झारखंड में परिसीमन के बाद विधान परिषद का गठन संभव, विधानसभा सीटें हो जाएंगी 120 से ज्यादा
झारखंड में परिसीमन के बाद विधानसभा सीटों की संख्या 120-125 तक पहुंचने पर विधान परिषद के गठन की संभावना है। वर्तमान में 81 सीटें हैं। यह कदम राजनीतिक स ...और पढ़ें

झारखंड में खुल सकेगी दो सदनों की राह, विधान परिषद गठन की संभावना।
HighLights
परिसीमन से विधानसभा सीटें 120-125 तक पहुंचने की उम्मीद।
सीटों की वृद्धि पर झारखंड में विधान परिषद का गठन संभव।
विधान परिषद राजनीतिक समायोजन और विधेयक समीक्षा का मंच।
प्रदीप सिंह, जागरण, रांची। झारखंड में परिसीमन को लेकर चल रही सुगबुगाहट के बीच राज्य की राजनीतिक और संस्थागत संरचना में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि परिसीमन के बाद विधानसभा सीटों की संख्या बढ़कर 120 से 125 के बीच पहुंचती है तो राज्य में विधान परिषद (लेजिस्लेटिव कौंसिल) के गठन का रास्ता भी खुल सकता है।
इसका सीधा मतलब होगा कि झारखंड में एक सदन की व्यवस्था की जगह दो सदन प्रणाली यानि विधानसभा के साथ-साथ विधान परिषद भी लागू हो सकती है। देश के छह राज्यों में पूर्व से दो सदन की व्यवस्था लागू है।
वर्तमान में झारखंड विधानसभा में 81 सीटें हैं, लेकिन जनसंख्या और भौगोलिक विस्तार के आधार पर परिसीमन के बाद इनकी संख्या लगभग दोगुनी होने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह संख्या 100 के पार जाती है तो संविधान के प्रविधानों के तहत राज्य विधान परिषद के गठन पर गंभीरता से विचार कर सकता है।
राजनीतिक समायोजन का नया मंच
विधान परिषद का गठन होने पर राजनीतिक दलों के लिए एक नया मंच तैयार होगा। ऐसे नेता, जो सीधे चुनाव नहीं जीत पाते लेकिन संगठन, रणनीति या सामाजिक प्रभाव के लिहाज से महत्वपूर्ण होते हैं, उन्हें परिषद के जरिए विधानमंडल में जगह दी जा सकती है।
इससे राजनीतिक संतुलन बनाने और गठबंधन समीकरणों को साधने में दलों को सहूलियत मिलेगी। इसके अलावा, परिषद को रीविजिंग हाउस यानी पुनरीक्षण सदन भी कहा जाता है, जहां विधानसभा से पारित विधेयकों की समीक्षा की जाती है।
इससे कानून निर्माण प्रक्रिया में एक अतिरिक्त स्तर की जांच और संतुलन जुड़ जाता है। झारखंड विधानसभा पहले भी दो बार सीटों की संख्या बढ़ाने की सिफारिश कर चुकी है।
लेकिन परिसीमन की प्रक्रिया लंबित रहने के कारण इस पर अंतिम निर्णय नहीं हो पाया। अब जब राष्ट्रीय स्तर पर परिसीमन की चर्चा तेज हो रही है तो झारखंड में भी यह मुद्दा जोर पकड़ सकता है।
देश में कहां-कहां है विधान परिषद
भारत में फिलहाल छह राज्यों में दो सदन के विधानमंडल की व्यवस्था है। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं। इन राज्यों में विधानसभा के साथ-साथ विधान परिषद भी कार्यरत है।
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विधान परिषद का गठन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 169 के तहत होता है, जिसके लिए संबंधित राज्य विधानसभा को विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजना होता है। अंतिम निर्णय संसद के माध्यम से लिया जाता है।
झारखंड में विधान परिषद का गठन केवल राजनीतिक आवश्यकता नहीं, बल्कि प्रशासनिक दृष्टि से भी उपयोगी हो सकता है। हालांकि, इसके साथ अतिरिक्त वित्तीय बोझ और संरचनात्मक जटिलताएं भी जुड़ी होंगी।
फिलहाल, सारी संभावनाएं परिसीमन की प्रक्रिया पर टिकी हैं। यदि सीटों में अपेक्षित वृद्धि होती है तो झारखंड की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर सकती है, जहां सत्ता, रणनीति और प्रतिनिधित्व के नए आयाम सामने आएंगे।
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