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    7 लाख की साइकिल से 17 लाख वालों को टक्कर, इक्विपमेंट की कमी से टूट रहा झारखंड के खिलाड़ियों का सपना

    Updated: Wed, 20 May 2026 10:54 AM (IST)

    झारखंड के साइकिलिस्टों ने संसाधनों की कमी के बावजूद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुल 34 पदक जीते हैं। ...और पढ़ें

    7 लाख की साइकिल से 17 लाख वालों को टक्कर

    7 लाख की साइकिल से 17 लाख वालों को टक्कर

    HighLights

    1. झारखंड के साइकिलिस्टों ने 34 राष्ट्रीय पदक जीते।

    2. लड़कियों ने सर्वाधिक 9 स्वर्ण पदक हासिल किए।

    3. महंगे उपकरणों की कमी अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन में बाधा।

    दिवाकर सिंह, रांची। झारखंड में खेल प्रतिभा की कमी नहीं है यहां के खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत के दम पर पूरे राज्य की पहचान राष्ट्रीय नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाई है। संसाधनों की कमी है अभ्यास के लिए पर्याप्त सामान नहीं है, इसके बावजूद हमारे झारखंड के खिलाड़ी देश के किसी भी राज्य से पीछे नहीं है। 

    साइकिलिंग की बात करें तो यहां के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते हैं। पिछले एक वर्ष में यहां के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर कुल 34 पदक अपने नाम किये हैं। जिसमें स्वर्ण 11, रजत 14 और नौ कांस्य पदक शामिल है। 

    लड़कियों ने सबसे अधिक नौ स्वर्ण पदक जीते 

    इसमें सबसे अधिक लड़कियों ने नौ स्वर्ण पदक जीते हैं, जबकि इस मामले में लड़के पीछे हैं इन्होंने तीन स्वर्ण पदक इस वर्ष अपने नाम किया है। इसमें सरिता कुमारी, नारायण महतो, विकास उरांव, सबीना कुमारी, आमिर रियाज, निकिता सोरेन सहित अन्य शामिल हैं।

    जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लड़कों ने दो और लड़कियों ने एक स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। हालांकि ये आकंड़ा भी बढ सकता था, लेकिन महंगे इक्यूपमेंट की कमी के कारण वे इसमें पीछे रह जाते हैं।

    एक साल में झारखंड के खिलाड़ियों ने जीते हैं 34 पदक

    झारखंड के साइकिलिंग के खिलाड़ियों ने पिछले एक वर्ष 2025-26 में अब तक राष्ट्रीय स्तर पर कुल 34 पदक अपने नाम कर चुके हैं। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारे खिलाड़ियों ने कुल 13 पदक जीते हैं। 

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    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर (एशियन साइकिलिंग चैंपियनशिप) में तीन स्वर्ण और पांच कांस्य पदक जीता है। इसमें लड़कों ने दो स्वर्ण पदक और लड़कियों ने एक स्वर्ण पदक जीता है। 

    वहीं लड़कों ने तीन कांस्य पदक और लड़कियों ने दो कांस्य पदक जीता है।राष्ट्रीय स्तर पर लड़कियों ने कुल 15 पदक अपने नाम किया है वहीं लड़कियों ने कुल 19 पदक अब तक जीता है।

    इक्विपमेंट की कमी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो जाते हैं पीछे

    राष्ट्रीय स्तर पर तो हमारे खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पिछड़ जाते हैं। वजह है बेहतर इक्विपमेंट की कमी। इसके नहीं होने के कारण हमारे खिलाड़ी विदेशी खिलाड़ियों का मुकाबला नहीं कर पाते हैं। 

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    हमारे झारखंड के खिलाड़ी जहां सात लाख की साइकिल के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेते हैं, वहीं विदेशी खिलाड़ी 17 लाख की साइकिल से इस प्रतियोगिता में शामिल होते हैं।

    सुविधा नहीं मिली तो कई खिलाड़ी रह गये पीछे

    सरिता को नई साइकिल मिली तो उसमें एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण जीता।लेकिन 2026 में ही झारखंड की निकिता सोरेन भी एशियन चैंपियनशिप में खेलने गयी थी। लेकिन पुराने साइकिल की वजह से इस खिलाड़ी को चौथा स्थान हासिल हुआ। 

    विकास उरांव व सबीना कुमारी भी अपने पुराने साइकिल के कारण ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेलों में पीछे रह जाते हैं।

    सरिता को मिली महंगी साइकिल, तो जीता स्वर्ण

    झारखंड के लोहरदगा की रहने वाली सरिता कुमार के पिता राजमिस्त्री का काम करते हैं, मुश्किलों से लड़कर और चुनौतियों का सामना करके सरिता ने राष्ट्रीय स्तर पर जीता। 

    इसकी प्रतिभा को देखते हुए झारखंड सरकार ने इसी वर्ष उसे साइकिल के लिए 17 लाख रुपये दिये और इस खिलाड़ी ने साइकिल खरीदी। इस नयी साइकिल के बदौलत सरिता कुमारी ने 2026 में एशियन साइकिलिंग चैंपियनशिप में देश के लिए स्वर्ण पदक जीता।

    क्या है साइकिलिंग इक्विपमेंट की कीमत

    • साइकिल- 7 लाख से 17 लाख तक
    • हेलमेट-60 हजार से 1.50 लाख तक
    • जूता-80 हजार से 2.50 तक

    यहां के खिलाड़ियों के पास सुविधाओं की कमी है। जिसके कारण हमारे खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पीछे रह जाते हैं। सबसे बड़ी समस्या होती है बेहतर साइकिल की। जब विदेशी खिलाड़ी 17 लाख की साइकिल चलायेंगे तो हमारे खिलाड़ी सात लाख की साइकिल से उनका मुकाबला कैसे कर पायेंगे। हमारे खिलाड़ियों को भी अगर बेहतर साइकिल मिले तो वो भी कमाल दिखा सकते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर हमारे खिलाड़ी अभी भी किसी से पीछे नहीं है। लड़कों से अधिक लड़कियों ने इस वर्ष पदक जीते हैं।- शैलेंद्र कुमार पाठक, महासचिव, झारखंड साइकिलिंग एसोसिएशन