्रमण बढ़ रहे हैं।

    यह एंटीबायोटिक पर निर्भरता कम करने के लिए सस्ते एवं स्थानीय स्तर पर बननेवाले एंटीमाइक्रोबियल विकल्प दे सकता है। इस शोध के लिए कुल 7.50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता की मंज़ूरी दी गई है।

    एआई आधारित क्राई एनालाइजर बनाएंगे 

    बीआइटी के इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलाजी विभाग के वैज्ञानिक एआइ आधारित क्राई एनालाइजर बनाएंगे। माइनर प्रोजेक्ट के तहत इसके लिए 1.80 लाख की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

    इस प्रस्ताव के बारे में कहा गया कि झारखंड के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में अक्सर शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी होती है, जिससे नवजात शिशु की बीमारी का पता देर से चलता है।

    यह एनालाइजर माता-पिता और हेल्थ वर्कर को बीमार नवजात शिशुओं की जल्दी पहचान करने में मदद कर सकता है, जिससे नवजात शिशु की मृत्यु दर कम होगी। यह टूल आंगनबाड़ी सेविका और आशा वर्कर जैसे फ्रंटलाइन वर्कर को सपोर्ट कर सकता है।

    यह भी पढ़ें- कल्पना सोरेन जा सकती हैं राज्यसभा, झारखंड की राजनीति में बड़ा बदलाव; दो सीटों पर हैं चुनाव

    यह भी पढ़ें- साइबर ठगों से निबटने के लिए रांची में खुलेगा साइबर वेलनेस सेंटर, एक छत के नीचे सभी सहायता

    यह भी पढ़ें- साल सूरज से इश्‍क लड़ाता तो अर्जुन दर्द पर मरहम; सतपुड़ा भूल जाओगे, कभी आओ तो सारंडा के जंगल