झारखंड में अब नियुक्ति के बाद 12 महीने की ट्रेनिंग अनिवार्य, विश्वविद्यालय शिक्षकों और कर्मियों के लिए सरकार का नया नियम लागू
झारखंड में विश्वविद्यालय शिक्षकों और कर्मियों के लिए 12 महीने का प्रशिक्षण अनिवार्य होगा। यह प्रशिक्षण नवगठित झारखंड स्टेट फैकल्टी डवलपमेंट एकेडमी में ...और पढ़ें

झारखंड विश्वविद्यालय: शिक्षकों और कर्मियों के लिए 12 माह का अनिवार्य प्रशिक्षण। (विजुअल: एआई जेनरेटेट)
HighLights
शिक्षकों, कर्मियों के लिए 12 माह का प्रशिक्षण अनिवार्य।
झारखंड स्टेट फैकल्टी डवलपमेंट एकेडमी में मिलेगा प्रशिक्षण।
झारखंड विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 में नए प्रावधान।
राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य के सभी विश्वविद्यालयों व अंगीभूत कालेजों में नियुक्त होनेवाले शिक्षकों के लिए 12 माह का प्रशिक्षण अनिवार्य होगा। इतना ही नहीं, यह प्रशिक्षण की अनिवार्यता शिक्षकेत्तर कर्मियों पर भी लागू होगी।
शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों की नियुक्ति के साथ ही उन्हें यह अनिवार्य प्रशिक्षण नवगठित झारखंड स्टेट फैकल्टी डवलपमेंट एकेडमी में दिया जाएगा। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग इसका माड्यूल तैयार कर रहा है।
राज्य सरकार द्वारा पिछले दिनाें लागू झारखंड विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 में जहां विश्वविद्यालयों एवं कालेजों में शिक्षकों व कर्मियों की नियुक्ति के लिए झारखंड विश्वविद्यालय सेवा आयोग के गठन का प्रविधान किया है, वहीं इनके प्रशिक्षण को लेकर भी नियम तय किए गए हैं।
इसमें 12 माह के अनिवार्य प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। इसके लिए अलग से परिनियम भी तैयार किए जाएंगे। अभी तक विश्वविद्यालय एवं कालेजों में शिक्षकों की नियुक्ति झारखंड लाेक सेवा आयोग से होती थी, जबकि तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियुक्ति विश्वविद्यालय स्तर पर होती थी। नए अधिनियम में इस प्रक्रिया में व्यापक बदलाव किया गया है।
इसमें यह भी प्रविधान किया गया है कि विश्वविद्यालयों और अंगीभूत कालेजों में पदों का सृजन राज्य सरकार करेगी, लेकिन संबद्ध कालेजों को पद सृजन की स्वतंत्रता होगी। इसे लेकर भी विभाग द्वारा अलग से परिनियम तैयार किए जाएंगे।
अधिनियम में यह भी प्रविधान किया गया है कि विश्वविद्यालयों व कालेजों में शिक्षकों की नियुक्ति पदों की रिक्तता के अनुसार प्रत्येक वर्ष जनवरी से जुलाई के बीच की जाएगी, जबकि शिक्षकेत्तर कर्मियों की नियुक्ति जुलाई से दिसंबर के बीच होगी।
शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के पद सृजन से लेकर नियुक्ति के लिए आवश्यक कार्रवाई की जिम्मेदारी विश्वविद्यालयों के निदेशक, मानव संसाधन की होगी।
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