सब इंस्पेक्टर प्रोन्नति और एसीबी जांच में देरी पर झारखंड हाई कोर्ट सख्त, गृह विभाग को निर्देश
झारखंड हाई कोर्ट ने सब इंस्पेक्टर प्रोन्नति मामले में गृह विभाग को सीमित परीक्षा से प्रोन्नत हुए लोगों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। साथ ही, ...और पढ़ें

अदालत ने गृह विभाग को दिया निर्देश।
HighLights
सब इंस्पेक्टर प्रोन्नति पर हाई कोर्ट ने दिया नोटिस।
एसीबी की लंबित जांचों पर सरकार से मांगी रिपोर्ट।
कई जांचें 11 साल से अधिक समय से हैं लंबित।
राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में झारखंड पुलिस सेवा में सब इंस्पेक्टर पद पर प्रोन्नति के बाद बने वरीयता सूची को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई।
सुनवाई के बाद अदालत ने राज्य के गृह सचिव को निर्देश दिया कि सीमित परीक्षा के माध्यम से सब इंस्पेक्टर पद पर प्रोन्नति पाए लोगों के लिए विभागीय नोटिस निकालकर इसकी जानकारी दें, ताकि अगर वह इस केस में पक्ष रखना चाहते हैं तो वह रख सकते हैं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई दो सितंबर निर्धारित की है।
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने पक्ष रखा। वर्ष 2019 में झारखंड पुलिस सेवा में सीधी नियुक्ति एवं सीमित परीक्षा के माध्यम से सब इंस्पेक्टर पद पर नियुक्ति हुई थी। सीधी नियुक्ति वालों की ट्रेनिंग वर्ष 2021 में पूरी हो गई थी, इसके बाद उन्हें पहले वरीयता लिस्ट में रखा गया था।
सीमित परीक्षा से सब इंस्पेक्टर पद पर प्रोन्नति हुए लोगों की ट्रेनिंग पूरी नहीं हुई थी। उनकी ट्रेनिंग सितंबर 2024 में पूरी हुई, इसके बाद फिर सब इंस्पेक्टर पद से पदोन्नति के लिए वरीयता सूची तैयार की गई।
चूंकि सीमित परीक्षा वाले की नियुक्ति सब इंस्पेक्टर पद पर पहले हुई थी इसलिए उन्हें वरीयता सूची में सीधी नियुक्ति वालों से ऊपर रखा गया था। जिसे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।
एसीबी जांच की अद्यतन स्थिति सीलबंद लिफाफा में दे सरकार
हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) में प्रारंभिक जांच (पीई) के मामले 11 साल से अधिक समय तक लंबित रहने के मामले में गुरुवार को सुनवाई हुई।
सुनवाई के बाद अदालत ने राज्य सरकार को एसीबी में लंबित सभी प्रारंभिक जांचों की वर्तमान और अद्यतन स्थिति की रिपोर्ट तैयार कर सीलबंद लिफाफे में कोर्ट के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।
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सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता की ओर से एसीबी में पीई लंबे समय से लंबित मामलों का मुद्दा उठाया गया। अदालत को बताया गया कि एसीबी में कई प्रारंभिक जांच 11 साल से भी अधिक समय से लंबित हैं।
अदालत को बताया गया कि प्रारंभिक जांच पूरी नहीं होने के कारण इससे जुड़े लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग जांच लंबित रहने के दौरान ही सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
इसके बाद भी उनके खिलाफ प्रारंभिक जांच अब तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। कोर्ट को उदाहरण देते हुए बताया गया कि कुछ लोगों के खिलाफ प्रारंभिक जांच वर्ष 2013 से लंबित है, जबकि कुछ मामले वर्ष 2022 से लंबित चले आ रहे हैं।
इस पर हाई कोर्ट ने सरकार को एसीबी की सभी लंबित प्रारंभिक जांचों की मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। एसीबी में प्रारंभिक जांच के मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने और उनका समय पर निष्पादन नहीं होने का मामला हाई कोर्ट के संज्ञान में आया था।
इसके बाद हाई कोर्ट ने इस विषय पर स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की थी। मामले में कोर्ट इस बात की समीक्षा कर रहा है कि एसीबी में प्रारंभिक जांच के मामले कितने समय से लंबित हैं और उनके निष्पादन की वर्तमान स्थिति क्या है।
लंबे समय तक प्रारंभिक जांच लंबित रहने से संबंधित व्यक्तियों के सेवा और सेवानिवृत्ति से जुड़े मामलों पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा भी कोर्ट के समक्ष उठाया गया है।