ICAR-IIAB ने एग्रीकल्चर रिसर्च में रचा इतिहास, अरुणाचली याक का पहला संपूर्ण जीनोम किया तैयार
रांची स्थित आईसीएआर-आईआईएबी कृषि अनुसंधान और जैव प्रौद्योगिकी का प्रमुख केंद्र बन गया है, जिसने विंग्ड बीन और अरुणाचली याक का पहला संपूर्ण जीनोम अनुक् ...और पढ़ें

नामकुम के गढ़खंटगा आईसीएआर-आईआईएबी संस्थान। (जागरण)
जागरण संवाददाता, नामकुम। रांची के नामकुम स्थित गढ़खंटगा का भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (आइसीएआर-आइआइएबी) आज देश में कृषि अनुसंधान और जैव प्रौद्योगिकी का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।
वर्ष 2021 में पूरी तरह सक्रिय होने के बाद महज पांच वर्षों में संस्थान ने ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जगत में भी अपनी अलग पहचान बनाई है।
फसलों की नई किस्मों के विकास, जीनोम अनुसंधान, नैनो तकनीक और किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने के क्षेत्र में संस्थान लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
संस्थान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में विंग्ड बीन (चौसला सेम) का दुनिया का पहला संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण और अरुणाचली याक का विश्व का पहला संपूर्ण जीनोम तैयार करना शामिल है।
इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने आइआइएबी धान-5 नामक नई धान किस्म विकसित की, जिसे केंद्रीय स्तर पर मान्यता मिलने के बाद झारखंड समेत छह राज्यों में खेती के लिए अनुशंसित किया गया है। इसकी बेहतर उत्पादन क्षमता के कारण सात राज्यों के किसान इसका लाभ उठा रहे हैं।
नैनो कण संश्लेषण मशीन भी की विकसित
पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने की दिशा में संस्थान ने नैनो कण संश्लेषण मशीन भी विकसित की है। इस मशीन के माध्यम से माइक्रो जिंक, कापर और यूरिया जैसे नैनो कण तैयार किए जाते हैं।
इससे नैनो आधारित कृषि उत्पादों के व्यावसायीकरण को बढ़ावा मिलने के साथ ही उर्वरकों के अधिक प्रभावी उपयोग का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
अनुसंधान के साथ-साथ आईसीएआर-आईआईएबी ग्रामीण विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अब तक एक लाख से अधिक किसानों, ग्रामीण युवाओं, विद्यार्थियों और उद्यमियों को आधुनिक कृषि, पशुपालन और जैव प्रौद्योगिकी का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
प्रशिक्षण के दौरान उन्नत बीज, पौधे और अन्य कृषि सामग्री भी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती है। वर्ष 2025 में संस्थान के वैज्ञानिकों ने करीब 100 शोध-पत्र प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित किए, जो इसकी शोध क्षमता का प्रमाण हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में भी संस्थान तेजी से आगे बढ़ रहा है। यहां बीटेक (बायोटेक्नोलाजी), एमएससी और पीएचडी स्तर पर आणविक जीवविज्ञान, आनुवंशिकी, पादप प्रजनन, पादप जैवरसायन सहित कई विषयों में पढ़ाई कराई जाती है।
इसी वर्ष बीटेक की पहली बैच के 30 विद्यार्थियों ने स्नातक की उपाधि प्राप्त की, जिनमें 10 से अधिक छात्रों का चयन आइआइटी में उच्च शिक्षा के लिए हुआ है।
संस्थान के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित ने कहा कि आईसीएआर-आईआईएबी आधुनिक कृषि और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अत्याधुनिक शोध कर उसकी तकनीक किसानों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
हमारा उद्देश्य ऐसी तकनीकों का विकास करना है, जिससे जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं और बदलती कृषि परिस्थितियों में भी किसानों को कम से कम नुकसान हो।
उन्होंने कहा कि संस्थान जीनोमिक्स, जीन संपादन, जलवायु-सहिष्णु कृषि और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में लगातार बेहतर अनुसंधान कर रहा है।
कृषि और पशुधन दोनों क्षेत्रों में विकसित नई तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने के लिए वैज्ञानिक निरंतर कार्य कर रहे हैं, ताकि खेती अधिक लाभकारी, टिकाऊ और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप बन सके।
वैज्ञानिक डॉ. सुजय बी. कडेमानी ने कहा कि संस्थान किसानों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और उद्यमियों के लिए आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और वैज्ञानिक सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है।
कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी से जुड़ी किसी भी समस्या के समाधान और मार्गदर्शन के लिए संस्थान के विशेषज्ञ हमेशा सहयोग के लिए तैयार हैं। उन्होंने लोगों से इन वैज्ञानिक सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की।
आईसीएआर-आईआईएबी की प्रमुख उपलब्धियां
- वर्ष 2021 से अब तक चार विश्वस्तरीय अनुसंधान पूरे किए
- विंग्ड बीन (चौसला सेम) का दुनिया का पहला संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण
- अरुणाचली याक का विश्व का पहला संपूर्ण जीनोम तैयार
- आईआईएबी धान-5 विकसित, झारखंड समेत छह राज्यों में खेती के लिए अनुशंसित
- आईआईएबी धान-5 से सात राज्यों के किसान बेहतर उत्पादन और आय प्राप्त कर रहे हैं
- नैनो कण संश्लेषण मशीन विकसित, माइक्रो जिंक, कॉपर और यूरिया आधारित नैनो उर्वरकों के उत्पादन में सक्षम
- एक लाख से अधिक किसानों, विद्यार्थियों और ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया
- वर्ष 2025 में करीब 100 शोध-पत्र प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित
- बीटेक (बायोटेक्नोलाजी) की पहली बैच के 30 विद्यार्थियों ने स्नातक किया, 10 से अधिक छात्रों का आईआईटी में उच्च शिक्षा के लिए चयन हुआ