जगन्नाथपुर रथ मेला में पार्किंग शुल्क पर फूटा गुस्सा, दोपहिया के ₹60 और कार के वसूले जा रहे ₹120
रांची के जगन्नाथपुर रथ मेला में अत्यधिक पार्किंग शुल्क को लेकर श्रद्धालुओं में भारी नाराजगी है, जो खिलौनों और घरेलू सामानों से भी महंगा पड़ रहा है। ...और पढ़ें

रथ मेला में पार्किंग शूल्क की टिकट की तस्वीर। (जागरण)
HighLights
पार्किंग शुल्क खिलौनों और घरेलू सामानों से भी अधिक।
दोपहिया 60, चारपहिया 120 रुपये शुल्क, रात में जुर्माना।
बढ़े शुल्क से मेले की भीड़ और व्यापार पर असर।
जागरण संवाददाता, रांची। भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा के अवसर पर आयोजित जगन्नाथपुर रथ मेला में इस वर्ष पार्किंग शुल्क को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
मेले में आने वाले श्रद्धालुओं का आरोप है कि पार्किंग शुल्क इतना अधिक है कि वह कई दुकानों पर बिक रहे खिलौनों और घरेलू सामानों की कीमत से भी ज्यादा पड़ रहा है।
गांव से मेला घूमने आए लोगों ने बताया कि मेला तो दूर की बात भगवान की पूजा करना भी अब महंगा हो गया है। मेला परिसर में बच्चों के कई खिलौने 30 से 50 रुपये में बिक रहे हैं।
वहीं, कई घरेलू उपयोग की वस्तुएं भी 50 रुपये से कम कीमत पर उपलब्ध हैं। इसके बावजूद दोपहिया वाहनों की पार्किंग के लिए 60 रुपये और चारपहिया वाहनों के लिए 120 रुपये तक शुल्क लिया जा रहा है। इससे मेला घूमने आए लोगों का बजट प्रभावित हो रहा है।
रात में अतिरिक्त जुर्माना बना परेशानी
मेला आने वाले लोगों का आरोप है कि रात 9 बजे के बाद पार्किंग में खड़े वाहनों पर अतिरिक्त 50 रुपये जुर्माना भी वसूला जा रहा है।
कई लोगों का कहना है कि जुर्माने को लेकर पार्किंग कर्मियों और वाहन मालिकों के बीच बहस और विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो रही है।
लोगों का यह भी आरोप है कि वाहन चोरी या किसी अन्य नुकसान की स्थिति में समिति कोई जिम्मेदारी नहीं लेती, फिर भी भारी शुल्क वसूला जा रहा है।
भीड़ पर पड़ रहा असर
स्थानीय लोगों का कहना है कि बढ़े हुए पार्किंग शुल्क का असर मेले की भीड़ पर भी दिखाई दे रहा है। कई परिवार एक बार मेला घूमने के बाद दोबारा आने से बच रहे हैं। इसका सीधा असर छोटे दुकानदारों, झूला संचालकों और दूर-दराज से आए व्यापारियों के कारोबार पर पड़ रहा है।
पार्किंग व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
मेले में आने वाले लोगों ने पार्किंग शुल्क की समीक्षा करने और आम श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देने की मांग की है।
उनका कहना है कि रथ मेला धार्मिक आस्था और जनभागीदारी का पर्व है, ऐसे में शुल्क निर्धारण भी आम जनता की आर्थिक क्षमता को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
मैं 200 रुपये लेकर मेला घूमने आया था, जिसमें 60 रुपये पार्किंग में ही खर्च हो गए। महंगे पार्किंग शुल्क के कारण खरीदारी का बजट प्रभावित हो गया। रथ मेला गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों का मेला माना जाता था, लेकिन अब इसकी लागत लगातार बढ़ती जा रही है।
राजकुमार शर्मा, नामकुम निवासी
मैं परिवार के साथ मेला घूमने आया था। उम्मीद थी कि हर साल की तरह सस्ता सामान मिलेगा, लेकिन यहां तो पार्किंग लगाना ही महंगा पड़ गया। यह आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ है।
मनोरंजन मिश्रा, टाटीसिलवे निवासी