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    घर की रसोई से स्पेस तक, ऐसे बदल रही युवाओं की किस्मत; मिलिए झारखंड के डिजिटल स्टार्स से

    Updated: Mon, 29 Jun 2026 08:00 PM (IST)

    झारखंड के कंटेंट क्रिएटर्स डिजिटल दुनिया में अपनी धाक जमा रहे हैं, आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रहे हैं। मनोज दे, ब्रिष्टी होम किचन और अंतरिक्ष टीव ...और पढ़ें

    झारखंड के डिजिटल सितारे: कंटेंट क्रिएशन से बदल रही युवाओं की तकदीर। (विजुअल: एआई जनेरेटेड)

    झारखंड के डिजिटल सितारे: कंटेंट क्रिएशन से बदल रही युवाओं की तकदीर। (विजुअल: एआई जनेरेटेड)

    HighLights

    1. झारखंडी क्रिएटर्स डिजिटल दुनिया में बना रहे पहचान।

    2. मनोज डे, ब्रिष्टी होम किचन जैसे नाम मशहूर।

    3. आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक पहचान को मिल रहा बढ़ावा।

    डिजिटल डेस्क, रांची। झारखंड की मिट्टी से निकले कंटेंट क्रिएटर्स ने डिजिटल दुनिया में अपनी धाक जमा दी है। आज झारखंड के युवा और महिलाएं न सिर्फ अपनी मेहनत से लाखों-करोड़ों दिलों को जीत रहे हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई मिसाल भी पेश कर रहे हैं। धनबाद की गलियों से लेकर जमशेदपुर के साइंस लैब तक, झारखंडी प्रतिभा का डंका अब पूरे देश में बज रहा है।

    जमशेदपुर की यूट्यबर स्नेहा प्रिया बताती हैं, धनबाद के टूंडी ब्लॉक के राजगंज से निकल ब्रिष्टी गुप्ता ने शाकाहारी डिशेज से देशभर में पहचान बनाई है। ब्रिष्टी ने भी पहले साधारण मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू किया था। आज प्रोफेशनल ढंग से क्वालिटी में वीडियोज बनाती हैं। परिवार का भी सहयोग मिलता है। स्नेहा रिश्ते में बृष्टि की भाभी लगती है। 

    स्नेहा भी 'रूना रसोई' नाम से कुकिंग चैनल चलाती है। इसी तरह कोयलांचल के मनोड दे, आर्यन केल्विन के वीडियोज पर भी मिनट में लाखों व्यूज आ जाते हैं। धनबाद से ही देश दीपक त्रिपाठी के ट्रेवलॉग भी 'द डीडीटी शो' नाम से हिट हैं। पर्यटन पर देश दीपक रोचक वीडियोज डालते हैंझारखंड से कई नाम प्रमुखता से उभरकर सामने आए हैं। 

    इन क्रिएटर्स ने बदली अपनी तकदीर

    • मनोज दे (धनबाद): टेक और यूट्यूब टिप्स के किंग माने जाने वाले मनोज देय के करीब 7.68 मिलियन सब्सक्राइबर्स हैं। एक छोटे से कस्बे से निकलकर उन्होंने साबित किया है कि तकनीकी जानकारी के दम पर ग्लोबल पहचान कैसे बनाई जाती है।
    • ब्रिष्टी होम किचन (धनबाद): ब्रिष्टी गुप्ता की कहानी लाखों गृहिणियों के लिए प्रेरणा है। घर की साधारण रसोई से शुरू करके, उन्होंने धूस्का, घुगनी और सत्तू जैसे पारंपरिक झारखंडी व्यंजनों को नेशनल पहचान दिलाई है। उनके चैनल पर 7.57 मिलियन+ सब्सक्राइबर्स हैं।
    • अंतरिक्ष टीवी (जमशेदपुर): कौशिक भट्टाचार्जी ने जटिल वैज्ञानिक विषयों और एस्ट्रोनॉमी को हिंदी में इतना सरल बना दिया है कि आज उनके 5.3 मिलियन+ फॉलोअर्स हैं।
    • आर्यन केल्विन: कॉमेडी और रियल-लाइफ कंटेंट के जरिए पहचान बना चुके हैं। 
    • सुरज रोक्स: सुरज (रांची) जैसे क्रिएटर्स सोशल मीडिया पर लगातार अपनी जगह मजबूत कर रहे हैं।

    क्यों खास है यह बदलाव?

    डिजिटल इकोनॉमी का सबसे बड़ा असर झारखंड की स्थानीय संस्कृति और खान-पान पर पड़ रहा है। जो व्यंजन पहले केवल घरों तक सीमित थे, वे अब करोड़ों लोगों की स्क्रीन पर पहुंच गए हैं।

    खबरें और भी

    1. आत्मनिर्भरता: पारंपरिक नौकरियों के सीमित विकल्पों के बीच, यूट्यूब ने युवाओं को एक सुरक्षित और स्वतंत्र आय का जरिया दिया है।
    2. सांस्कृतिक पहचान: स्थानीय बोलियां, खान-पान और जीवनशैली को ग्लोबल ऑडियंस मिल रही है।
    3. सरकारी पहल: राज्य सरकार की 'स्टेट लेवल इन्फ्लुएंसर्स मीट' जैसी पहल ने इन क्रिएटर्स को एक प्लेटफार्म देने की कोशिश की है।

    brishti family

    (राजगंज की ब्रिष्टी अपनी फैमिली के साथ। तस्वीर सौजन्य: एफबी)

    डिजिटल सक्सेस का मंत्र

    झारखंड के इन क्रिएटर्स की सफलता का एक ही सूत्र है, 'अपनी जड़ों से जुड़ाव'। चाहे वह ब्रिष्टी के हाथ का खाना हो या सुरज की देहाती कॉमेडी, इनकी सफलता का सबसे बड़ा कारण यह है कि ये लोग अपनी कहानी को बिना किसी बनावट के सीधे दर्शकों के सामने रखते हैं।