लोकायुक्त, सूचना आयुक्त जैसे संवैधानिक पदों पर 6 हफ्ते में हों नियुक्तियां, झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को लोकायुक्त सहित विभिन्न संवैधानिक पदों पर 6 सप्ताह के भीतर नियुक्तियां करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सरकार के आश ...और पढ़ें
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सरकार को 6 सप्ताह में लोकायुक्त नियुक्त करने का निर्देश।
HighLights
लोकायुक्त, मानवाधिकार आयोग जैसे पद होंगे भरे।
वकील महेश तिवारी ने कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आखिरकार समयसीमा दे दी है। लोकायुक्त, राज्य मानवाधिकार आयोग, सूचना आयोग सहित कई संवैधानिक संस्थाओं में वर्षों से खाली पड़े महत्वपूर्ण पदों पर सुनवाई हुई।
इन पदों नियुक्ति के मामले में सुनवाई के दौरान सरकार ने कोर्ट को बताया कि 6 सप्ताह के अंदर सभी नियुक्तियां पूरी कर ली जाएंगी।
अदालत ने सरकार की इस बात को रिकॉर्ड पर लेते हुए अगली सुनवाई 17 मार्च को तय कर दी है। अगर समयसीमा में नियुक्तियां नहीं हुईं तो कोर्ट सख्त रुख अपना सकता है।
यह मामला कई जनहित याचिकाओं से जुड़ा है, जिसमें राज्य में भ्रष्टाचार रोकने वाली संस्था लोकायुक्त के साथ अन्य संवैधानिक पदों के लंबे समय से खाली रहने पर सवाल उठाए गए थे। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी से अब सरकार पर दबाव बढ़ गया है।
जज से बहस करनेवाले वकील ने मांगी बिना शर्त माफी
झारखंड हाई कोर्ट में उस वायरल मामले की सुनवाई हुई, जिसमें वकील महेश तिवारी ने जस्टिस राजेश कुमार से तीखी नोकझोंक की थी।
याद रहे, महेश तिवारी ने कोर्ट में कहा था - "जज अपनी सीमा में रहें"। इस पर हाईकोर्ट की 5 जजों की पीठ ने स्वतः संज्ञान लेकर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू की थी।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां CJI की पीठ ने कड़ी टिप्पणी की और वकील को हाईकोर्ट में बिना शर्त माफी मांगने की सलाह दी।
आज झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान महेश तिवारी ने बिना शर्त माफी मांग ली। अदालत ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
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