टीजीटी शिक्षकों को समान वरीयता और अपग्रेड वेतनमान का लाभ दे सरकार: झारखंड हाई कोर्ट
झारखंड हाई कोर्ट ने टीजीटी शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने प्रशासनिक देरी से नियुक्त शिक्षकों को समान वरीयता, अपग्रेड वेतनमान और वेतन वृद्धि का ...और पढ़ें

प्रशासनिक देरी से नियुक्त शिक्षकों को मिलेगा समान लाभ।
HighLights
प्रशासनिक देरी से नियुक्त शिक्षकों को मिलेगा समान लाभ।
सरकार को 12 सप्ताह में लाभ देने का निर्देश।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) नियुक्ति मामले में नव नियुक्त शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि सरकार की प्रशासनिक लापरवाही का नुकसान अभ्यर्थियों को नहीं उठाना पड़ेगा।
अदालत ने प्रशासनिक कारणों से करीब तीन वर्ष की देरी से नियुक्त हुए शिक्षकों को उनके साथ चयनित अन्य अभ्यर्थियों के समान वरीयता, अपग्रेड वेतनमान और वेतन वृद्धि का लाभ देने का निर्देश दिया है।
अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह 12 सप्ताह में प्रार्थियों को समान वरीयता, अपग्रेड वेतनमान और वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ प्रदान करे। इस संबंध में अजय कुमार सहित अन्य की ओर से हाई कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई थी। प्रार्थी पलामू, गढ़वा, हजारीबाग, कोडरमा, बोकारो, चतरा, धनबाद और गिरिडीह सहित अन्य गैर अनुसूचित जिलों से संबंधित हैं।
मामले में प्रार्थियों का कहना था कि वह सभी उसी प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक नियुक्ति परीक्षा (विज्ञापन संख्या-21/2016) के माध्यम से चयनित हुए थे, जिससे अन्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति वर्ष 2019 में हुई थी। हालांकि, सरकार की प्रशासनिक देरी के कारण उन्हें वर्ष 2021 में नियुक्ति हुई।
ऐसे में उनकी वरिष्ठता प्रभावित हो गई और वे अपने ही बैच के शिक्षकों से कनीय हो गए। सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता सुमित गडोदिया और अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने अदालत को बताया कि नियुक्ति में हुई देरी के लिए अभ्यर्थी किसी भी तरह जिम्मेदार नहीं थे।
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इस मामले में किसी अदालत का स्थगन आदेश भी नहीं था, फिर भी प्रशासनिक कारणों से नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए गए। बाद में प्रार्थियों को नियुक्ति पत्र जारी कराने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करनी पड़ी, जिसके बाद वर्ष 2021 में उनकी नियुक्ति हुई।
अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि यदि इन शिक्षकों को वर्ष 2019 से वैकल्पिक (नोशनल) वरिष्ठता नहीं दी गई तो वे बिना किसी गलती के अपने ही बैच के शिक्षकों से हमेशा कनीय बने रहेंगे। उन्होंने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट के पूर्व निर्णयों का भी हवाला देते हुए समान वरिष्ठता और उससे जुड़े सभी सेवा लाभ देने का आग्रह किया।
राज्य सरकार ने प्रार्थियों की मांग का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने प्रार्थियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सरकार को 12 सप्ताह के भीतर समान वरीयता, अपग्रेड वेतनमान और वेतन वृद्धि का लाभ देने का निर्देश दिया है।