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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 04, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Lok Sabha Election: शहरों में मोदी का नाम, गांवों में हेमंत फैक्टर ने किया भाजपा का काम तमाम

    Updated: Tue, 04 Jun 2024 05:42 PM (IST)

    लोकसभा चुनाव 2024 के मतों की गणना हो चुकी है। इस साल झारखंड में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 9 सीटों में जीत मिली है। इससे पहले पिछली बार लोकसभा चुना ...और पढ़ें

    झारखंड में 9 सीटों पर जीत दर्ज कर पाई भाजपा
    झारखंड में 9 सीटों पर जीत दर्ज कर पाई भाजपा

    HighLights

    1. प्रदेश भाजपा के नेताओं ने लोकसभा चुनाव के लिए जमीनी स्थिति के आकलन में की चूक
    2. जिन नेताओं ने कभी नहीं लड़ा चुनाव उनमें से ज्यादातर को बनाया लोकसभा प्रभारी

    राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड की 14 लोकसभा सीटों में से भारतीय जनता पार्टी को मात्र नौ सीटों पर ही जीत मिली। पिछली बार भाजपा ने 12 सीटें जीती थी। आदिवासी के लिए सुरक्षित पांच लोकसभा सीटों पर भाजपा चुनाव हार गई। दुमका और चाईबासा में दूसरे दलों से आईं सीता सोरेन और गीता कोड़ा भी भाजपा को जीत नहीं दिला सकीं। जीत-हार के समीकरण की बात करें तो प्रदेश भाजपा के नेता पूरी तरह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम पर निर्भर थे।

    ईडी द्वारा गिरफ्तार किए गए पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मुद्दे को झामुमो और कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ इस्तेमाल कर लिया। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर प्रदेश भाजपा के नेता झामुमो को जवाब नहीं दे सके। इसका खामियाजा पांच आदिवासी सुरक्षित सीटों पर हार के रूप में मिली।

    प्रदेश स्तर से चुनाव संचालन करने वाले नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं के स्तर पर संवाद में भी कमी रही। इसका खामियाजा भी उठाना पड़ा। ज्यादातर लोकसभा क्षेत्र में भाजपा ने जिन्हें चुनाव प्रभारी बनाया वो ऐसे लोग थे, जिन्होंने अपने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा है। शहरों में तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम काम कर गया लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में भाजपा झामुमो-कांग्रेस के आदिवासी और मुस्लिम समीकरण का काट नहीं तलाश पाई।

    कुड़मी समुदाय को साधने में भी रहे असफल

    अपने सहयोगी आजसू की वजह से भाजपा कुड़मी समुदाय के वोट पर दावेदारी करती रही है। लेकिन चाईबासा और खूंटी सीट पर भाजपा प्रत्याशियों की बड़े अंतर से हार इस बात का संकेत है कि आदिवासी समेत कुड़मी समुदाय ने भी बेरुखी दिखाई।

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    इसी तरह गिरिडीह सीट पर भी जयराम महतो ने 2 लाख से ज्यादा वोट लाया। रांची में भी जयराम के समर्थन से लड़े देवेंद्र महतो को एक लाख के करीब वोट आए। रांची लोकसभा के ईचागढ़ और सिल्ली विधानसभा में भी देवेंद्र महतो को बड़ी संख्या में वोट मिले।

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