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    Holika Dahan 2026: आज रात 12:50 बजे के बाद होगा होलिका दहन, जानिए शुभ मूहुर्त और पूजन विधि

    Updated: Mon, 02 Mar 2026 11:13 AM (IST)

    फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन 2 मार्च की रात 12:50 बजे के बाद करीब 150 स्थानों पर होगा। 4 मार्च को धुलेंडी मनाई जाएगी। यह पर्व भक्त प्रह्लाद और होलिक ...और पढ़ें

    होलिका दहन का शुभ मुहूर्त। फोटो एआई जनरेटेड

    होलिका दहन का शुभ मुहूर्त। फोटो एआई जनरेटेड

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    जागरण संवाददाता, रांची। फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत दो मार्च को शाम 5:18 बजे से हो रही है। ज्योतिष एक्सपर्ट्स के मुताबिक होलिका दहन दो मार्च को रात 12:50 बजे के बाद होगा। रांची शहर में करीब डेढ़ सौ स्थानों पर होलिका दहन होगा।

    अपर बाजार, बकरी बाजार, कोकर, थड़पकना, हरमू रोड, किशोर गंज, हिनू, धुर्वा, मोरहाबादी स्थित अनेक स्थानों पर होलिका दहन होगा। इसको लेकर जगह-जगह लकड़ी रख दिया गया है। चार मार्च को धुलेंडी यानी होली का पर्व मनाया जाएगा।

    होलिका दहन की पौराणिक मान्यता

    होलिका दहन की कथा का वर्णन श्रीमद्भागवत और अन्य पुराणों में मिलता है। हिरण्यकशिपु नामक अत्याचारी असुरराज ने स्वयं को भगवान घोषित कर दिया था। उसका पुत्र भक्त प्रह्लाद भगवान श्रीहरि विष्णु का परम भक्त था।

    यह बात हिरण्यकशिपु को स्वीकार नहीं थी। उसने कई बार प्रह्लाद को मृत्यु के मुख में धकेलने का प्रयास किया, किंतु हर बार भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे।

    अंततः हिरण्यकशिपु ने अपनी बहन होलिका (जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था) से प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने को कहा। लेकिन भगवान के कृपा आगे होलिका को प्राप्त वरदान निष्फल हो गया।

    होलिका अग्नि में भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद सुरक्षित बाहर निकल आए। यही घटना होलिका दहन के रूप में मनाई जाती है। होलिका दहन को पापों के दहन और नव जीवन के आरंभ का प्रतीक माना जाता है।

    नकारात्मकता के अंत का प्रतीक 

    यह पर्व हमें यह स्मरण कराता है कि हमारे भीतर जो भी नकारात्मक भाव जैसे क्रोध, ईर्ष्या, लोभ, अहंकार आदि हैं, उन्हें इस अग्नि में समर्पित कर देना चाहिए। अग्नि देवता को साक्षी मानकर जब हम होलिका की परिक्रमा करते हैं, तो यह हमारे आत्मशुद्धि का संकल्प होता है।

    ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोग सूखी लकड़ियां और उपले अग्नि में अर्पित करते हैं। जो प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और समृद्धि की प्रार्थना का प्रतीक है।

    • होलिका दहन स्थल को शुद्ध करके वहां लकड़ियों या उपलों का ढेर सजायें।
    • रोली, अक्षत, पुष्प, जल, गुड़, हल्दी, मूंग, गेहूं की बालियां आदि से पूजन करें।
    • कच्चा सूत (मौली) होलिका के चारों ओर लपेटे।
    • भक्तजन श्रद्धा से परिक्रमा करते हुए सुख-समृद्धि और संतानों की रक्षा हेतु कामना करें।
    • होलिका की अग्नि की राख को माथे पर लगाएं। इससे नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।

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