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    हाई कोर्ट ने JSSC को फटकारा, पूछा- माध्यमिक आचार्य परीक्षा में हैकिंग हुई तो FIR दर्ज क्यों नहीं की?

    Updated: Sat, 25 Apr 2026 12:42 PM (IST)

    Jharkhand High Court ने माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में 2,819 अभ्यर्थियों की पुनर्परीक्षा पर JSSC के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कंप्यू ...और पढ़ें

    हाई कोर्ट ने JSSC से पूछा, माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में हैकिंग पर FIR क्यों नहीं।

    हाई कोर्ट ने JSSC से पूछा, माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में हैकिंग पर FIR क्यों नहीं।

    HighLights

    1. हाई कोर्ट ने JSSC के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की।

    2. माध्यमिक आचार्य नियुक्ति पुनर्परीक्षा पर सवाल उठाए गए।

    3. हैकिंग पर प्राथमिकी दर्ज न होने पर जवाब मांगा।

    राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा से जुड़े एक मामले में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की है।

    अदालत ने आयोग से पूछा कि यदि कंप्यूटर हैकिंग या बाहरी हस्तक्षेप की आशंका थी तो संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उच्च स्तरीय जांच क्यों नहीं कराई गई? इस मामले मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।

    इस संबंध में अर्चना कुमारी एवं अन्य ने याचिका दाखिल की है। याचिका में जेएसएससी के 23 अप्रैल को जारी उस नोटिस को चुनौती दी गई है, जिसमें प्रार्थी सहित 2,819 अभ्यर्थियों को आठ मई को प्रस्तावित पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में शामिल होने का निर्देश दिया गया है।

    प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन ने अदालत को बताया कि आयोग की ओर से बिना परीक्षा केंद्र के अधिकृत व्यक्तियों की पहचान किए और बिना दोषी अभ्यर्थियों को चिह्नित किए सभी 2,819 अभ्यर्थियों को एक साथ पुनर्परीक्षा के लिए बाध्य करना अवैध है।

    यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के भी विरुद्ध है। अदालत को बताया गया कि प्रार्थी किसी भी प्रकार के अनुचित साधनों के इस्तेमाल में शामिल नहीं रहे हैं, फिर भी उन्हें दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में लाया जा रहा है।

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    आयोग को पहले कथित अनियमितताओं में शामिल परीक्षा केंद्र के जिम्मेदार व्यक्तियों और संबंधित अभ्यर्थियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, न कि सभी अभ्यर्थियों को समान रूप से परेशान करना चाहिए।

    अदालत ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग से पूछा कि आखिर इस मामले में दोबारा परीक्षा क्यों ली जा रही है? अदालत ने पूछा कि यदि कंप्यूटर हैकिंग या बाहरी हस्तक्षेप की आशंका थी तो संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उच्च स्तरीय जांच क्यों नहीं कराई गई? इस पर आयोग की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा सका।

    2,819 अभ्यर्थियों के सिस्टम में हैकिंग की संभावना

    आयोग की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल और प्रिंस कुमार सिंह ने बताया कि परीक्षा कंप्यूटर आधारित आनलाइन मोड में आयोजित की गई थी। परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की हैकिंग या बाहरी हस्तक्षेप का पता लगाने के लिए सिस्टम में विशेष चिप लगाई गई थी।

    आयोग ने बताया कि परीक्षा में कुल 25 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इनमें लगभग 2,819 अभ्यर्थियों के सिस्टम में बाहरी प्रभाव के संकेत मिले, जिसके कारण उनकी आंसर-की लाक कर दी गई।

    आयोग ने अभ्यर्थियों से ही पूछा, हैकिंग में उनकी संलिप्तता तो नहीं

    हैकिंग की आशंका के बाद आयोग ने संबंधित अभ्यर्थियों को नोटिस जारी कर पूछा गया कि क्या उनके कंप्यूटर सिस्टम में हैकिंग हुई थी अथवा उनकी कोई संलिप्तता थी। अभ्यर्थियों से शपथ पत्र भी मांगा गया।

    शपथ पत्र प्राप्त होने के बाद आयोग ने उन्हें दोबारा परीक्षा में शामिल होने के लिए नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ताओं ने इसी नोटिस को हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

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