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    Jharkhand Liquor Scam: जब डिजिटल ट्रैकिंग हो रही थी, तब कैसे बिकी नकली होलोग्राम पर शराब

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 09:30 PM (IST)

    झारखंड शराब घोटाला मामले में एसीबी ने जेएसबीसीएल के आइटी मैनेजर अमर कुमार मेहता से पूछताछ की। उनसे नकली होलोग्राम पर शराब की बिक्री और ट्रैक एंड ट्रेस ...और पढ़ें

    शराब आपूर्ति की ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम की व्यवस्था को समझा, ली जानकारी।

    शराब आपूर्ति की ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम की व्यवस्था को समझा, ली जानकारी।

    HighLights

    1. एसीबी ने शराब घोटाले में आइटी मैनेजर मेहता से पूछताछ की।

    2. नकली होलोग्राम पर शराब बिक्री, ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम विफल।

    3. प्रिज्म होलोग्राफी ने नकली होलोग्राम दिए, उसी ने ट्रैकिंग भी की।

    राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य में शराब घोटाला मामले की जांच कर रही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के समन पर शुक्रवार को पूछताछ में शामिल होने के लिए झारखंड राज्य बेवरेजेज कारपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) के आइटी मैनेजर अमर कुमार मेहता एसीबी मुख्यालय पहुंचे थे।

    एसीबी ने उनसे नकली होलोग्राम पर शराब की आपूर्ति होने, बाटलिंग प्लांट से ग्राहक तक शराब की आपूर्ति की डिजिटल ट्रैकिंग, राज्य में ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम, इलेक्ट्रानिक दस्तावेज आदि से संबंधित बिंदुओं पर बिंदुवार जानकारी ली और उनका सत्यापन भी कराया।

    एसीबी ने यह जानना चाहा कि जब राज्य में ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम प्रभावी था, शराब की डिजिटल ट्रैकिंग हो रही थी, तब नकली होलोग्राम पर शराब की बिक्री कैसे हुई। एसीबी ने उनसे पूरी व्यवस्था को समझा और अब तक की छानबीन में राज्य में अवैध शराब की आपूर्ति रोकने संबंधित उठाए गए कदम की भी जानकारी ली।

    एसीबी के कई सवालों का आइजी मैनेजर ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। अब आइटी मैनेजर के जवाब के बाद एसीबी अब तक सामने आए तथ्यों के आधार पर अपनी जांच को आगे बढ़ाएगी।

    जिसने नकली होलोग्राम आपूर्ति की, उसी के साफ्टवेयर से ट्रैक होती थी शराब

    एसीबी की अब तक की छानबीन में यह सामने आया है कि उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के पूर्व प्रधान सचिव वरिष्ठ आइएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे के कार्यकाल में बिधु गुप्ता की कंपनी प्रिज्म होलोग्राफी के माध्यम से उत्पाद विभाग को होलोग्राम की आपूर्ति की जाती थी।

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    भारी संख्या में नकली होलोग्राम पर झारखंड में शराब की आपूर्ति की गई, जिससे राज्य सरकार को राजस्व का भारी नुकसान पहुंचा। जिस प्रिज्म होलोग्राफी को होलोग्राम आपूर्ति का ठेका मिला था, उसने न सिर्फ नकली होलोग्राम की आपूर्ति की, बल्कि उसके ही साफ्टवेयर से ट्रैक एंड ट्रेस भी किया जाता रहा।

    मतलब बाटलिंग प्लांट से ग्राहक तक जिस शराब की आपूर्ति हुई, उसकी ट्रैकिंग व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त थी, जिसे कोई पकड़ नहीं सका।

    होलोग्राम आपूर्ति करने वाली कंपनी प्रिज्म के निदेशक को भी जेल 

    एसीबी पूर्व में नकली होलोग्राम आपूर्ति करने वाली कंपनी मेसर्स प्रिज्म होलोग्राफी सिक्योरिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक विधु गुप्ता को गिरफ्तार कर जेल भेजी थी। वह रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में भी बंद था।

    करीब 90 दिनों से अधिक समय तक जेल में रहने के दौरान जेल का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें विधु गुप्ता अपने एक अन्य सहयोगी के साथ डांस करता दिखा था। बाद में एसीबी ने निर्धारित अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की और विधु गुप्ता को इसका लाभ मिला और उसे डिफाल्ट बेल मिल गया था।

    उसपर छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में भी संलिप्तता का आरोप लगा था। विधु गुप्ता के विरुद्ध ग्रेटर नोएडा के कासना थाने में भी फर्जीवाड़ा का एक मामला दर्ज हुआ था।

    हाल के दिनों में कई आरोपितों का बयान ले चुकी है एसीबी

    चार अगस्त व उसके बाद एसीबी कई आरोपितों का बयान ले चुकी है। इन आरोपितों में पूर्व आयुक्त उत्पाद सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी अमित प्रकाश, तत्कालीन संयुक्त आयुक्त उत्पाद गजेंद्र सिंह, पूर्व महाप्रबंधक वित्त सुधीर कुमार दास व नेक्सजेन साल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ अरुण कुमार सिंह शामिल हैं।

    जो एसीबी के समन के बावजूद पूछताछ में शामिल नहीं हुए, उनमें छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड के पूर्व प्रबंध निदेशक सह छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग के विशेष सचिव अरुण पति त्रिपाठी और मैनपावर आपूर्ति एजेंसी मेसर्स विजन हास्पिटालिटी प्राइवेट लिमिटेड के स्थानीय प्रतिनिधि श्यामजी शरण शामिल हैं।

    अब दस अगस्त के लिए भी एसीबी ने फ्लोरेंस हेल्थकेयर एंड रिसर्च सेंटर प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक जतिन सहाय, छत्तीसगढ़ की मैनपावर आपूर्ति एजेंसी ए-टू-जेड इंफ्रा सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक विकास अग्रवाल, मनोज तिवारी व अरुण गौर को समन किया है। इन्हें एसीबी ने पूर्व में भी समन किया था, लेकिन ये उपस्थित नहीं हो सके थे।