बिहार की तर्ज पर झारखंड में भी सहकारिता पदाधिकारियों का बढ़ेगा ग्रेड पे, HC ने 4600 करने का दिया आदेश
झारखंड हाई कोर्ट ने सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों का ग्रेड पे 4200 से बढ़ाकर 4600 करने का निर्देश दिया है। ...और पढ़ें

HighLights
हाई कोर्ट ने ग्रेड पे 4200 से 4600 करने का निर्देश दिया।
बिहार के समान वेतनमान देने को कहा, भेदभावपूर्ण बताया।
राज्य सरकार को 8 सप्ताह में आदेश जारी करने का निर्देश।
राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों के ग्रेड पे में बढ़ोतरी की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई।
सुनवाई के बाद अदालत ने राज्य सरकार को उनका ग्रेड पे 4200 से बढ़ाकर 4600 करने का निर्देश दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि बिहार में समान पद पर कार्यरत अधिकारियों को उच्च वेतनमान मिलने के बाद भी झारखंड के कर्मचारियों को इससे वंचित रखना अनुचित और भेदभावपूर्ण है।
इस संबंध में सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों ने याचिका दाखिल की थी। प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन और सिद्धार्थ रंजन ने अदालत को बताया कि बिहार सरकार ने वर्ष 2017 में सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों का वेतनमान बढ़ाकर ग्रेड पे 4600 कर दिया था।
केंद्र सरकार ने भी पर्यवेक्षी एवं निरीक्षणीय संवर्ग के कर्मचारियों को इसी स्तर का वेतनमान प्रदान किया है, लेकिन झारखंड सरकार ने अब तक इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि सात में से पांच प्रार्थियों की नियुक्ति अविभाजित बिहार में हुई थी।
अदालत ने कहा कि यदि राज्य का विभाजन नहीं हुआ होता तो इन कर्मचारियों को भी वही लाभ मिलता जो वर्तमान में बिहार में कार्यरत अधिकारियों को मिल रहा है। ऐसे में केवल राज्य विभाजन के कारण उन्हें कम वेतनमान देना उचित नहीं है।
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कोर्ट ने यह भी कहा कि झारखंड सरकार पूर्व में पंचायत सचिवों के मामले में बिहार सरकार के निर्णय का अनुसरण कर चुकी है। ऐसे में सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों के मामले में अलग रुख अपनाना तर्कसंगत नहीं है।
अदालत ने राज्य सरकार के इस रवैये को अनुचित, अव्यवहारिक और नौकरशाही शक्ति के दुरुपयोग की श्रेणी में माना। कोर्ट ने राज्य सरकार को आठ सप्ताह के भीतर वेतनमान बढ़ाने संबंधी औपचारिक आदेश जारी करने, इसके बाद चार सप्ताह में सभी वित्तीय एवं अन्य लाभ कर्मचारियों को उपलब्ध कराने का निर्देश देते हुए याचिका निष्पादित कर दी।