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    झारखंड में भोजपुरी भाषा को लेकर विवाद जारी, पूर्व मंत्री ने कहा- पहले बिहार में संथाली को दिलाएं मान्यता 

    Updated: Sun, 17 May 2026 11:20 PM (IST)

    पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने झारखंड में भाषा विवाद पर कहा कि जो लोग विवाद खड़ा कर रहे हैं, उन्हें पहले बिहार में कुड़ुख और संथाली भाषाओं को मान्यता दिल ...और पढ़ें

    कांग्रेस नेता बंधु तिर्की। फाइल फोटो

    कांग्रेस नेता बंधु तिर्की। फाइल फोटो

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    राज्य ब्यूरो, रांची। पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि जो लोग भाषा के नाम पर विवाद खड़ा कर रहे हैं, उन्हें पहले बिहार में कुड़ुख और संथाली भाषा को मान्यता दिलाने की पहल करनी चाहिए। उनके अनुसार, परस्पर सामंजस्य और जमीनी वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए ही इस समस्या का स्थायी हल निकाला जा सकता है।

    उन्होंने कहा कि मतभिन्नता लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन कटुता और टकराव के आधार पर भाषा संबंधी मामलों का समाधान संभव नहीं है। रविवार को अपने आवास पर पत्रकारों से बात करते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि जिस भोजपुरी और अंगिका भाषा को बिहार में भी आधिकारिक स्तर पर वैसी मान्यता नहीं मिली है, उसे झारखंड में मान्यता दिलाने के नाम पर विवाद उत्पन्न करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

    बिहार में करना चाहिए प्रयास: बंधु 

    उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार के रोहतास, पूर्णिया और पश्चिमी चंपारण जैसे जिलों में उरांव जनजाति की बड़ी आबादी निवास करती है, जिनकी मातृभाषा कुड़ुख है।

    वहीं, पूर्णिया, कटिहार और मुंगेर समेत कई जिलों में संथाल समुदाय भी बड़ी संख्या में रहता है, लेकिन बिहार में अब तक कुड़ुख और संथाली भाषाओं को मान्यता नहीं दी गई है। ऐसे में बिहार में इन भाषाओं को शामिल कराने की पहल करनी चाहिए।

    पहले से है संतुलित व्यवस्था: बंधु

    बंधु तिर्की ने कहा कि उनके मंत्री काल में एक अप्रैल 2011 को जारी अधिसूचना संख्या-1632 में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संबंध में जो व्यवस्था दी गई थी, उससे बेहतर समाधान आज भी नहीं हो सकता।

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    उन्होंने बताया कि उस अधिसूचना को तैयार करने से पहले विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था, जिसमें जनजातीय भाषाओं के विद्वान और झारखंड की सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना को समझने वाले विशेषज्ञ शामिल थे।

    उन्होंने कहा कि कई सीमावर्ती जिलों में भोजपुरी, अंगिका और अन्य भाषाएं व्यापक रूप से बोली जाती हैं। वर्ष 2011 की अधिसूचना में इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए संतुलित व्यवस्था की गई थी।

    तिर्की ने कांग्रेस पर साधा निशाना

    तिर्की ने आरोप लगाया कि कुछ लोग सरकार पर दोषारोपण को ही अपनी जिम्मेदारी मान बैठे हैं और भाषा के नाम पर अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहे हैं।

    बता दें कि झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) में मगही और भोजपुरी को क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल कराने की मांग कई नेताओं द्वारा की गई, जिसके बाद विवाद शुरू हो गया है। 

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