यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 12, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Jharkhand News: कमलेश सिंह के मामले की आज से शुरू होगी सुनवाई, NCP से बगावत कर अजित पवार के खेमे में हुए थे शामिल
गृह राज्य महाराष्ट्र के बाद एनसीपी नेता शरद पवार को झारखंड में उस समय झटका लगा जब राज्य से एनसीपी के एकमात्र विधायक कमलेश कुमार सिंह ने उनका साथ छोड़ ...और पढ़ें

HighLights
- विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो के न्यायाधिकरण में होगी सुनवाई।
- कमलेश सिंह पर पार्टी लाइन से हटकर चलने का आरोप।
राज्य ब्यूरो, रांची। राष्ट्रीय स्तर पर एनसीपी में बगावत का असर झारखंड पर भी पड़ा है। एनसीपी के हुसैनाबाद से विधायक कमलेश कुमार सिंह शरद पवार का दामन छोड़कर उनके भतीजे अजीत पवार के धड़े में शामिल हो गए हैं। इसके कारण उनके विरुद्ध झारखंड विधानसभा में संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल की शिकायत की गई है। गुरुवार को स्पीकर न्यायाधिकरण में इस पर सुनवाई आरंभ होगी।
संविधान की 10वीं अनुसूची के आधार पर होगी सुनवाई
इससे पूर्व विधानसभा सचिवालय ने कमलेश कुमार सिंह के खिलाफ मिली शिकायत के आधार पर उनसे पक्ष मांगा था, जिसमें उन्होंने स्थिति स्पष्ट कर दिया था।
न्यायाधिकरण की तरफ से विधायक कमलेश कुमार सिंह को निर्देशित किया गया है कि वह पहली सुनवाई में खुद या अपने वकील के माध्यम से उपस्थित होकर जवाब दें। स्पीकर संविधान की 10वीं अनुसूची के आधार पर दल-बदल के इस मामले की सुनवाई करेंगे।
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कमलेश पर पार्टी लाइन से इतर काम करने का आरोप
एनसीपी में बड़े पैमाने पर टूट के बाद शरद पवार गुट के विधायक जितेंद्र अवहद ने कमलेश कुमार सिंह के खिलाफ दल-बदल का मामला चलाने का आवेदन झारखंड विधानसभा सचिवालय को दिया था।
स्पीकर को भेजे पत्र में विधायक ने कहा था कि कमलेश कुमार सिंह पार्टी लाइन से अलग हटकर काम कर रहे हैं।
कमलेश सिंह अजीत पवार के साथ
शरद पवार गुट जहां भाजपा विरोधी गठबंधन के साथ हैं, वहीं उनके भतीजे अजीत पवार एनडीए का साथ दे रहे हैं। एनसीपी के चुनाव चिह्न घड़ी पर दोनों ही गुट का दावा है।
कमलेश कुमार सिंह के खिलाफ शिकायत के बाद अजीत पवार गुट की तरफ से झारखंड विधानसभा को पत्र भेज कर कहा गया था कि झारखंड में उनके विधायक के खिलाफ दल-बदल का मामला नहीं चल सकता है।
यह मामला चुनाव फिलहाल चुनाव आयोग के पास है। ऐसे में इनके खिलाफ कोई मामला ही नहीं बनता है।
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