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    ब्रिटिश काल में 100 साल पहले तय हुआ था रूट, ट्रैक और पुल भी बने; अब नई रेल लाइन से भंडरिया-बड़गड़ बाहर, भड़के आदिवासी

    Updated: Tue, 30 Jun 2026 03:10 PM (IST)

    बरवाडीह-अंबिकापुर-चिरमिरी रेल लाइन का मार्ग बदलने से भंडरिया और बड़गड़ के लोग आक्रोशित हैं। उनका कहना है- नया मार्ग इन आदिवासी बहुल क्षेत्रों को रेल स ...और पढ़ें

    बरवाडीह–अंबिकापुर–चिरमिरी रेल लाइन का इतिहास लगभग एक सदी पुराना है। (तस्वीर: जागरण)

    बरवाडीह–अंबिकापुर–चिरमिरी रेल लाइन का इतिहास लगभग एक सदी पुराना है। (तस्वीर: जागरण)

    HighLights

    1. बरवाडीह-अंबिकापुर रेल मार्ग बदलने पर लोग आक्रोशित।

    2. भंडरिया, बड़गड़ क्षेत्र नए रेल मार्ग से बाहर।

    3. पुराने मार्ग पर पुनर्विचार की मांग, आंदोलन की चेतावनी।

    जितेंद्र चंद्रवंशी, बड़गड़ (गढ़वा)/रांची। बरवाडीह–अंबिकापुर–चिरमिरी रेल लाइन के प्रस्तावित मार्ग से भंडरिया एवं बड़गड़ प्रखंड को बाहर किए जाने के विरोध में इंटरमेट मीडिया पर क्षेत्रवासियों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

    स्थानीय लोग बैठक कर आंदोलन की तैयारी कर रहे। फेसबुक और अन्य इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर पोस्ट साझा कर सरकार से पुराने रेल मार्ग पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं। बरवाडीह–अंबिकापुर–चिरमिरी रेल लाइन का इतिहास लगभग एक सदी पुराना है।

    बताया जाता है कि वर्ष 1925 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान पलामू और सरगुजा क्षेत्र के कोयला एवं खनिज संसाधनों के परिवहन के उद्देश्य से इस रेल मार्ग की परिकल्पना की गई थी। वर्ष 1930 के दशक में सर्वेक्षण के बाद निर्माण कार्य भी शुरू हुआ।

    उस समय कई स्थानों पर रेलवे पुल, नाले और मिट्टी के तटबंध बनाए गए, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के कारण निर्माण कार्य बीच में ही रोक दिया गया। इसके बाद यह महत्वाकांक्षी परियोजना दशकों तक अधूरी पड़ी रही। स्वतंत्रता के बाद भी क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों ने इस रेल लाइन को पूरा करने की मांग लगातार उठाई।

    पुराने मार्ग पर अधूरे रेलवे पुल, तटबंध तथा अन्य अवशेष मौजूद

    हाल के वर्षों में परियोजना को फिर से गति मिली, लेकिन 26 मई 2026 को केंद्र सरकार द्वारा बरवाडीह–गढ़वा रोड–रामानुजगंज–अंबिकापुर नई रेल लाइन को विशेष रेल परियोजना घोषित किए जाने के बाद भंडरिया और बड़गड़ क्षेत्र प्रस्तावित मार्ग से बाहर हो गया। इसे लेकर स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी है।

    जानकारों का कहना है कि नए प्रस्तावित गढ़वा रोड–रामानुजगंज–अंबिकापुर रेल मार्ग में गढ़वा रोड से रामानुजगंज होते हुए बलरामपुर तक रेलवे विभाग को बड़े पैमाने पर नए सिरे से भूमि अधिग्रहण करना होगा।

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    जबकि पुराने प्रस्तावित बरवाडीह–अंबिकापुर–चिरमिरी रेल मार्ग के लिए 1930–40 के दशक में ही कई स्थानों पर भूमि अधिग्रहण और प्रारंभिक निर्माण कार्य किए जा चुके थे। आज भी इस मार्ग पर अधूरे रेलवे पुल, तटबंध तथा अन्य अवशेष मौजूद हैं।

    वहीं, नए प्रस्तावित रेल मार्ग के सर्वेक्षण के दौरान रंका और विश्रामपुर क्षेत्र में कई रैयतों ने भूमि अधिग्रहण का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया था तथा गढ़वा समाहरणालय पहुंचकर उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा था। ऐसे में क्षेत्र के लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब पुराने मार्ग पर पहले से आधारभूत कार्य हो चुका था, तब नए मार्ग का चयन किन आधारों पर किया गया।

    लोगों का कहना है कि करीब 90 हजार आबादी वाला आदिवासी बहुल भंडारिया एवं बड़गड़ क्षेत्र रेल सुविधा से वंचित हो जाएगा। उनका तर्क है कि यदि पुराना मार्ग बरकरार रहता तो क्षेत्र के व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर खुलते।

    क्षेत्रवासियों का कहना है कि बरवाडीह–अंबिकापुर–चिरमिरी रेल लाइन पलामू लोकसभा क्षेत्र का दशकों पुराना मुद्दा रही है। अब जब परियोजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है तो भंडरिया और बड़गड़ को शामिल किया जाए।

    स्थानीय लोगों ने जनप्रतिनिधियों और सरकार से स्थानीय जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित रेल मार्ग पर पुनर्विचार करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि मांगों की अनदेखी होने पर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन शुरू किया जाएगा।

    मैं अभी अपने संसदीय क्षेत्र में हूं। अगले सप्ताह दिल्ली जाने पर संबंधित पदाधिकारियों से इसकी जानकारी लूंगा। उसके बाद ही इस परियोजना के संबंध में विस्तार से कुछ बता पाऊंगा।
    -वीडी राम, सांसद पलामू।

    बड़गड़ और भंडरिया क्षेत्र का रेल नेटवर्क से नहीं जुड़ पाना अत्यंत चिंता का विषय है। यह क्षेत्र लंबे समय से रेल संपर्क की मांग करता रहा है और यहां के लोगों की भावनाओं एवं विकास की आवश्यकताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
    -आलोक चौरसिया, विधायक डालटनगंज।

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