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    नीलामी से खरीदी गई संपत्ति के नए खरीदार से बकाया बिजली बिल नहीं ले सकते: झारखंड हाई कोर्ट

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 07:49 PM (GMT+05:30)

    हाई कोर्ट ने नीलामी से खरीदी गई संपत्ति के नए खरीदार को पूर्व उपभोक्ता के बिजली बिल बकाए का भुगतान करने के लिए बाध्य करने से इनकार किया। अदालत ने डीवी ...और पढ़ें

    अदालत ने डीवीसी की ओर से बकाए राशि की मांग को किया निरस्त।

    अदालत ने डीवीसी की ओर से बकाए राशि की मांग को किया निरस्त।

    HighLights

    1. नीलामी संपत्ति के नए खरीदार से बकाया बिजली बिल नहीं।

    2. झारखंड हाई कोर्ट ने डीवीसी की मांग को अवैध ठहराया।

    3. मंगलम स्टील को पूर्व उपभोक्ता के बकाए से मुक्ति मिली।

    राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि नीलामी के माध्यम से संपत्ति खरीदने वाले नए खरीदार को पूर्व उपभोक्ता के बिजली बकाए का भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

    अदालत ने दामोदर वैली कारपोरेशन (डीवीसी) की ओर से मंगलम स्टील से पूर्व उपभोक्ता के बकाए के रूप में करीब 4.92 करोड़ रुपये और बाद में निर्धारित टैरिफ के आधार पर 1.34 करोड़ रुपये की मांग को अवैध ठहराते हुए संबंधित मांग पत्रों को निरस्त कर दिया।

    मामला मंगलम स्टील द्वारा पंजाब नेशनल बैंक की ई-नीलामी में मेसर्स श्री हनुमान एलायज प्राइवेट लिमिटेड की संपत्ति खरीदने से जुड़ा है। संपत्ति खरीदने के बाद मंगलम स्टील ने नए बिजली कनेक्शन के लिए डीवीसी के समक्ष आवेदन किया था।

    डीवीसी ने नया कनेक्शन देने से पहले पूर्व उपभोक्ता के बकाए का भुगतान करने की शर्त रखी थी। इसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा। हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश के तहत कंपनी ने किस्तों में राशि जमा की थी, जिसके बाद उसे बिजली कनेक्शन दिया गया। हालांकि, यह व्यवस्था याचिका पर आने वाले अंतिम फैसले के अधीन थी।

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    अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले और झारखंड राज्य विद्युत विनियामक आयोग के बिजली आपूर्ति संहिता विनियम, 2015 के प्रविधानों पर विचार करते हुए कहा कि यदि नया खरीदार पूर्व उपभोक्ता से किसी भी तरह से जुड़ा नहीं है और उसने संपत्ति वैधानिक प्रक्रिया या नीलामी के माध्यम से हासिल की है, तो उससे पुराने उपभोक्ता के बिजली बकाए की वसूली नहीं की जा सकती।

    अदालत ने पाया कि मंगलम स्टील का पूर्व उपभोक्ता से कोई संबंध नहीं है और उसने बैंक की ई-नीलामी के माध्यम से संपत्ति खरीदी है। ऐसे में पूर्व उपभोक्ता की देनदारी नए खरीदार पर नहीं डाली जा सकती।

    हाई कोर्ट ने डीवीसी को दोनों मांग पत्र रद करने का निर्देश दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि पूर्व उपभोक्ता के बकाए की वसूली कानून के अनुसार उसी से की जा सकती है, न कि नीलामी में संपत्ति खरीदने वाले नए खरीदार से।

    अदालत ने अंतरिम आदेश के तहत मंगलम स्टील द्वारा जमा कराई गई राशि के संबंध में भी कानून के अनुसार उचित राहत देने का निर्देश दिया।