झारखंड HC के आदेश से संकट में पत्थर उद्योग, नियमों में बदलाव से खनन और क्रशर इकाइयां प्रभावित
झारखंड राज्य पत्थर उद्योग संघ की बैठक में हाईकोर्ट के आदेश से उत्पन्न संकट पर चर्चा हुई, जिसमें खनन पट्टों और क्रशर इकाइयों के लिए वन सीमा से दूरी के ...और पढ़ें


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जागरण संवाददाता, रांची। झारखंड राज्य पत्थर उद्योग संघ की एक महत्वपूर्ण बैठक शनिवार को मेन रोड स्थित बिरसा विहार में आयोजित की गई, जिसमें राज्यभर के खनन पट्टाधारियों और क्रशर व्यवसायियों ने हिस्सा लिया।
बैठक की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष बंदेश्वर प्रसाद सिंह (साहिबगंज) ने की। बैठक में मुख्य रूप से उच्च न्यायालय में लंबित पीआइएल संख्या 1950/2024 (आनंद कुमार बनाम झारखंड सरकार) के आलोक में खनन पट्टों और क्रशर इकाइयों के लिए वन सीमा से दूरी 400 मीटर तथा इकाइयों के बीच 500 मीटर की अनिवार्यता पर चर्चा की गई।
इस फैसले के बाद अधिकांश इकाइयों के सीटीओ पर रोक लग गई है, जिससे पूरा उद्योग प्रभावित हो रहा है। अध्यक्ष ने बताया कि वर्ष 2015 से पहले यह दूरी 500 मीटर थी, जिसे सरकार ने घटाकर 250 मीटर कर दिया था। उसी आधार पर व्यवसायियों ने लाइसेंस लेकर भारी निवेश किया, यहां तक कि कई लोगों ने बैंक ऋण भी लिया।
अब पुराने नियम लागू होने से अचानक संकट खड़ा हो गया है। बैठक में कहा गया कि यदि वर्तमान स्थिति बनी रही तो 60 से 80 प्रतिशत खदानें और क्रशर इकाइयाँ बंद हो सकती हैं, जिससे हजारों मजदूरों की आजीविका प्रभावित होगी और राज्य सरकार को राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
साथ ही गिट्टी की कीमतों में वृद्धि से आम जनता और इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों पर भी असर पड़ेगा।संघ के उपाध्यक्ष अनिल सिंह ने सरकार से तत्काल नियमों में संशोधन की मांग की।
वहीं, व्यवसायी नितेश सारदा ने उच्च रायल्टी दर को भी उद्योग के लिए बाधक बताया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिलकर समस्याओं के समाधान की मांग करेगा। धन्यवाद ज्ञापन किशोर खेमानी ने किया।
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