बारिश के बीच झारखंड में मलेरिया का बड़ा खतरा! छह महीने में 16,738 मरीज; रांची में सबसे ज्यादा डेंगू केस
मानसून में झारखंड में मच्छर जनित बीमारियाँ बढ़ी हैं, जहाँ 16,728 मलेरिया और 77 डेंगू के मामले दर्ज हुए हैं। इनमें 68.57% मलेरिया मरीज खतरनाक फेल्सीपेर ...और पढ़ें

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HighLights
16,728 मलेरिया, 77 डेंगू मरीज मिले (जन-जून 2026)।
68.57% मलेरिया मरीज खतरनाक फेल्सीपेरम संक्रमण से ग्रसित।
जागरण संवाददाता, रांची। मानसून के सक्रिय होते ही झारखंड में मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ने लगा है। राज्य में इस वर्ष मलेरिया के साथ-साथ डेंगू और जापानी इंसेफ्लाइटिस के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, एक जनवरी से 30 जून 2026 तक राज्य में 16,728 मलेरिया और 77 डेंगू के मरीज मिले हैं। राहत की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति को फिलहाल नियंत्रण में बताया है, लेकिन लगातार बारिश और जलजमाव को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
रांची में डेंगू के सबसे अधिक 27 मामले सामने आए हैं, जिससे राजधानी भी हाई अलर्ट पर है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, डेंगू के मामले राज्य के 20 जिलों में फैल चुके हैं। वहीं, जापानी इंसेफ्लाइटिस के भी छह जिलों से 11 मरीज मिले हैं।
पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम बने मलेरिया के हॉटस्पॉट
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य में मलेरिया के सबसे अधिक मामले पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम से सामने आए हैं। पूर्वी सिंहभूम में 6,527 तथा पश्चिमी सिंहभूम में 6,172 मरीज मिले हैं। इसके अलावा गोड्डा में 1,404, सरायकेला-खरसावां में 723, साहिबगंज में 356, सिमडेगा में 118, हजारीबाग में 61, गिरिडीह में 56, दुमका में 42, गढ़वा में 23 तथा रांची में 42 मलेरिया के मामले दर्ज किए गए हैं।
खतरनाक फेल्सीपेरम संक्रमण ने बढ़ाई चिंता
राज्य के वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल पदाधिकारी डॉ. बी.के. सिंह ने बताया कि मलेरिया और डेंगू के मामले बढ़े हैं, लेकिन विभाग लगातार निगरानी और नियंत्रण अभियान चला रहा है। उन्होंने बताया कि सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि राज्य में मलेरिया के करीब 68.57 प्रतिशत मरीज प्लाज्मोडियम फेल्सीपेरम संक्रमण से ग्रसित हैं।
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जनवरी से जून के बीच मिले 16,728 मलेरिया मरीजों में 11,472 फेल्सीपेरम, 4,608 प्लाज्मोडियम विवैक्स तथा 648 मिश्रित संक्रमण के मामले मिले हैं। फेल्सीपेरम संक्रमण समय पर इलाज नहीं मिलने पर ब्रेन मलेरिया का कारण बन सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
रांची में बरतें विशेष सतर्कता
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि राजधानी रांची में लगातार हो रही बारिश, कई इलाकों में जलजमाव और मच्छरों की बढ़ती संख्या को देखते हुए डेंगू और मलेरिया का खतरा और बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों को घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए।
तेज बुखार, ठंड लगना, शरीर में दर्द या कंपकंपी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच करानी चाहिए। रिम्स के मेडिसिन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. संजय सिंह ने बताया कि झारखंड की भौगोलिक परिस्थितियां और वन क्षेत्र मलेरिया के लिए अनुकूल वातावरण बनाते हैं।
संक्रमित मच्छर के काटने के 10 से 15 दिन बाद तेज बुखार, ठंड लगना, कंपकंपी, अत्यधिक कमजोरी और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने पर विशेषकर फेल्सीपेरम संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
एक नजर में
1 जनवरी से 30 जून, 2026 के बीच झारखंड में मच्छरजनित बीमारियों के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। इस अवधि में राज्यभर में 16,728 मलेरिया के मामले सामने आए, जिनमें से 68.57 प्रतिशत मरीज प्लाज्मोडियम फेल्सीपेरम जैसे गंभीर संक्रमण से संक्रमित पाए गए।
मलेरिया का सबसे अधिक असर पूर्वी सिंहभूम (6,527 मामले) और पश्चिमी सिंहभूम (6,172 मामले) में दर्ज किया गया। वहीं डेंगू के 77 मरीज मिले, जिनमें रांची में सबसे अधिक 27 मामले सामने आए। इसके अलावा छह जिलों में जापानी इंसेफ्लाइटिस के 11 मामले भी दर्ज किए गए हैं।
बढ़ते संक्रमण को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने, घरों के आसपास पानी जमा नहीं होने देने और बुखार या अन्य लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराने की अपील की है।