1 दिन की सर्विस बाकी रहते DGP बनीं तदाशा मिश्रा, झारखंड सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में उठे सवाल
एमिकस क्यूरी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि झारखंड डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति शीर्ष अदालत के निर्देशों का ...और पढ़ें

झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा।
HighLights
झारखंड डीजीपी नियुक्ति पर एमिकस क्यूरी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया उल्लंघन।
तदाशा मिश्रा को रिटायरमेंट से एक दिन पहले डीजीपी नियुक्त किया गया।
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार डीजीपी पद हेतु छह माह की सेवा शेष अनिवार्य।
एजेंसी, नई दिल्ली/रांची। सुप्रीम कोर्ट को एमीकस क्यूरी ने बताया है कि झारखंड सरकार द्वारा रिटायरमेंट से सिर्फ एक दिन पहले तदाशा मिश्रा को 30 दिसंबर, 2025 को डीजीपी के रूप में नियुक्त करना, शीर्ष अदालत के उस निर्देश का उल्लंघन है जिसमें कहा गया है कि किसी अधिकारी के पास पद ग्रहण करने के समय कम से कम छह महीने की शेष सेवा होनी चाहिए।
वरिष्ठ अधिवक्ता और एमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन, जो भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में डीजीपी नियुक्तियों से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के उल्लंघन के मामलों की सुनवाई में सहायता कर रहे हैं, ने एक आदेश के अनुपालन में यह नोट दाखिल किया है।
रामचंद्रन ने बेंच के समक्ष प्रस्तुत नोट में कहा, "वर्तमान डीजीपी की नियुक्ति उनके रिटायरमेंट से एक दिन पहले स्पष्ट रूप से प्रकाश सिंह-I, II, और III के निर्णयों और आदेशों में निर्धारित सिद्धांतों का पूर्ण उल्लंघन है।"
बेंच में जस्टिस जायमाल्या बागची भी शामिल थे। 18 अगस्त को बेंच ने एमिकस क्यूरी से अनुरोध किया कि वे पूर्व झारखंड मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी द्वारा दायर एक याचिका के जवाब में अपना नोट प्रस्तुत करें, जिसमें उन्होंने राज्य सरकार के संशोधित नियमों को सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का उल्लंघन बताया था।
मरांडी का प्रतिनिधित्व अधिवक्ताओं अभिषेक राय और ज्ञानंत सिंह ने किया। 1994 बैच की झारखंड कैडर की आइपीएस अधिकारी हैं तदाशा मिश्रा को 30 दिसंबर 2025 को राज्य का डीजीपी नियुक्त किया गया, जो उनके रिटायरमेंट से एक दिन पहले है, यह नियुक्ति हेमंत सोरेन सरकार द्वारा की गई थी।
एमिकस ने नोट में कहा कि राज्य के विवादित नियमों के कई प्रविधान सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक प्रकाश सिंह निर्णयों की भावना का उल्लंघन नहीं करते, कुछ प्रविधानों को स्पष्टता और सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है ताकि मनमानी और राजनीतिक हस्तक्षेप से बचा जा सके।
प्रकाश सिंह के ऐतिहासिक निर्णयों के अनुसार, किसी अधिकारी को डीजीपी के पद के लिए विचारित करने के लिए कम से कम छह महीने की शेष सेवा होनी चाहिए, ताकि स्थिरता और योग्यता सुनिश्चित की जा सके।
मिश्रा को उनके रिटायरमेंट से 24 घंटे पहले डीजीपी नियुक्त करके, राज्य ने प्रभावी रूप से उन्हें दो साल का विस्तार दिया।
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