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    पूर्वी सिंहभूम में ब्रेन मलेरिया से 4 बच्चों की मौत, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट; झारखंड के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश

    Updated: Thu, 02 Jul 2026 09:58 AM (IST)

    पूर्वी सिंहभूम के पोटका में ब्रेन मलेरिया से चार बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। अपर मुख्य सचिव ने सभी उपायुक्तों को निगरानी बढ़ ...और पढ़ें

    जहां बुखार के अधिक मरीज मिले, वहां सर्वेक्षण कराने का अपर मुख्य सचिव ने दिया आदेश, डीसी को निर्देश।

    जहां बुखार के अधिक मरीज मिले, वहां सर्वेक्षण कराने का अपर मुख्य सचिव ने दिया आदेश, डीसी को निर्देश।

    HighLights

    1. पूर्वी सिंहभूम के पोटका में ब्रेन मलेरिया से चार बच्चों की मौत।

    2. स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ाने, व्यापक कार्रवाई के दिए निर्देश।

    3. बुखार के अधिक मरीजों वाले क्षेत्रों में सक्रिय सर्वेक्षण होगा।

    राज्य ब्यूरो, रांची। पूर्वी सिंहभूम के पोटका में ब्रेन मलेरिया से चार बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हाे गया है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने सभी उपायुक्तों को पत्र लिखकर अपने-अपने जिलों में निगरानी बढ़ाने तथा मलेरिया की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए तत्काल प्रभाव से व्यापक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

    इसकी प्रति सभी सिविल सर्जनों को भी देते हुए निर्देशों का सख्ती से अनुपालन करने को कहा है। अपर मुख्य सचिव ने उपायुक्तों से कहा है कि जिन क्षेत्रों में मलेरिया के मामले सामने आ रहे हैं, वहां युद्ध स्तर पर कार्य योजना बनाकर निगरानी बढ़ाई जाए तथा प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही तय की जाए, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

    यह भी कहा है कि जिन क्षेत्रों में बुखार के मरीज अधिक मिल रहे हैं, वहां बहुद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (एमपीडब्ल्यू) एवं सहिया के माध्यम से सक्रिय सर्वेक्षण (एक्टिव सर्वे) कराया जाए। मलेरिया की आशंका वाले प्रत्येक मरीज की तत्काल जांच कर पाजिटिव पाए जाने पर बिना विलंब मलेरिया रोधी दवाओं से उपचार शुरू करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

    अपर मुख्य सचिव ने गंभीर मरीजों के लिए विशेष व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए हैं। सभी रोगियों के उपचार और फालो-अप की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा गंभीर स्थिति वाले मरीजों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कर आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

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    सभी उपायुक्तों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में जांच सामग्री और मलेरिया रोधी दवाओं का भंडारण उपलब्ध रहे। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में वेक्टर नियंत्रण के तहत कीटनाशी दवाओं का छिड़काव तथा लार्वा नियंत्रण संबंधी गतिविधियों में तेजी लाई जाए।

    मलेरिया से बचाव के लिए प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि लोग समय पर जांच कराएं और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं।

    मलेरिया केस मिलने पर मास सर्वे के निर्देश

    उपायुक्तों को जारी निर्देश में कहा गया है कि किसी भी क्षेत्र में मलेरिया का एक भी नया मामला मिलने पर पूरे इलाके में अनिवार्य रूप से मास सर्वे अथवा फीवर सर्वे चलाया जाए। प्रत्येक गांव का ग्राम वार मलेरिया डेटा तैयार किया जाएगा।

    अधिक प्रभावित गांवों में सहिया रैपिड टेस्ट किट से करेंगी जांच

    मलेरिया से अधिक प्रभावित गांवों में सहियाओं को रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट किट एवं आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सहिया इस किट से लोगों की जांच करेंगी।

    निगरानी के लिए त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था

    मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रमों की प्रभावी निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग ने त्रिस्तरीय समीक्षा व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी प्रत्येक सप्ताह समीक्षा बैठक करेंगे और उसकी रिपोर्ट जिला वेक्टर जनित रोग (वीबीडी) कार्यालय को भेजेंगे।

    सिविल सर्जन प्रत्येक 15 दिन पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर रिपोर्ट राज्य वीबीडी कार्यालय को उपलब्ध कराएंगे। प्रत्येक माह उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला स्तरीय उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित होगी, जिसमें सिविल सर्जन एवं जिला वेक्टर जनित रोग पदाधिकारी मलेरिया नियंत्रण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेंगे।